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“अकेलापन अभिशाप है, पर एकांत अभिशाप नहीं है… इसी एकांत को प्राप्त करने का साधन है, मेडिटेशन”

“रामचरितमानस और व्यक्तित्व निर्माण”

प्रयागराज।

हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में बोलते हुए तमिलनाडु केन्द्रीय विश्वविद्यालय, तमिलनाडु के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर एस.वी.एस.एस. नारायण राजू ने “रामचरितमानस और व्यक्तित्व निर्माण” विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमें पहले अपने को पहचानना चाहिए। इस दिशा में रामचरितमानस हमारा मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि बिना सज्जनों और श्रेष्ठ ग्रंथों के अध्ययन के विवेक जागृत नहीं होता।

अकेलेपन और एकांत के अंतर को भी जानने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि अकेलापन अभिशाप है पर एकांत अभिशाप नहीं है। इसी एकांत को प्राप्त करने का साधन है, मेडिटेशन। यह डिप्रेशन से मुक्ति का मार्ग है। रामकथा हमें इसी अकेलेपन से बचाती है।

व्याख्यान के दूसरे सत्र में “समकालीन मीडिया विमर्श” विषय पर बोलते हुए केरल विश्वविद्यालय, केरल के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर जयचंद्रन आर. ने कहा कि समकालीन मीडिया सनसनीखेज पत्रकारिता की वाहक है। आज विज्ञापनों की जो बहार है जैसे- मेरा नंबर आएगा कब, यह दिल मांगे मोर, कमर फिट तो परिवार हिट, यही है राइट चॉइस बेबी, खाना ही पड़ेगा जैसे स्लोगन आज मीडिया में अधिक प्रभावशाली हो गए हैं। ‘कर लो दुनिया मुठ्ठी में’ यह समकालीन मीडिया विमर्श का नारा बनता जा रहा है। हमें मीडिया के इस अर्थ विचलन और भाव विचलन की तरफ जरूर देखना चाहिए और इससे मीडिया की शुचिता और उपादेयता दोनों बढ़ेगी।

कार्यक्रम में बोलते हुए हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर कृपाशंकर पाण्डेय ने कहा कि रामचरित से समाज को प्रेरणा मिलती है। परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण ही देश और समाज को समर्थ और समृद्ध बनाता है।

व्याख्यानमाला के संयोजक, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने कहा की मूल्यों के प्रति निष्ठा रखना, सत्य के प्रति निष्ठा रखना और बिना फल की चिंता करते हुए कर्म करते जाना जैसे विषयों की प्रेरणा हमें रामचरित्र से मिलती है। उन्होंने कहा कि मीडिया भी मनुष्य और समाज को आईना दिखाने का काम करती है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने तथा धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी विभाग की सहायक आचार्य डॉ सुरभि त्रिपाठी जी ने किया।

कार्यक्रम में देश के 24 राज्यों से कुल 863 नामांकन अनुरोध प्राप्त हुए, जिनमें 218 प्राध्यापक, 132 शोध छात्र और 513 छात्र शामिल हैं। इनमें 492 पुरुष और 371 महिलाएं शामिल हैं। भारत के बाहर अमेरिका, नेपाल और कतर आदि देशों से भी नामांकन अनुरोध प्राप्त हुए।

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