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MP Political Crisis : सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- स्पीकर ने अब तक विधायकों के इस्तीफों पर क्यों नहीं लिया फैसला

नई दिल्ली/भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में चल रही राजनीतिक रस्साकसी के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chauhan) समेत अन्य 9 लोगों की याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर से पूछा कि विधायकों के इस्तीफों पर अब तक फैसला क्यों नहीं लिया गया. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि स्पीकर सहमत नहीं हैं तो वे इस्तीफों को नामंजूर कर सकते हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल के बागी विधायकों से मिलने की बात पर इनकार कर दिया है. अब मामले की अगली सुनवाई गुरुवार सुबह 10.30 बजे होगी.

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए बागी विधायकों के त्यागपत्रों के मामले में जांच की आवश्यकता है.वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से रिक्त विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने तक शक्ति परीक्षण स्थगित करने की मांग की. कांग्रेस के 16 बागी विधायकों के लिए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह अदालत में पेश हुए. उन्होंने कहा, ‘कानून का कोई सिद्धांत नहीं है कि उन्हें किसी से मिलने के लिए मजबूर करने के लिए. हमारा अपहरण नहीं किया गया है. हम एक सीडी में इस सबूत को अदालत में पेश कर रहे हैं.’

सुप्रीम कोर्ट में 16 बागी विधायकों की ओर से पेश वकील मनिंदर सिंह ने कहा, ‘हमारा इस्तीफा केवल लोकतंत्र को मजबूत करने के इरादे से है. हमने अपनी विचारधाराओं के कारण इस्तीफा दिया. इस्तीफे का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए अध्यक्ष पर संबंधित कर्तव्य क्या है? क्या वह इस्तीफे को दबा कर बैठ जाएंगे? वह इस बात से सहमत हैं कि वह कुछ को स्वीकार करेंगे, दूसरों को स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि राजनीतिक खेल चल रहा है ?’

भाजपा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि बागी विधायक वापस भोपाल नहीं आएंगे. उन्होंने कहा कि विधायकों को स्पीकर पर भरोसा नहीं है.MLA बेंगलुरु से भोपाल नहीं आना चाहते.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम विधायिका के काम में दखल नहीं देना चाहते हैं लेकिन हम यह जानना चाहते हैं कि आखिर विधायक बंधक तो नहीं हैं. हमें यह तय करना है कि विधायक अपनी इच्छा से काम कर सकें. अदालत ने कहा कि बहुमत किसके पास है हम यह तय नहीं करेंगे.

कांग्रेस ने न्यायालय में आरोप लगाया कि मप्र में उसके बागी विधायकों के इस्तीफे बलपूर्वक और डरा धमका कर ले जाए गये हैं और यह उन्होंने स्वेच्छा से ऐसा नहीं किया है.कांग्रेस ने कहा कि बागी विधायकों को भाजपा चार्टर्ड विमानों से ले गयी और उन्हें एक रिजार्ट में रखा गया है. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भाजपा नेता होली के दिन अध्यक्ष के आवास पहुंचे और उन्हें बागी 19 विधायकों के इस्तीफे सौंपे, यह इस मामले में उनकी भूमिका दर्शाता है.

वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की उस याचिका का विरोध किया, जिसमें उसने उप चुनाव तक शक्ति परीक्षण टालने की मांग की है.चौहान ने मध्य प्रदेश विधानसभा में तत्काल शक्ति परीक्षण की मांग करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार एक दिन भी सत्ता में नहीं रह सकती क्योंकि वह बहुमत खो चुकी है.इससे पहले मध्य प्रदेश के राज्यपाल लाल जी टंडन (Lal ji tondon) की ओर से दो बार सरकार को निर्देश दिया गया कि वह बहुमत का परीक्षण कराए हालांकि कमलनाथ (Kamal nath) सरकार ने 16 विधायकों के कथित तौर पर गायब होने का दावा कर अपने कदम पीछे खींच लिये. इसके बाद राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और फ्लोर टेस्ट कराये जाने का निर्देश देने की याचिका दायर की. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ इस पर सुनवाई करेगी.

गौरतलब है कि कांग्रेस द्वारा कथित तौर पर उपेक्षित किये जाने के कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 मार्च को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और 11 मार्च को भाजपा में शामिल हो गये. उनके साथ ही मध्यप्रदेश के 22 कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिनमें से अधिकांश सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं. इससे प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर संकट गहरा गया है. ये सभी 22 सिंधिया समर्थक विधायक एवं पूर्व विधायक बेंगलुरु में डेरा डाले हुए हैं.

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा छह विधायकों के त्यागपत्र स्वीकार किये जाने के बाद 222 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या घटकर 108 रह गयी है. इनमें वे 16 बागी विधायक भी शामिल हैं जिन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन उन्हें अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है. भाजपा के 107 सदस्य हैं.

 नौ विधायकों ने सोमवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की
इससे पहले मंगलवार को जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस गुप्ता की पीठ ने ‘स्थिति की तात्कालिकता’ को देखते हुये मुख्यमंत्री कमलनाथ, विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति और विधान सभा के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किये और कहा कि इस मामले में बुधवार को सुनवाई की जायेगी.

राज्य विधानसभा के अध्यक्ष एन पी प्रजापति द्वारा कोरोना वायरस का हवाला देते हुये सदन में शक्ति परीक्षण कराये बगैर ही सोमवार को सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिये स्थगित किये जाने के तुरंत बाद शिवराज सिंह चौहान और सदन में प्रतिपक्ष के नेता तथा भाजपा के मुख्य सचेतक सहित नौ विधायकों ने सोमवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी.

राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 16 मार्च को सदन में अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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