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राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र का 7 वां सम्मेलन

लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला लखनऊ में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन का उदघाटन करेंगे

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ में ओम बिरला करेंगें उद्घाटन

लखनऊ।

लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला 16 जनवरी 2020 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश में विधान सभा के मुख्य कक्ष में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे । मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री लालजी टंडन उद्घाटन सत्र में विशिष्ट सभा को संबोधित करेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री योगी आदित्यनाथ इस सम्मेलन के उदघाटन समारोह में शामिल होंगे । उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित स्वागत भाषण देंगे तथा उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति श्री रमेश यादव धन्यवाद देंगे । उत्तर प्रदेश विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी भी उदघाटन सत्र में शामिल होंगे । संसद सदस्य, उत्तर प्रदेश विधानमंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्य तथा अन्य विशिष्ट लोग भी उदघाटन समारोह में शामिल होंगे ।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल उत्तर प्रदेश विधान सभा में 17 जनवरी 2020 को आयोजित किए जा रहे इस सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करेंगी । लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित, उत्तर प्रदेश विधानमंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्य और अन्य विशिष्टजन भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे ।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में पूर्ण सत्रों के दौरान निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जाएगी : (i) बजट प्रस्तावों की संवीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना और (ii) जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना  । उपसभापति, राज्य सभा, श्री हरिवंश पहले विषय पर चर्चा के दौरान मुख्य भाषण देंगे, जबकि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी दूसरे विषय पर मुख्य भाषण देंगे।

जहां तक पहले विषय अर्थात ‘बजट प्रस्तावों की संवीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना’ का संबंध है, विधानमंडलों द्वारा बजट प्रस्तावों की जांच किए जाने की जरूरत पर समय-समय पर बल दिया गया है । बजट सरकार का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीति का साधन होता है और इसमें सरकार की प्राथमिकताओं का व्यापक ब्यौरा होता है । जनता के प्रतिनिधि निकाय होने के नाते देश के विधानमंडल यह सुनिश्चित करने के लिए सही मायने में संवैधानिक संस्थाएं हैं कि बजट में देश की जरूरतों और लोगों की अपेक्षाओं तथा उपलब्ध संसाधनों के बीच सही तालमेल हो । इसके अलावा, बजट प्रक्रिया में प्रभावी विधायी भागीदारी से रक्षोपाय सुनिश्चित होते हैं जो पारदर्शी और जवाबदेह शासन के लिए जरूरी हैं और जो जन सेवाएँ अच्छे ढंग से उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित करते हैं । विधानमंडल बजट से जुड़े निर्णयों में संतुलित मत और सुझाव देने में भी मदद करते हैं और इस प्रकार कठिन बजट प्रक्रिया के संबंध में व्यापक सहमति बनाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं ।

सम्मेलन में जिस दूसरे विषय अर्थात ‘जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना ‘ पर विचार किया जाना है, वह भी आज के समय में बहुत प्रासंगिक है । ऐसा महसूस किया गया है कि जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना और विधायी कार्यों की ओर उनका ध्यान बढ़ाना संसदीय लोकतन्त्र की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । पहली बार जनप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित हुए सदस्यों को संसदीय प्रक्रियाओं, पद्धतियों, परिपाटियों, आचरण और परम्पराओं से परिचित कराने के लिए विधायी जानकारी दिया जाना बहुत जरूरी है । पारित किए जाने वाले क़ानूनों के बारे में ब्रीफिंग सत्र विधायी कार्यों की ओर जनप्रतिनिधियों का ध्यान बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं । निरंतर बदल रही लोक नीति के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने की जनप्रतिनिधियों की योग्यता बहुत हद तक आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी की उपलब्धता पर निर्भर करती है । जानकार और सशक्त जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचनक्षेत्रों की जरूरतों और लोगों की इच्छाओं से अधिक परिचित होते हैं और विधानमंडलों में ये मामले उठाकर इनका समाधान कर सकते हैं ।

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सी पी ए) की उन राष्ट्रमंडल देशों के विधानमंडलों में 180 से अधिक शाखाएँ हैं, जहाँ संसदीय लोकतंत्र है। । ये सभी शाखाएँ भौगौलिक रूप से नौ राष्ट्रमंडल क्षेत्रों में बंटी हैं ।

सी पी ए भारत क्षेत्र, जो पहले सी पी ए एशिया क्षेत्र का भाग था, 7 सितंबर 2004 से एक स्वतंत्र क्षेत्र बन गया । सी पी ए भारत क्षेत्र में भारत केंद्र शाखा (भारत की संसद) और 30 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र शाखाएँ हैं । सी पी ए भारत क्षेत्र के ऐसे सम्मेलनों का आयोजन दो वर्ष में एक बार किया जाता है और इसका छठा सम्मेलन वर्ष 2017 में पटना में हुआ था ।

सी पी ए भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन में लगभग 100 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है; और सी पी ए के ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र और साउथ ईस्ट एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रतिनिधि भी सी पी ए भारत क्षेत्र सम्मेलन में भाग लेंगे ।

सम्मेलन की पूर्वसंध्या पर आज 15 जनवरी 2020 को सी पी ए भारत क्षेत्र की कार्यकारी समिति की बैठक लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला की अध्यक्षता में होगी ।

पिछले कुछ समय में उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास नया अध्याय जुड़ा था,लगातार अड़तालीस घण्टे तक इसका विशेष सत्र चला था। अब पहली बार राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ के भारत प्रक्षेत्र सम्मेलन का यहां आयोजन होगा। वैसे राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन में तिरपन देश शामिल है। भारत और इसके सभी राज्य इसके सदस्य है। ये सभी देश कभी ब्रिटेन के उपनिवेश हुआ करते थे।

लेकिन स्वस्थ व संवैधानिक प्रजातंत्र के मामले में भारत ने ही सर्वश्रेष्ठ मुकाम बनाया है। भारत जैसी विविधता इनमें से किसी देश में नहीं है। जाति मजहब भाषा आदि अनेक विविधताओं के बाद भी यहां की संसदात्मक शासन प्रणाली मजबूती से कार्य कर रही है। भारत में उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा राज्य है। यह भी दिलचस्प है कि राष्ट्रमण्डल में भी उत्तर प्रदेश का यही स्थान है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजधानी में राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश के विधाई इतिहास में पिछले कुछ समय में नए अध्याय जुड़े है। महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष अधिवेशन आहूत किया गया था। यह अधिवेशन लगातार अड़तालीस घण्टे तक चला था। इसमें संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास प्रस्तावों पर चर्चा की गई थी। यह अच्छा है कि अब यहां राष्ट्रमण्डल का सम्मेलन हो रहा है। कुछ समय पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विधानसभा अध्यक्ष राष्ट्रमण्डल सम्मेलन में भाग लेने गए थे। वहां इन लोगों के विचारों को बड़ी गम्भीरता से सुना गया था।
हृदय नारायण दीक्षित भारत के प्राचीन वांग्मय के साथ ही संविधान के भी विद्वान है। विश्व के अनेक देशों के संविधान और विधाई प्रणाली पर भी उनका गहन अध्ययन है। उन्होंने सम्मेलन की पूर्वसंध्या पर समारोह के संबन्ध में जानकारी दी।
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के भारत प्रक्षेत्र के सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन लखनऊ में सोलह से बीस से जनवरी तक चलेगा। इसमें राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर व पीठासीन अधिकारी शामिल होंगे। सम्मेलन में संसदीय परंपराओं, मुद्दों व सदन चलाने के नियमों पर चर्चा होगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने इसके मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी कर ली है। इस सम्मेलन में राष्ट्रमण्डल के अनेक देशों की संसद व राज्य विधानमंडल के अध्यक्ष शामिल होंगे। राष्ट्र मंडल देशों के कुल एक सौ तिरानबे राज्य भी इस सम्मेलन के सदस्य है। विदेशी मेहमानों के संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण यात्रा को भी जोड़ा गया है। राष्ट्रमण्डल देशों के प्रतिनिधि रामलाल के दर्शन करने अयोध्या भी जाएंगे। इनके साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला,विधानसभा अध्य्क्ष हृदय नारायण दीक्षित,राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी रहेंगे। कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जन्मभूमि विवाद का समाधान किया था। पूरे देश ने इसे शांति व सौहार्द के साथ स्वीकार किया था। वस्तुतः यह भारत की विधाई व्यवस्था की ही कामयाबी थी। विदेशी मेहमान इसका भी अनुभव करेंगे। प्रभु राम के प्रति आस्था रखने वाले लोग इन राष्ट्रमण्डल देशों में भी है। इनमें से कई देशों में नियमित रूप से रामलीला का आयोजन किया जाता है। पिछली दीपावली पर फिजी की स्पीकर अयोध्या आई थी। यहां उन्होंने रामचरित मानस की चौपाइयों का गायन किया था। इन लोगों के लिए अयोध्या यात्रा का विशेष महत्व होगा। अयोध्या विश्व की प्राचीनतम नगरों में शामिल है। यहां का गौरवशाली इतिहास रहा है। पिछले तीन वर्षों में यहां विकास के अनेक कार्य हुए है। विदेशी मेहमानों को यहां नया अनुभव मिलेगा। इस सम्मेलन में देश के सभी राज्यों की विधानसभा के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा राष्ट्रमण्डल देशों के सभी सात क्षेत्रीय समितियों के संसदीय प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होगें। राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष,विधान परिषद सभापति, सचिव भी सहभागी होगें। इसमें लोकसभा व राज्यसभा के पच्चीस पच्चीस सदस्यों की टीम विशेष रूप से शामिल होगी। राष्ट्रमण्डल क्षेत्रीय उप समिति के लगभग बीस विदेशी प्रतिनिधि भी होगें।

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