
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
लखनऊ।
गणतंत्र दिवस की सम्पूर्ण भारत में धूम रही। गांव गांव तक उत्सव का माहौल रहा। अनेक प्रकार के समारोहों का आयोजन किया गया। लखनऊ बख्सी तालाब की कुम्हरावां ग्राम पंचायत में भी भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसमें हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अब्दुल रहमान मसूदी मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता डॉ संजीव शुक्ला और संचालन शैलेश ने किया।

समारोह में अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता मन्जीव शुक्ल,विद्यांत हिन्दू पीजी कॉलेज में कॉमर्स के विभागाध्यक्ष डॉ राजीव शुक्ला,संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी,जिला विद्यालय निरीक्षक मुकेश कुमार शुक्ल सहित हजारों स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। समारोह की संयोजक ग्राम प्रधान कांति वाजपेयी और पूर्व प्रधान अमित वाजपेयी थे। ज्ञात हो कि अमित वाजपेयी को निर्मल ग्राम योजना के तहत राष्ट्रपति द्वारा पुरष्कृत किया जा चुका है।

ग्राम पंचायत के करीब पंद्रह स्कूल के बच्चों ने राष्ट्रभक्ति के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। पन्द्रह विद्यालयों के छत्तीस बच्चों को स्मृति चिन्ह और अस्सी होनहार बच्चों को मेडल प्रदान किये गए। जामिया मदरसा की बच्चियों ने भी देशभक्ति नाटक का मंचन किया। पत्रकार प्रांशु मिश्रा,सुरेश,सुदर्शन व सौरभ को सम्मानित किया गया। प्राथमिक स्कूल की प्रधानाचार्य निशी श्रीवास्तव को भी बेहतर कार्य के लिए पुरष्कृत किया गया।

न्यायमूर्ति मसूदी ने यहां देशभक्ति और सर्वधर्म सद्भाव का सन्देश दिया। कहा जाता है कि जो व्यक्ति स्वयं सद्भाव के मार्ग पर स्वयं अमल करता है,उसके द्वारा दिया गया सन्देश ही प्रमाणित होता है। उनके विचार ही प्रमाणिक होते है, लोग उस पर अमल करते है,उनसे प्रेरणा लेते है। जस्टिस मसूदी को पता चला कि इस गाँव में शिव जी का प्रसिद्ध मंदिर है,तो उन्होंने मंदिर जाने का निर्णय लिया। मंदिर परिसर में वह करीब आधे घण्टे तक रुके। इसके बाद वह कुम्हरावां में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में बने स्तम्भ स्थल पर गए। यहां उन्होंने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कुम्हरावां के तेरह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश पर अपना जीवन बलिदान किया था। न्यायमूर्ति मसूदी ने यहां के वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बचान प्रसाद शुक्ल को भी सम्मानित किया किया। कुम्हरावां में ब्रिटिश परतंत्रता के समय ही आजादी की मशाल जलाई गई थी। करीब एक सौ तीस वर्ष पहले यहां देशभक्ति व राष्ट्रीय सांस्कृतिक गौरव बढ़ाने वाले समारोह की शुरुआत की गई थी। इससे प्रेरणा लेकर लोग स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होते थे। स्वतंत्रता के बाद भी तीन दिन के इस समारोह की परंपरा जारी रही।

यह कुम्हरावां का स्थायी महोत्सव है। व्यवसाय या नौकरी के लिए लखनऊ के बाहर रहने वाले लोग इस महोत्सव में शामिल होने के लिए अवकाश लेकर आते है। देशभक्ति और धार्मिक ग्रन्थों पर आधारित नाटकों का मंचन होता है। उल्लेखनीय यह कि नाटक,पटकथा,संवाद का लेखन भी यहीं के लोग करते है। इस प्रकार नाटकों की अनेक पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। यहीं के लोग नाटकों में पात्र बनते है, गीत संगीत के विशेषज्ञ भी यहीं के लोग होते है। इस प्रकार कलाकरों व लेखकों की पूरी टीम है।

मुख्य समारोह में जस्टिस मसूदी ने कहा कि सर्वधर्म सद्भाव भारत की अद्भुत विशेषता है। इसको समझने और उसपर अमल करने की जिम्मेदारी भारत के सभी लोगों की है। उन्होंने समारोह में बालिकाओं की भागीदरी को सराहनीय बताया। कहा कि बेटियों को पढ़ लिखकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्हें आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

संविधान विशेषज्ञ न्यायमूर्ति ने कार्यपालिका और व्यवस्थापिका की परिवार स्तर पर सुंदर संदर्भ दिया। कहा कि संविधान के अनुसार व्यवस्थापिका कानून का निर्माण करती है, कार्यपालिका उसका पालन करती है। इसी प्रकार परिवार व समाज मे महिलाएं व्यवस्थापिका का कार्य करें, माताएं बहने इतनी सशक्त बने की वह दिशानिर्देश व मार्ग दर्शन करें। परिवार व समाज के अन्य लोग इस दिशा निर्देशन के अनुरूप कार्य करें। इस प्रकार आधी आबादी का वास्तविक प्रतिनिधित्व हो सकेगा। इसके लिए बालिकाओं को पढ़ लिखकर सक्षम बनना होगा। सभी लोगों को संविधान ने अपने अपने धर्म मजहब के पालन की स्वतंत्रता दी है। भारत पंथनिरपेक्ष देश है। इस निजी अधिकार के साथ साथ हम सबको राष्ट्रधर्म का भी पालन करना चाहिए। संविधान में मूल अधिकारों के साथ मूल कर्तव्य का भी उल्लेख किया गया है। हमको ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे समाज या राष्ट्र का नुकसान हो। इसलिए राष्ट्रधर्म का पालन करना चाहिए। इससे देश की अनेक समस्याओं का स्वभाविक और सहज तरीके से समाधान हो सकता है। हमको एक दूसरे की आस्था का सम्मान करना चाहिए।
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