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शब्दों का संस्कारों में अनुवाद है हिंदी, बच्चन निराला पंत है प्रसाद है हिंदी- डॉo श्लेष गौतम

*शब्दों का संस्कारों में अनुवाद है हिंदी, बच्चन निराला पंत है प्रसाद है हिंदी- डॉo श्लेष गौतम*

*प्रयागराजl

रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर प्रयागराज के संगीताचार्य मनोज गुप्ता की सूचनानुसार विद्यालय के प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे के निर्देशन में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत पुरातन छात्र परिषद द्वारा पूर्व छात्र समागम समारोह एवं “काव्यधारा” नाम से कवि सम्मेलन का आयोजन विद्यालय प्रांगण में किया गयाl

कवि सम्मेलन के प्रारंभ में विद्यालय की छात्राओं ने मां सरस्वती जी की सुमधुर वंदना प्रस्तुत की, तत्पश्चात प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे ने अतिथि कवियों एवं पूर्व छात्र -छात्राओं का स्वागत करते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा एवं अंतर्राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देने हेतु समस्त रचनाकारों के सहयोग का आह्वान किया l


*काव्य पाठ का शुभारंभ पूर्व छात्र उत्कर्ष यादव ने “सोचता हूं आज हकीकत लिख दूं, अंधेरे हैं हर जगह बुझ गए दीपक लिख दूं ” तथा संदीप शुक्ला ने श्रृंगार रस की कविता “प्रेम वैदेही का बनवास है निर्जीव के जीने की यह आस है, सामने खड़े थे तुम सिंगार को आईने को संवरने का ए अहसास है”।

तत्पश्चात प्रसिद्ध युवा कवि डॉ श्लेष गौतम ने “धड़कन तुम एहसास तुम्ही हो सांस तुम्ही हो आस तुम्ही हो, नमन तुम्हे है युवा शक्ति कालजई इतिहास तुम्ही हो, गीत ग़ज़ल हो छंद तुम्ही हो महक और मकरंद तुम तुम्ही हो, राह दिखाते अलख जगाते गुरु विवेकानंद तुम्ही हो” सुनाकर सबकी वाहवाही लूटी।

उनके पश्चात प्रसिद्ध कवयित्री प्रीता बाजपेई ने अपनी एक सुंदर गीत रचना के माध्यम से कहा जब किसी की भी चाह करते हैं फिर उसी से निबाह करते हैं, गम के मारो की बेबसी देखो चुपके चुपके वह आह करते हैं” सुनाकर सभी के मन को गुदगुदाया, विद्यालय के पूर्व छात्र शिवम भगवती ने “वृंदावन की गलियां छूटी ब्रज के सारे घाट छुटे गोपियों संग प्रेम नर्तन ब्रज के सारे ठाट छुटे” प्रस्तुत करके जहां विरह वेदना की लकीर खींची, वही अपनी वीर रस की कविता “नापाक विरोधी जब-जब माता के आंचल फाड़ेगे, सुन लो दुनिया के शहंशाहों हम घर में घुस कर मारेंगे” से सर्जिकल स्ट्राइक की यादें ताजा कर दी।

तत्पश्चात दिनेश शुक्ला ने “कल्पनाओं में डूबा था कि दुनिया में जाकर सज धज कर दूल्हा बनूंगा, यहां तो पोशाक में सिर्फ कफन ही नजर आया है” तथा अंत में कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे जनकवि प्रकाश जी ने “राजा निज देश में ही शासन चलाता, किंतु विद्या विश्व में प्रतिष्ठावान बना देती है” सहित शिक्षा से संबंधित अनेकों मुक्तको का सारगर्भित काव्य पाठ किया l*

*कवि सम्मेलन का बड़ा सुंदर एवं सधा हुआ संचालन युवा कवि शिवम भगवती ने किया। संयोजन पूर्व छात्र परिषद प्रमुख शिवनारायण जी, अध्यक्ष प्रतीक त्यागी, महामंत्री प्रशांत पांडे सहित समस्त पदाधिकारीगणों ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संगीताचार्य मनोज गुप्ता ने किया।

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