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“जयंत के मान भंग की कथा” : आचार्य शांतनु महाराज

प्रयागराज।
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय जय जय रामकथा के नौवें और अंतिम दिवस सोमवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने अरण्य कांड की कथा प्रारम्भ की एवं जयंत के मान भंग की कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि नारद जी के समझाने पर उन्होंने भगवान के पास आकर क्षमा मांगी। भगवान ने उसे क्षमा किया, यहीं से प्रभु अत्रि अनुसुइया जी के आश्रम में आए, दोनों अत्यंत प्रसन्न हुए। माता अनुसुइया जी ने माता सीता जी को स्त्री धर्म की बहुत सी बातें बताईं। यहां से प्रभु आगे बढ़े और ऋषियों ने प्रभु को अस्थियों के ढेर को दिखाया और भगवान ने भुजा उठाकर प्रतिज्ञा की कि मैं इस धरती को निसिचर हीन करूंगा। महाराज जी ने सुपर्णखा के गूढ़ एवं विनोद पूर्ण प्रसंग को सुनाया एवं गिद्धराज जटायु के मार्मिक प्रसंग को भी सुनाया। माता शबरी के प्रसंग को सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि शबरी सम्पूर्ण मानस में धैर्य व प्रतीक्षा की साक्षात प्रतिमूर्ति है एवं भगवान द्वारा शबरी ग को दिए गए नवधा भक्ति के उपदेश को सुनाया। इसके बाद हनुमान जी के माध्यम से सुग्रीव से भेंट हुई।
महाराज जी ने हनुमान जी की पावन कथा सुनाई। जिसे सुनकर सम्पूर्ण जनमानस भक्ति में सराबोर हो गया।
हनुमान जी के माध्यम से सीता जी की खोज हुई है एवं नल नील के सहयोग एवं समस्त वानरों के परिश्रम से समुद्र पार सेतु का निर्माण हुआ।
विभीषण जी की शरणागति हुई एवं लंका के भयानक रणांगण की कथा महाराज जी ने सुनाई। जिससे सभी श्रोता रोमांचित हो गए भगवान के द्वारा रावण का उद्धार किया गया। विभीषण को लंका का राजपद दिया है एवं माता सीता को लेकर लखन जी सहित पुष्पक विमान से अयोध्या पुनः आगमन हुआ। पूरी अयोध्या भगवान का स्वागत कर रही है। पूरी अयोध्या रोशनी से जगमगा गई। भगवान ने भारत जी को अपने हाथों से नहलाया। वशिष्ठ जी ने भगवान का राज तिलक किया और सभी ब्राह्मणों ने आशीष दिया कि पूरी कथा में भगवान के राजतिलक की बधाई गाई जाने लगी इससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।





कथा के दौरान उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी, न्यायमूर्ति डा शेखर कुमार यादव, पूर्व जिला न्यायाधीश यशवंत मिश्रा, डा राम मनोहर, अन्नू भईया, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी, किसान मोर्चा के काशी तिवारी, मुख्य स्थाई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, शीतला प्रसाद गौड़, स्वामी संकर्षणाचार्य महराज, डीसीपी मुख्यालय पंकज पाण्डेय, पूनम सिंह, प्रदीप सिंह, नवीन शुक्ला, राजीव कांत पांडेय, बार के महासचिव अखिलेश शर्मा, विश्वनाथ त्रिपाठी, दिवाकर द्विवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पी सी श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, देवानंद त्रिपाठी, विजय द्विवेदी, दिगंबर त्रिपाठी, रुद्र प्रताप सिंह, नरेंद्र प्रताप सिंह, जयकेश सिंह परिहार, पंकज गुप्ता, विवेक स्वरूप आदि रहे।


प्रयागराज।
नौ दिवसीय संगीतमय श्री जय जय रामकथा के आठवें दिन रविवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने भारत चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि “जग जप राम राम जप जेहि”, अर्थात भगवान स्वयम भरत जी का स्मरण करते हैं मानस में भरत जी को अनेक लोगों ने महिमा मंडित किया है।
तीर्थराज प्रयाग ने कहा कि भरत सब विधि साधु हैं। भगवान ने स्वयं कहा कि लखन और भरत जैसा पवित्र भाई संसार में नहीं मिल सकता। जनक जी ने सुनयना से कहा कि रानी भरत की महिमा राम जानते तो हैं, परंतु वह भी बता नही सकते।
भरत जी की साधना को बताते हुए महाराज जी ने कहा कि उनकी कठिन साधना को देखकर बड़े बड़े साधु संत भी उनके पास जाने में घबराते थे। स्वयं वशिष्ठ जी भी जाने से कतराते थे। पिता की मृत्यु और भगवान के वन गमन का समाचार मिलने पर भरत जी विह्वल हो गए और विलाप करने लगे। माता कैकेई को बहुत बुरा भला कहा है। सारी सभा को फटकार लगाई। कौशल्या जी के समझाने पर भरत जी शांत हुए हैं और सबको आश्वासन दिया है कि हम सबको भगवान से मिलाने ले चलेंगे और पूरी प्रजा भरत जी के साथ भगवान से मिलने चित्रकूट चली। भगवान से मिलन हुआ है। भगवान के आदेश से उनकी पादुका शिरोधार्य कर भरत जी अयोध्या वापस आए हैं। उसी पादुका को सिंहासन पर रखकर अयोध्या के राजकाज को संभाला।
इस कारुणिक प्रसंग को सुनकर सम्पूर्ण जनमानस श्रोता समाज भावविह्वल हो गया। सबकी अश्रु धार फूट पड़ी एवं सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
कथा के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान, जिला न्यायाधीश मऊ डा बालमुकुंद चौरसिया, अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता, सत्य विजय सिंह, सांसद उज्जवल रमण सिंह, अपर पुलिस आयुक्त डॉ अजय पाल शर्मा, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी, अधिवक्ता विनय सिंह, जिला पंचायत सदस्य कुलदीप त्रिपाठी, विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अरविंद सिंह, कैट बार के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह, शैलेन्द्र मौर्या, दीपू सिंह, राकेश पाण्डेय, कमलेश पाठक, शिव यादव, प्रभाकर सिंह, अमित प्रताप सिंह, रामू योगी, राजीव कुमार सिंह, शैलेश सिंह आदि उपस्थित रहे।

सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के सातवें दिन शनिवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि भगवान को पाने के लिए बस उन्हें पुकारो और प्रतीक्षा करो। मैया शबरी और अहिल्या ने पूरे जीवन भगवान की प्रतिक्षा की और अंततः भगवान ने उनके पास स्वयं जाकर उन्हें दर्शन दिया।
शांतनु महाराज ने कहा कि हम सब की यही स्थिति होनी चाहिए कि भगवान के लिए मन, मस्तिष्क में ललक और प्यास होनी चाहिए। इसीलिए भगवान जब भारद्वाज मुनि के पास गए तो उन्होंने यही कहा कि आज उनके सम्पूर्ण मनोरथ पूर्ण हो गए।
महाराज जी ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिसका कोई गुरु नही उसका जीवन शुरू नही और गोस्वामी जी ने सम्पूर्ण मानस में समय समय पर गुरु महिमा का बखान किया है। चित्रकूट की लीला का बहुत ही सुंदर व मार्मिक वर्णन किया गया एवं दसरथ जी के मार्मिक महाप्रयाण का शांतनु महाराज ने दर्शन कराया। कथा में अघोरेश्वर बाबा सरकार ने व्यासपीठ के आचार्य शांतनु जी महाराज को सम्मानित किया। कथा के दौरान अघोरेश्वर बाबा सरकार, उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह, बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, आईपीएस अशोक शुक्ला, डीसीपी यातायात नीरज पांडे, डा रंजना वाजपेई, पार्षद आशीष द्विवेदी, गंगा दत्त जोशी, पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल द्विवेदी, विजय द्विवेदी, ग्राम प्रधान शांति पांडेय, समाजसेवी कुमार नारायण, देवानंद त्रिपाठी, रमेश पांडेय, एसटीएफ प्रभारी जय प्रकाश राय, सुभाष केशरवानी आदि रहे।


“माताओं के कारण सुरक्षित रही देश, धर्म और संस्कृति”: शांतनु महाराज
सलोरी दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से चल रही कथा का छठा दिन
प्रयागराज।
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के छठे दिन शुक्रवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने रघुवंश की माताओं का चरित्र सुनाते हुए मां कौशल्या, मां सुमित्रा, मां जानकी एवं उर्मिला जी के चरित्र को आदर्श चरित्र बताया।
उन्होंने कहा कि यह देश यह धर्म यह संस्कृति यदि सुरक्षित है तो इन्हीं माताओं और बहनों के कारण। जिन्होंने अपने पुत्रों को अपने भाइयों को अपने बेटों को तिलक लगाकर धर्म की रक्षा के लिए भेजा। महाराज जी ने कहा जब भगवान मां जानकी लक्ष्मण जी के साथ उनके लिए निकले तो पूरी अयोध्या मां कैकेई को धिक्कार देते हुए साथ चल पड़ी। यही तो अयोध्या वासियों का भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण है।
गुह और भगवान के मिलन महाराज श्री ने रामराज का आधार बताया। जहां पर बड़े और छोटे में कोई भेद नहीं रामचरितमानस के सबसे रस भरे प्रसंग केवट प्रसंग को सुनाते हुए महाराज जी ने कहा यदि परमात्मा से मिलन करना हो एकदम सरल सहज और भोले हो जाइए। भोले भक्ति को परमात्मा बहुत पसंद करते हैं। केवट भगवान से चरण धुलवा कर पार उतारने की बात करता है यही तो भक्त और भगवान के बीच का संबंध है। केवट भगवान से अनेक तर्क करता है कि प्रभु मैं आपसे रोना इसलिए रोपा रहा हूं क्योंकि आप दयालु भक्तों के रुदन बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसलिए महाराज श्री ने बताया रूदन ही वह भक्ति मार्ग की साधना है जो भगवत मिलन करा देती है। केवट की नाव से भगवान ने गंगापार की और केवट को उतराई देना चाहा। लेकिन केवट ने मना कर दिया कि मैं वचन से विमुख नहीं हो सकता और भेज देना ही चाहते हो तो लौट कर जब आओगे तब भगवान तब दे देना। जो दोगे हम ले लेंगे। केवट भगवान को गंगापार कराता है, भगवान उसे बहुत कुछ देना चाहते हैं लेकिन केवट ने कुछ नहीं लिया और जो भगवान से कभी नहीं लेता भगवान उसके ऋणी हो जाते हैं।
कथा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रान्त के सह प्रांत प्रचारक सुनील, जिला प्रचारक डा देवदत्त, सीएमओ डॉ अरुण कुमार तिवारी, समाजसेवी शिव प्रसाद मिश्रा, भाजपा नेता विजय द्विवेदी, सुभाष केशरवानी, अन्नू भईया, निदेशक डा अविनाश श्रीवास्तव, निषादराज वंशज डा वी के कश्यप, पार्षद सुरेंद्र कुमार, पंकज पाण्डेय, मुकेश मिश्रा, आशीष सिंह, सुदीप सिंह, सुनील सिंह आदि उपस्थित रहे।


“जिम्मेदारियों से हटकर भजन में लगाना चाहिए मन”:
शांतनु जी महाराज
सलोरी में श्रीराम कथा का पांचवां दिन
प्रयागराज।
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के पांचवें दिन गुरुवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने अयोध्या कांड की पावन मांगलिक प्रारंभिक चौपाइयों के गायन के साथ प्रारंभ किया।
एक माह के बाद जनकपुर से लौटकर श्रीधाम अयोध्या और अयोध्या की स्थिति एकदम परिवर्तित हो चुकी है। रिद्धि सिद्धि समृद्धि की बाढ़ आ गई। एक माह के बाद राज्यसभा जा बैठी तो महाराज ने भरी सभा में शीशा देखा।
महाराज श्री ने शीशा देखने के तात्पर्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि सही व्यक्ति का गुरु भी है, दुश्मन भी है, इसलिए शीशा जरूर देखना चाहिए। स्वयं के देखने से गुरु का काम करता है, यदि दूसरा दिखाएं तो दुश्मन का काम करता है। शीशा देखने का अर्थ आत्मावलोकन, आत्मचिंतन, आत्मदर्शन आत्म संवाद से है।
जब महाराज को सफेद बाल कान के दिखाई पड़े तो उन्होंने राज्य राम को सौंपने का मन बनाया, ऐसे ही संकेत मिलता है। चौथापन आ जाए तो मनुष्य को धीरे धीरे जिम्मेदारियों से हटकर भजन में मन लगाना चाहिए।
राज्याभिषेक की तैयारियां हो रही थी और देवता विघ्न की रचना कर रहे थे सरस्वती जी ने मंथरा की बुद्धि बिगाड़ी है और मंथरा ने पूरा को सत्यानाश कर दिया।
महाराज जी ने मंथरा के बारे में बताते हुए कहा कि मंथरा कुसंग है और साथ ही दहेज का सामान, इन दोनों से बचना ही चाहिए। कुसंग का फ़ल बहुत भयानक होता है। इसकी अवधि किसी के पास में होते और कुसंग को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए।
वरदान के प्रसंग को सुनाते हुए महाराज श्री ने कहा मां कैकेई ने भगवान के वनवास का वरदान मांगा। इस बात को महाराज दशरथ बर्दाश्त नहीं कर पाये। बहुत उलाहना भी दी और विनती भी की। लेकिन कैकेई ने एक नहीं सुना। इसी कारण से कुसंग से बचना ही चाहिए।
भगवान को वनवास की सूचना प्राप्त हुई और मां कौशल्या से आशीर्वाद लेकर चले। कहा इस देश की माताओं की छाती में वह शक्ति है और क्षमता है वह पराक्रम है, सहनशीलता है, जो इस देश की धर्म संस्कृति परंपराओं को जीवित रखती है। कौशल्या माने एक प्रकार से पारिवारिक एकता का संकेत। मां के प्रति भगवान राम को भड़काया नहीं अपितु मां का दर्जा दिया है और कहा कि मां और पिता यदि दोनों की आज्ञा है, तो तुझे जाना चाहिए। लक्ष्मण जी को बहुत समझाने के बाद भी लक्ष्मण जी जब नहीं माने तो लक्ष्मण भगवान और जानकी तीनों वन के लिए चल पड़े। यह है रघुवंश का भ्रातृ प्रेम, जिस कारण से आज भी हम सब ऐसे भाइयों को याद करके आनंदित होते हैं।
मुख्य यजमान नवीन शुक्ला रहे। भोग प्रसाद वितरण हरिशंकर अग्रवाल पप्पू भैया और डॉ अजय शुक्ला की ओर से रहा।
कथा के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एल के शुक्ला, कुलपति जयपुर प्रो रामसेवक दुबे, सांसद फूलपुर प्रवीण पटेल, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, देवी शरण लाल श्रीवास्तव, ऊषा श्रीवास्तव, एसीपी कानून व्यवस्था विनीत सिंह, राजेश सिंह, राजू शुक्ला, संजय श्रीवास्तव, राकेश पाण्डेय, पवन उपाध्याय, जयनाथ पांडेय, राजेश त्रिपाठी, अखिलेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।




प्रयागराज।
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के चौथे दिन बुधवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि जब भी जीवन में भक्ति अध्यात्म की यात्रा करनी हो तो गुरु का सानिध्य चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान राम और लक्ष्मण जनकपुर भ्रमण के लिए गुरु की आज्ञा से चले और इनके इस रूप को देखकर पूरे जनकपुर में शोर हो गया। गुरुदेव विश्वामित्र जी के साथ भगवान राम और लक्ष्मण जनकपुर में प्रवेश किए। जनकपुर क्या है जनकपुरी विशेष प्रकार का नगर है, जिसमें साक्षात भक्ति महारानी बैठी और भगवान भक्ति को प्राप्त करने के लिए जा रहे हैं। भगवान ने सब को दर्शन देकर आनंदित किया। पुष्प वाटिका के श्रृंगारिक प्रसंग को सुनाते हुए शांतनु महाराज ने कहा पुष्पवाटिका वह स्थल है, जहां पर भगवान और भक्ति का पहली बार मिलन हुआ। जिनको भी भगवान का दर्शन करना है उनको बाग में आना ही पड़ेगा और बाग मानस में संतों की सभा को कहा है।
शांतनु महाराज ने बताया कि भगवान और जानकी जी दोनों की अवस्था किशोरावस्था है और यह अवस्था जीवन की सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए बालकों को गुरु पूजा एवं बालिकाओं को गौरी पूजा करना चाहिए गुरु यानी क्या गुरु यानी शुभ मर्यादा आज्ञाकारीता आदि ऐसे गुणवाचक शब्द जो भी हैं और गौरी अनी गुणों की खान वह पत्थर की प्रतिमा नहीं अपितु गौरी रानी गरिमा महिमा वात्सल्य करूना दया आदि रंगभूमि जब भगवान का प्रवेश हुआ तो सभी राजा अपनी अपनी भावना के अनुसार भगवान का दर्शन करने लगे धनुष यज्ञ के प्रसंग में महाराज जी ने कहा बहुत सारे राजाओं ने धनुष को तोड़ने का प्रयत्न किया लेकिन किसी से नहीं टूटा। भगवान धनुष को क्षण भर में भी तोड़ दिए क्योंकि धनुष अहंकार का प्रतीक होता है और भगवान क्षण भर से कम में तोड़ देते हैं और भगवान के द्वारा धनुष टूटते ही सारे जग में शोर हो गया खुशियां मनाई जाने लगीं और मानव धनुष टूटने के साथ ही भगवान का विवाह पूर्ण हो गया।
लक्ष्मण परशुराम संवाद को भी शांतनु महाराज ने सुनाया अयोध्या से बारात आई और भगवान का सुंदर विवाह महाराज जनक के आंगन में हुआ। आज भगवान और भक्ति का मिलन हो गया और सखियों ने मंगल गीत गाकर बधाई दी महाराज जी ने जानकी जी के विदाई के प्रसंग में कहा कि बेटियां ही घर की लक्ष्मी होती हैं। जब बेटी विदा होती है कठोर से कठोर दिल का बाप ही पड़ता है क्यों? क्योंकि बाप और बेटी का रिश्ता संसार में सबसे पवित्र है। बाप बेटी से ही अपने मन की बात तथा बेटी बाप से ही अपने मन की बात करती है।
कथा के दौरान राज्य सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश पदुम नारायण द्विवेदी, रज्जू भैय्या विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार सिंह, अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता, पूर्व अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी, पूर्व विधायक कलेक्टर पांडेय, ब्लॉक प्रमुख करछना कमलेश द्विवेदी, एमएलसी विंध्याचल विनीत सिंह, किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, पूर्व उप महापौर मुरारी लाल अग्रवाल, भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा, आशीष गुप्ता, प्रधान सुरेश पांडेय, कुश श्रीवास्तव आदि रहे।

“शिक्षा के साथ साथ संस्कार की भी आवश्यकता”:
शांतनु महाराज
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर चल रही कथा का तीसरा दिन
प्रयागराज।
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने जन्मोत्सव की बधाई के साथ कथा प्रारंभ की।
शांतनु महाराज ने बताया कि जब भगवान प्रगट हुए तो देवता भी आकाश मार्ग से पुष्प की वर्षा करने लगे और अयोध्या के लोग भगवान के दर्शन के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने अयोध्यावासियों का उदाहरण देकर भगवान के दर्शन की आचार संहिता बताई, कि जो जैसैई तैसेइ उठि धावा। भगवान को प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की बनावट दिखावट की आवश्यकता नहीं है, आप जैसे हो उसी प्रकार से बस परमात्मा को पाने के लिए दौड़ जाओ और भजन में भक्ति में परमार्थ में स्वार्थी होना ही पड़ता है और जो जितना भजन में स्वार्थी हो जाता है संसार के व्यवहार में परमार्थी हो जाता है महाराज जी ने भगवान के बाल लीलाओं का श्रवण कराते हुए उनके रूप दर्शन का वर्णन किया भगवान का रूप सर्वांग मधुर ही मधुर है।
वल्लभाचार्य जी के मधुराष्टकं से महाराज जी ने भगवान के रूप सौंदर्य का वर्णन किया। नामकरण संस्कार की चर्चा करते हुए शांतनु महाराज ने कहा कि नाम संतों से शास्त्रों से बड़े बुजुर्गों से विद्वानों से पूछ कर ही रखना चाहिए, क्योंकि हमारे यहां पुरानी कहावत है यथा नाम तथा गुणः नाम से ही पालक में किस प्रकार के गुणों का निर्माण होने लगता है। इसीलिए गुरु वशिष्ठ ने चारों भाइयों का नामकरण विशेष प्रकार से किया।
शांतनु महाराज ने भारत के प्राचीन महान वैदिक गुरुकुल शिक्षा परंपरा के ऊपर भी प्रकाश डाला कि भगवान चारों भाइयों के सहित गुरुकुल में पढ़ने गए, इसलिए आज भी वह गुरुकुल वैदिक परंपरा प्रासंगिक है क्योंकि आज हम शिक्षित तो बना पा रहे हैं समझदार नहीं बना पा रहे हैं शिक्षा और समझदारी में अंतर है और नए भारत का निर्माण यदि करना है शिक्षा के साथ साथ संस्कार की भी अत्यंत आवश्यकता है। हम आने वाली पीढ़ियों को पैसे कमाने की मशीन बना रहे हैं और ऐसे बालक कभी भी अपने माता पिता परिवार समाज राष्ट्र महत्व नहीं समझते। अतः भारत को यदि पुनः स्थापित करना है इन छोटी छोटी बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
विश्वामित्र यज्ञ रक्षा के प्रसंग में महाराज जी ने बताया कि भगवान विश्वामित्र जी के साथ जाकर उनके यज्ञ की रक्षा करते हैं अर्थात जिस को भी अपने जीवन रूपी यज्ञ कि यदि की रक्षा करना है उसको राम और लक्ष्मण अवश्य साथ रखने होंगे राम यानी सत्य लक्ष्मण यानी वैराग्य त्याग समर्पण तो जीवन में सत्य की सुगंध भी आनी चाहिए वैराग्य समर्पण भी बनना चाहिए। भगवान ने मां अहिल्या का उद्धार किया है।
कथा के दौरान मुख्य स्थाई अधिवक्ता शीतला प्रसाद गौड़, भाजपा नेता अरुणेंद्र सिंह अन्नू भइया, डा शैलेश पांडेय, सुजीत सिंह, राजू शुक्ल, कंचन शुक्ला, कुलदीप सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

“असुरों के अत्याचार बढ़ते हैं, तब तब प्रभु लेते हैं अवतार”: शांतनु महाराज
सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय अमृतमय और संगीतमय श्री रामकथा के दूसरे दिन सोमवार को कथा मर्मज्ञ गंगा प्रवाहक पूज्य आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि इस धरा धाम पर जब जब असुरों के अत्याचार बढ़ते हैं तब तब प्रभु अवतार लेकर भक्तों को उनके संताप से मुक्त करते हैं।
शांतनु जी महाराज ने कहा कि भगवान की सगुण लीलाओं को भक्ति और विश्वास से सुनना चाहिए। इसमें तर्क का कोई स्थान नही है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की कथा के क्रम में पूज्य आचार्य शांतनु महाराज ने प्रभु के जन्म के अनेक कारणों को सुनाया।
उन्होंने कहा कि भगवान की यह घोषणा है कि जो भी भक्त सब कुछ त्याग कर उनका भजन करते हैं, प्रभु उनकी रक्षा उसी प्रकार करते हैं, जैसे मां अपने बच्चे की रक्षा करती हैं। मनु एवं शतरूपा के प्रसंग को सुनाते हुए शांतनु जी महाराज ने कहा कि मनु महाराज ने जीवन के अंतिम समय में सब कुछ त्याग कर हरि भजन का मार्ग चुना। हम सब का भी यही दायित्व है कि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए भगवान के भजन में मन लगाएं। देवताओं की करुण पुकार को सुनकर भगवान ने सभी को आश्वासन दिया कि मैं अब नर रूप में धरती पर अवतरित होने वाला हूं सभी देवता प्रभु की जय जयकार करने लगे। गोस्वामी जी ने अयोध्या की महिमा को गाया है। सम्पूर्ण अयोध्यावासी भगवान की आराधना कर रहे हैं और गोस्वामी जी ने भगवान के जन्म की तिथि घोषित कर दी। पूरे अयोध्या में बधाइयां बजने लगीं, राजा दसरथ मगन होकर प्रजा जनों को न्योछावर करने लगे और पूरा वातावरण राममय हो गया।
कथा के दौरान भाजपा महानगर अध्यक्ष संजय गुप्ता, भारत सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल शिव कुमार पाल, अधिवक्ता परिषद के पूर्व महामंत्री शीतल, भाजपा नेता अरुणेंद्र सिंह अन्नू भईया, सुजीत सिंह, भाजपा महामंत्री वरुण केसरवानी रवि, सत्य विजय, राजू शुक्ला, कंचन शुक्ला, संजय श्रीवास्तव, कुलदीप सिंह आदि रहे।
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