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“नेताओं के जुलूस सड़क-चौराहे पर दिखाई देने शुरू हो गये हैं”!

“मगर सच है: 1”: राकेश शर्मा

सच, जो आप देख रहे है …!
यूपी में चुनाव नजदीक हैं…!

सामने कोरोना महामारी की तीसरी लहर के आने से लोगों में घबराहट है, डर, दहशत है….मगर, नेताओं ( पक्ष/विपक्ष) को जुलूसों को निकालने की खुली इजाज़त है, निकाले जा रहे हैं!

और ये हम लोगों से कहते हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों के जुलूस निकालने का मतलब है कोरोना को दावत देना, इसीलिए प्रतिबंध जरूरी है बात एकदम सही भी है ।
मगर यह क्या ?

अजीब हुकुमत है, अजब अदालत है!

इन्हें जनता के फिक्र की, डर दहशत की जरा भी चिंता नही , ये नेता जनता को बेवकूफ बना ते आ रहे थे, आज भी बेवकूफ बना रहे हैं !!

नेताओं के जुलूस सड़क, चौराहे पर दिखाई देना शुरू हो गये है !

गलत भी क्या है ये नेता लोग जनता को तो मूर्ख समझते हैं और समझते भी रहेंगे, मगर ‘सच्चाई’ ये भी है कि वास्तव में वोटर ही है इसके लिए जिम्मेदार !

राजनीतिक पार्टियों के द्वारा चयनित प्रत्याशी जो दागी / भृष्टाचारी /अपराधी हैं, ये जानते हुए भी और जिसे वोट देकर पहले भी वोटर, आज़मां चुके होते हैं, तब भी अपना दिमाग बेचकर, बेबकूफ़ों की तरह वोट देने उन्हें ही चले जाते हैंं।

राजनैतिक पार्टियां इन्हें अपना प्रत्याशी क्यों बनाती हैं? उसका भी स्पष्ट कारण है। वो इसलिए बनाती हैं कि दागियों अपराधियों को तो सिर्फ लोगों से और शासन से अपनी सुरक्षा और धन की भी सुरक्षा चाहिए, यह सब सुविधाएं उन्हें राजनीतिक पार्टियां ही आसानी से देती हैं। ये सब देते हुए पार्टियां कमीशन, चंदा, के नाम पर या अन्य रूप में आसानी से वसूल करती हैं। ये पॉलिटिकल पार्टियां दागियों को कायदे से मैनेज करते हुए और उन्हें भयदोहन / ब्लैक मेलिंग के तरीके को बहुत बढ़िया तरीके से मेनैज करती हैं, यही उनके द्वारा पार्टी को दिया/ जमा किया धन (पार्टी फंड ) चुनाव होने के उपरांत सरकार बनाने/ गिराने के लिए और विधायक सांसदों को रिझाने के काम आता है। ऐसे ही लोगों को पार्टी में शामिल करने या उनके समर्थन करने पर सरकार बनती है। उसके बाद से, शुरू हो जाता है विभाग के वार्षिक बजट के आधार पर कमीशन बाजी का खेल और वसूली भी शुरू हो जाती है।

चुनाव में, जीतने के बाद, सरकार बनाने में पार्टी का फंड खर्च होता है। होगा भी, तो वो वसूला भी तो जाएगा, यह रास्ता इसी तरह बनता हैं। नेतागिरी में यहाँ शैक्षिक योग्यता नही देखी जाती है या कोई स्थान नही है बल्कि यह देखा जाता है कि फलाना कितना ज्यादा कमीशन वसूल सकता है, नाम दिया जाता है “पार्टी फंड में चंदा” देने का सफेदपोश तरीका को ही पार्टी फंड नाम दिया है !!
ये ही लोग, वर्तमान देश के प्रभु हैं। इनका नाम लेकर नमन कीजिए, प्रसाद,भोग लगाइए, अपना घर जिन्दगी संवारिए और ऐश करिए।

यह मुकेश अंबानी / गौतम अदानी के नाखून के बराबर करोड़पति जैसा बनने का शॉर्ट कट कामयाब तरीका है।

लेखक हाई कोर्ट में अधिवक्ता हैं

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