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“नई शिक्षा नीति भारत को ज्ञान के क्षेत्र में महाशक्ति बनाने के प्रयत्नों का प्रयास है”: प्रोफेसर राणा कृष्ण पाल सिंह 

प्रयागराज।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा अयोजित “नई शिक्षा नीति : शैक्षणिक परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव” विषयक वेबीनार में बोलते हुए शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति व इलाहाबाद विश्विद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग के आचार्य प्रोफेसर राणा कृष्ण पाल सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत को ज्ञान के क्षेत्र में महाशक्ति बनाने के प्रयत्नों का प्रयास है।

उन्होंने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सबको प्राप्त हो सके, सब लोगों को संवैधानिक मूल्यों के प्रति लगाव हो सके, इस देश के प्रति लगाव हो सके, ऐसी नई शिक्षा नीति प्रचलन में आ चुकी है। जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और उसके बाद जय अनुसंधान का उदघोष लिए यह नीति छात्र सहयोग, युवा सहयोग व समाज के सहयोग से देश को आगे बढ़ाने का काम करने वाली है। इस नीति का महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्लोबल ह्यूमन बींग बनाना है। ऐसा वैश्विक मानव जिसकी सोच व ज्ञान का रूप नया हो और जो वैश्विक फलक में भारत को यशश्वी रूप व आकार दे सके।

वेबीनार के दूसरे सत्र में बोलते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रोफेसर के पी सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति ऐसे मनुष्य को तैयार करने वाली नीति है जो समाज के लिए उपयोगी हो। समाज खड़ा होगा तो देश खड़ा होगा। भूमंडलीकरण के दौर में दिग्भ्रम के शिकार जनमन को नैतिक मूल्यों के स्तर पर व उत्तरदायित्वबोध के स्तर पर और राष्ट्रगौरव बोध के स्तर पर संस्कारवान बनाने के प्रयत्नों की कोशिश इस नई शिक्षा नीति में की गई है।

वेबीनार के आयोजक और इलाहाबाद विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने कहा कि 29 जुलाई 2020 को 34 वर्ष बाद यह नई शिक्षा नीति आई है। इसमें बहु स्तरीय एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था है। नई शिक्षा पर जी डी पी के 4.43 प्रतिशत के स्थान पर अब 6 प्रतिशत तक निवेश किया जाना है । यह तकनीकी आधारित अध्ययन अध्यापन पर भी आधारित होगी।

धन्यवाद ज्ञापन आर्य कन्या महिला महाविद्यालय की डॉक्टर ज्योति रानी जयसवाल ने किया।

वेबीनार हेतु देश के 23 राज्यों से कुल 927 नामांकन निवेदन प्राप्त हुए जिनमें 199 प्राध्यापक, 81 शोध छात्र और 647 विद्यार्थी गण शामिल हैं। इन प्रतिभागियों में कुल 513 पुरुष और 414 स्त्रियां हैं। भारत के बाहर अमेरिका और बांग्लादेश आदि देशों से भी नामांकन अनुरोध प्राप्त हुए।

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