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High Court : मथुरा: “वृंदावन के नायब तहसीलदार पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र निस्तारित न किए जाने पर एक माह में आख्या डीएम को दें”

प्रयागराज।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए मथुरा के जिलाधिकारी को याची राधा चरन की पुनर्स्थापना याचिका पर एक माह के भीतर नायब तहसीलदार से आख्या मंगाने का समय दिया है।

याची राधा चरन निवासी मथुरा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में नायब तहसीलदार वृंदावन, मथुरा की अदालत में पुनर्स्थापना का प्रार्थना पत्र वर्ष 2017 में दाखिल किया था। पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र की शीघ्र सुनवाई न होने के कारण याची ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करके समयबद्ध सीमा के अंतर्गत उपरोक्त पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र का शीघ्र निस्तारण किए जाने की प्रार्थना की थी जिस पर उच्च न्यायालय ने उक्त प्रार्थना पत्र को दो माह के भीतर निस्तारित करने का आदेश फरवरी 2021 में दिया था। किंतु समय सीमा बीत जाने के बावजूद याची द्वारा दाखिल पुर्नस्थापना पत्र निस्तारित नहीं किया गया था। इससे क्षुब्ध होकर याची राधा चरन ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।

अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी मथुरा से एक माह के भीतर नायब तहसीलदार द्वारा किए गए निस्तारण का निर्देश मंगाने का स्थाई अधिवक्ता को अवसर दिया है। याची की तरफ से अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र एवं स्नेह मधुर ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।

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