
“कुदाल से कलम तक”75
जब संगम ने बुलाया : 30
“बस रह गया हिंदुस्तान जाते-जाते…!”
वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी
अमृत प्रभात में रहते अन्य जगहों से भी आफर आए, लेकिन मैं कुछ होम सिकनेस और कुछ अमृत प्रभात में मिले संतोष के कारण बाहर नहीं जाना चाहता था। जब हिंदुस्तान पटना से निकलने की चर्चा शुरू हुई तो पारस बाबू ने मुझे वहां बुलाने की कोशिश की। उस समय प्रदीप और सर्च लाइट पटना में बिरला समूह के अखबार थे। हिंदुस्तान निकलने के पहले प्रदीप ही निकाल रहा था। अंदर ही अंदर तैयारी भी चल रही थी। इलाहाबाद के योगेश चंद्र अग्रवाल जी वहां उसके कर्ताधर्ता बन कर गए थे। वह पटना जाते रहते और तैयारी का जायजा लेते रहते। पारस बाबू भी आज से रिटायर हो गए थे और प्रदीप से जुड गए थे। वह योगेश जी के सलाहकार हो गए थे संपादकीय विषयों के। उन्होने मेरा नाम सुझाया। लेकिन पारस बाबू ने मुझे यह जानकारी नहीं दी।
एक दिन मैं अमृत प्रभात दफ्तर में था तो लीडर प्रेस से एक आदमी आया और मेरा नाम पूछते हुए बोला कि आपको लीडर के मैनेजर ने (एक सज्जन का नाम लेते हुए जो मुझे इस समय याद नहीं आ रहा है) ने बुलाया है। मैं उन्हें जानता नहीं था। मैंने पूछा कि क्यों, तो वह कोई जवाब नहीं दे सका और कहा आप कल उनसे मिल लें।
मैने सोचा कि यदि बुलाया है तो मिलने में कोई हर्ज नहीं है। मैं दूसरे दिन वहां गया और उनका नाम लेकर पूछा तो चपरासी मुझे उनके पास ले गया। वह मुझे लेकर लीडर के गेस्ट हाउस में गए जहां योगेश जी बैठे हुए थे। उनसे कहा कि यही रामधनी जी हैं। इतना परिचय करा कर वह चले गए। योगेश जी ने बताया कि आपका नाम पारस बाबू ने बताया है। आप पटना चलिए और हम लोगों के साथ काम कीजिए।
मैं वहां एक घंटा से अधिक रहा। उन्होंने कॉफी पिलाई। मेरे बारे में सब जानकारी ली। कहां के हैं, परिवार में कौन है, अमृत प्रभात में कब से हैं? क्या काम करते हैं? पहले कहां थे आदि आदि।
मेरे सामने यह प्रस्ताव अचानक आया था। वह हिंदुस्तान के बारे में नहीं बता रहे थे, बस अपने साथ चलने की बात कह रहे थे। मैने कहा भी कि पटना से तो बिरला समूह का अखबार प्रदीप है। वह आठ पेज का अखबार है। मैने उसे देखा है। अमृत प्रभात के आगे कही नहीं टिकता। मुझे उसमें ले जाकर आप उसे क्या बनाना चाहते हैं। मैं यहां अपने काम और पद से संतुष्ट हूं।
उस समय मैं अमृत प्रभात में मुख्य उपसंपादक था। योगेश जी को मेरा जवाब अच्छा नहीं लग रहा था। वह बार- बार बिरला का नाम लेकर मुझे प्रलोभन दे रहे थे। जाहिर है, पत्रिका ग्रुप के घोष परिवार से तो बिरला परिवार बड़ा ही था। अंत में उन्होंने कहा कि यदि आपका मन ज्वाइन करने का न हो तो कोई बात नहीं, मैं आपसे कहूंगा कि आप पटना आएं और बिरला को देखें। मेरे अतिथि के रूप में।
मैनें कहा- देखते हैं।
लेकिन मैं पटना नहीं गया। उस समय मेरा बचपना भी था। शायद यह भी कि मैं भविष्य को नहीं देख पा रहा था। मैंने कुछ लोगों से बिहार के बारे में जानकारी ली कि वहां का माहौल कैसा है तो लोगों ने कहा कि वहां जातिवाद बहुत है और अराजक स्थिति है। मेरी पत्नी के फूफा जी ने अपना अनुभव बताया था कि एक बार वह किसी काम से बिहार गए थे। उन दिनों उन्हें किसी बीमारी के लिए रोज इंजेक्शन लगते थे। वह अपने साथ इंजेक्शन ले गए थे। लगवाने के लिए जिला अस्पताल में गए तो कंपाउंडर ने इंजेक्शन लगाने के पहले पानी में रुई भिगो कर हाथ पर मला तो वह बोले कि स्प्रिट लगा लीजिए तो उसने कहा कि मैं आपकी बोली से समझ गया कि आप यूपी के हैं, इसी से मैंने पानी लगा लिया है, यहां तो सुई लगाने के पहले कुछ नहीं लगाता। सूखे ही इंजेक्शन लगा देता हूं।
वह बोले कि बिहार ऐसा है। यह चालीस साल पहले की बात है। अब तो ऐसा नहीं होगा। इन सबने मेरे मन को उत्साहित नहीं किया। मेरे न जाने से पारस बाबू बहुत नाराज हुए। योगेश जी तो हुए ही। उनकी धारणा मेरे बारे मे अच्छी नहीं बनी।
बाद में जब लखनऊ से हिंदुस्तान निकला तो मैंने पारस बाबू से कहा कि अब योगेश जी से बात कीजिए, लखनऊ में लगवा दें।
तब तक पत्रिका ही हालत बहुत खराब हो चुकी थी। तो वह बोले कि योगेश जी आपसे बहुत नाराज हैं। वह कहते है कि रामधनी जी का क्या ठिकाना, इस बार भी कहीं मना कर दें।
और मैं हिंदुस्तान में नहीं जा सका। हालांकि योगेश जी से मेरा पत्र व्यवहार बना रहा। मैने बेटी की शादी में कार्ड भेजा तो उन्होने व्यवहार भी भेजा लेकिन उनकी नाराजगी बनी रही। बाद में उनसे संपर्क खत्म हो गया।
यहां यह बताना जरूरी है कि हिंदुस्तान ने ही 25 अशोक मार्ग स्थित पत्रिका की जमीन और अन्य संपत्ति खरीदी थी और यह तय हुआ था कि जो धन मिलेगा उससे कर्मचारियों को उनका देय दे दिया जाएगा और कुछ राशि इलाहाबाद में लगाकर वहां से एनआइपी और अमृत प्रभात को संभाल लिया जाएगा।
लेकिन कर्मचारियों का देय ही बंदी के समय के वेतन आदि को लेकर इतना हो गया था कि सब पैसा उसी में लग गया और इलाहाबाद के लिए कुछ खास नहीं बचा। यह बात बाद में श्री के बी माथुर ने मुझे बताई थी।
क्रमशः

Ghoomta Aina | Latest Hindi News | Breaking News घूमता आईना | News and Views Around the World
Ghoomta Aina | Latest Hindi News | Breaking News घूमता आईना | News and Views Around the World