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“अंग्रेज़ी पढ़ना बुरा नहीं है, पर हिंदी भूलना ख़राब है”: न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी

 

जगत तारन महिला महाविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई 54 के विशेष शिविर के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी जी ने कहा कि नौजवान पीढ़ी ही देश का आधार स्तंभ है। उनके सपने हमारे लिए मूल्यवान हैं। पर इन सपनों के क्रम में अतीत को भूलना ठीक नहीं है। पश्चिम की ओर भागते भागते हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी पढ़ना बुरा नहीं है, पर हिंदी भूलना ख़राब है। अंग्रेज़ी जीविका की भाषा हो सकती है। अंग्रेज़ी के विरोध की आवश्यकता नहीं है पर हिंदी को उसके माता का स्थान अवश्य दिया जाना चाहिए। अन्य भाषाएँ भी मौसी की तरह सम्मान्य हैं।

उन्होंने कहा कि नवयुवकों को प्रातःकाल उठकर योग करना चाहिये। व्यायाम करना युवाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना शिविरों में शारीरिक सत्र स्वस्थ शरीर निर्मिति के लिए महत्त्वपूर्ण है। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. आशिमा घोष ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ऐश्वर्या सिंह ने किया। इस अवसर पर लखनऊ से पधारी प्रो. सारिका दुबे ने भी सेविकाओं को संबोधित किया।

शिविर के दौरान आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार भी माननीय न्यायमूर्ति द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. अंकिता चतुर्वेदी, डॉ. निर्मला गुप्ता सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक गण उपस्थित रहे।

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