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पीएफआई संगठन के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी

एक बार फिर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी को मजबूत करने में जुटे आतंकी

एक बार फिर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी को मजबूत करने में जुटे आतंकी

पीएफआई संगठन के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद सच आया सामने

ए अहमद सौदागर

लखनऊ।

खूंखार संगठन आईएम के कमजोर होने से ही आतंकी सिमी को मजबूत करने के लिए एक बार फिर ताकत झोंक रहे हैं। इनकी जड़ें यूपी के अलावा अन्य राज्यों तक फैली हुई है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजर सिमी के कई सदस्यों पर जमी हुई है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े पीएफआई के सदस्यों के नेटवर्क को मौजूदा समय में बल दे रहा है।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन के तहत से ढूंढ राजधानी लखनऊ में 4 दिन पूर्व आतंकी संगठन में काम करने वाले वसीम अहमद, नदीम एवं अशफाक की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर यूपी कनेक्शन सामने आ गया है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अब इस संगठन का इलाका नेटवर्क ही खंगालना शुरू कर दिया है। सूत्रों की माने तो इसको लेकर पुलिस की टीमें भी गुपचुप तरीके से काम कर रही है। देश व प्रदेश में आतंक का जाल फैलाने वाले प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी के लिए एफ आई के सदस्य हमेशा से ही मददगार रहे। मौजूदा समय में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने यूपी के अलग-अलग जिलों में आतंकी संगठनों का नेटवर्क काफी हद तक ध्वस्त कर दिया है।
गौर करें तो यह सिलसिला ऑपरेशन बीते सालों बटला हाउस कांड से शुरू हुआ था। पुलिस अफसरों का मानना है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन आई एम के सरगरा यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद आई एम की रीढ़ टूट गई थी।
सनद रहे कि 21 नवंबर 2011 को आतंकी कातिल सिद्दीकी के बाद यूपी और बिहार के पकड़े गए आई एम के 14 आतंकियों की गिरफ्तारी से सुरक्षा एजेंसियों को इस संगठन को खोखला करने में और मदद मिली थी।
यह बच्चा 27 सितंबर 2012 को असद और इमरान गिरफ्तारी से भी सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी संगठनों के बारे में अहम जानकारियां मिली थी।
उसके बाद 23 मार्च 2014 को रहमान उर्फ वकास और 25 मार्च 2014 को तहसीन अख्तर उर्फ मोनू समेत चार आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद मिली अहम जानकारियों से पुलिस को काफी मदद मिली थी, जिससे आई एम का सिंडिकेट कमजोर पड़ गया।
बताया जा रहा है कि उस समय पड़ताल में सामने आया था कि सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ा तहसीन आई एम के अलावा सिमी कार्यकर्ताओं के भी संपर्क में था।
गौर करें तो 14 सितंबर 2014 को हुए बिजनौर विस्फोट और 20 जनवरी को गोंडवाना एक्सप्रेस में बम रखे जाने के मामले में भी सिमी कनेक्शन सामने आया था।
सूत्रों का कहना है कि जहां एक और आईएम के आतंकी सिमी को सपोर्ट कर रहे थे, वही महाराष्ट्र निवासी अब्दुल सुभान तौकीर इसकी जड़े मजबूत करने में पूरी ताकत झोंके हुए थे। तौकीर को सुरक्षा एजेंसियों ने 2004 में से ही तलाश कर रही थी।
राजधानी लखनऊ समेत यूपी के कई जिलों में नागरिकता संशोधन को लेकर हुए बवाल के बाद लखनऊ में सिमी से जुड़े पीएफआई के सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो सामने आया कि इनका भी कनेक्शन सिमी संगठन से जुड़ा है। जानकार सूत्रों की माने तो लखनऊ से हुई गिरफ्तारी के बाद से अशफाक, नदीम व वसीम के अन्य साथियों के बारे में पुलिस किटी में पता लगा रही है कि इनका अहम ठिकाना किन किन जिलों में है। एसएसपी कलानिधि नैथानी का कहना है कि आतंक से जुड़े कई लोगों के मामले में गहन छानबीन की जा रही है और उन तब पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है कि बवाल करने में कौन-कौन लोग शामिल है।

आतंकियों का राजधानी से रहा है पुराना नाता

नागरिकता संशोधन के विरोध में बवाल करने वाले पीएफआई के 3 लोगों की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर राजधानी में आतंकियों की जड़े गहरी होने का सवाल खड़ा हो रहा है।
दरअसल लखनऊ को पहले कई आतंकी संगठन के सदस्य अपनी शरण स्थली के तौर पर इस्तेमाल कर चुके हैं। उनका यहां लंबा नेटवर्क भी रहा है।
15 अगस्त वर्ष 2008 में एसटीएफ ने जमात उल मुजाहिद्दीन के आतंकी मोहम्मद मसरूर को गिरफ्तार किया था।
बताया जा रहा है कि मसरूर यहां चारबाग स्थित रेलवे क्वार्टर में छिपकर रहता था और लालबाग क्षेत्र में शीशे के शोरूम में नाम बदलकर काम कर रहा था।
2007 मैं एटीएस ने सिमी के सक्रिय सदस्य होने के आरोप में शहबाज को पकड़ा था, जो यहां मौलवीगंज क्षेत्र में एक एजेंसी का संचालन करता था। आरोपी साहब आज का नाम जयपुर में हुए बम धमाके में सामने आया था, जबकि वर्ष 2006 में करण क्षेत्र में पकड़ा गया आई एस आई एजेंट लारे खान यहां आईटी चौराहे के पास एक प्लेसमेंट एजेंसी का संचालन कर रहा था। यह तो बानगी भर है और भी कई ऐसे लोग संदिग्ध अवस्था में रह रहे थे।

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