
द ड्रामाटिक आर्ट एंड डिजाइन एसोसिएशन के ऑनलाइन थिएटर कॉस्ट्यूम के त्री दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमे लखनऊ के जाने माने एक्टर, डायरेक्ट, लेखक,और कॉस्ट्यूम डिजाइनर श्री ललित सिंह पोखरिया ने बताया कि नाटक क्या है? और उसमें कॉस्ट्यूम की भूमिका क्या है?
कॉस्ट्यूम का महत्त्व सिर्फ नाटक फिल्म सीरियल मे नहीं हमारे लाइफ में भी पढ़ता है। हम जैसे दिखते है।लोग हमरे साथ वैसा बर्ताव करते है। कॉस्ट्यूम के लिए ही हमारे फिल्म गांधी मैं भानु अथैया जी को ऑस्कर मिला था। तो कॉस्ट्यूम का कितना महत्वपूर्ण योगदान है। हम सब ने इस वर्कशॉप में डिजाइन के बेसिक एलीमेंट के बारे में जाना जैसे एलाइन , कॉलर,टेक्सचर,शेप,साइज बार मई जाना उनका मतलब कैसे कॉस्ट्यूम से जुड़ता हैं। ललित जी ने बहुत ही साधारण तरीके से ये बाते हम सब को बताया और कॉलर के प्रकार कितना है। क्रोमेतिक एंड आ क्रोमेतिक इसको भी ललित जी ने पूरी बारीकी से बताई।
इसमें पंखी कश्यप,शेशंक,पवन कुमार,सरिता पूरी, डॉक्टर अंजू श्रीवास्तव, ऋतंधरा मिश्रा, साधना मिश्रा, ऋषा मिश्रा, भावना, कोमल, शेशनक शेखर ,सोनी, आज बहुत से कलाकारों ने हिस्सा लिया और प्रश्न किए।
इस प्रकार की कार्यशाला निशुल्क उपलब्ध करवाने के लिए मैं गोविंद सर के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।
ये 3 दिन काफ़ी ज्ञानवर्धक रहा। अंततः जिस प्रकार के जादुई अंदाज़ से पाठन पठन की प्रक्रिया हुई इसके लिए
गुरु ललित सिंह पोखरिया जी को प्रणाम करता हूं।
उम्मीद है ऐसे जादू आगे भी होते रहेंगे।
धन्यवाद
दीपक
एक थिएटर का छात्र होने के नाते हर एक पहलू को सीखना और समझना बहुत जरूरी है। मैंने कभी कॉस्ट्यूम को लेकर इस तरह से नही सोचा था, कॉस्ट्यूम को लेकर मेरी नजरिया कभी ऐसा नही जैसा अभी हुआ है। और इन सबका श्रेय जाता है श्री ललित सर् को। इन 3 दिनों में बहुत कुछ सीखने को मिला। बहुत ही अलग तरह का एक्सपीरियंस रहा। गोविंद सर को बहुत बहुत धन्यवाद ऐसी कार्यशाला के आयोजन के लिए।। और ललित सर् तो ज्ञान के गंगा है। ललित सर् से बहुत कुछ सीखने को मिला।। आप लोगो का बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 ।
—– अमन तिवारी
त्रीदिवसीय इस वर्कशॉप में ललित सर के द्वारा ली गई क्लास मेरे लिए अत्यंत उपयोगी रही। एक आर्ट टीचर होने के कारण मैंने लाईन को सिर्फ कला की दृष्टि से देखा है। रंगमंच से जोड़ कर देखने की कला ललित सर ने सिखाया। रंगों से मेरी पहचान पुरानी है रंगमंच में अलग मुड से जोड़ना अत्यंत रोचक लगा। अलग अलग तरीके से वस्त्र का प्रयोग और रंगों का चयन ये सभी समझाने के लिए मैं सर का धन्यवाद करना चाहूंगी। गोविंद जी ऐसे और भी कार्यक्रम से मैं जरूर जुड़ना चाहुंगी।
रीति सन्याल
वाराणसी 🙏🙏
तीन दिवसीय कॉस्टयूम वर्कशॉप मैं बहुत कुछ सीखने को मिला जैसे रंगों का विश्लेषण और कॉस्टयूम को लेकर किस प्रकार से सोचना चाहिए एक एक्टर को एक कॉस्टयूम डिजाइनर को एक डायरेक्टर को सोचने देखने समझने का एक अपना अंदाज होता है इस वर्कशॉप से कॉस्ट्यूम के प्रति मेरी लगाव बढि़ है और मैं अपने रंगकर्म में इसका इस्तेमाल अवश्य करूंगा और मैं शुक्रगुजार हूं गोविंद सर का जिन्होंने इस प्रकार से कॉस्टयूम डिजाइन का वर्कशॉप रखा और ललित सर के द्वारा अपने विषय का ज्ञान बहुत ही सरल ढंग से सहज ढंग से प्रतिभागियों को प्रदान किया
आशा करता हूं कि इसी प्रकार से कार्यशाला होता रहे और नए कलाकारों को सीखने में चीजों को समझने में उसे आगे बढ़ने में प्रोत्साहित करते रहें
धन्यवाद गोविंद सर 🙏🏻
धन्यवाद ललित सिंह पोखरिया सर 🙏🏻
दिवाकर
I am an amateur theater artist with hardly any knowledge about the finer points of theater. This 3 day workshop, taught me many new things and not just about costume design but also about the craft as a whole. I realised how a costume design needs detailed thinking. Lalit sir taught us in a very simplistic manner the philosophy, theory and prartical techniques of this art.
This workshop took us through not just costume design but the entire design of a play, be it stage, lights or costumes.
Thank you for giving me such a learning opportunity.
Lalit sir engaged with us in a very friendly manner almost on a one to one basis.
My deepest regards.
🙏
Alka Saxena
In 3 days workshop, I learnt many new things. I not at all had any idea of how a costume design has such a detailed thinking. Lalit sir has not only given us techniques but also the moral and philosophical teachings. The primary color which I used long time ago in my school, today I got to know why my school teacher gave us Red, yellow and blue colors in drawingCompetition. Today I got to know why postal color box only have 6 colors to paint. The Idea and philosophy was so depth that my mind has got a different thought of looking towards colors and costumes. This workshop was not just for theatre, it was also for painting, drawing, fashion, design etc.
Thank you so much sir for giving us the knowledge and energy. Also the best part was Lalit sir engaged the audience with work and with jokes which made the environment light hearted. I truly enjoyed the workshop. Thank you!
Raudri Singh
त्रि दिवसीय कॉस्टयूम वर्कशॉप में श्री ललित सिंह पोखरिया द्वारा दिए गए कॉस्टयूम के बारे में बारीकी से जानकारी का पहला अनुभव मुझे भी प्राप्त हुआ जिसमें रंगों का कंबीनेशन पात्र चयन और पात्रों की कॉस्ट्यूम भाव भंगिमा रंगों का मनोवैज्ञानिक भाव नाटक को कैसे परिपूर्ण बना सकता है और भी बहुत कुछ मुझे लगता है ऐसी वर्कशॉप नवांकुर कलाकारों के बीच निरंतर होना चाहिए धन्यवाद संस्था की पूरी टीम को और विशेष गोविंद सिंह जी को जिनकी परिकल्पना से हम सभी को लाभ प्राप्त हुआ।
ऋतंधरा मिश्रा
रंग निर्देशिका
Ghoomta Aina | Latest Hindi News | Breaking News घूमता आईना | News and Views Around the World
Ghoomta Aina | Latest Hindi News | Breaking News घूमता आईना | News and Views Around the World