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विश्व अस्थमा दिवस 2024: राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 

विश्व अस्थमा दिवस 2024 के अवसर पर बचाव एवं नियंत्रण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन 

राजकीय यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय हिम्मतगंज प्रयाग राज के हकीम अहमद हुसैन उस्मानी सभागार में विश्व अस्थमा दिवस 2024 की थीम “अस्थमा शिक्षा सशक्त” के अंतर्गत अस्थमा से बचाव एवं नियंत्रण विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

यह सेमिनार विश्व आयुर्वेद मिशन के सहयोग से क्रियान्वित किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के विशेषज्ञों ने अस्थमा के विषय पर बात की। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वसीम अहमद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन किया। आयुर्वेदिक प्रणाली से आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर जीएस तोमर ने कहा, “विश्व अस्थमा दिवस” हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। आयुर्वेद में हजारों साल पहले चरक संहिता में इस बीमारी का जिक्र है, जिसमें इस बीमारी से बचने के उपाय भी विस्तार से बताए गए हैं।

प्रो. तोमर ने बताया कि आयुर्वेद में इसे तमक श्वास कहा गया है । इसके प्रमुख कारणों में एलर्जी सबसे महत्वपूर्ण है । अपने शोध अनुभव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी होती है उनकी थोड़ी थोड़ी मात्रा पादांशिक क्रम से प्रयोग करने पर वह एलर्जन्स शरीर को सात्म्य हो जाते हैं । इस सिद्धांत के अनुसार हम शरीर में एडप्टिबिलिटी डवलप कर सकते हैं । इस अवसर पर उन्होंने रेस्पीकल्प एवं आस्थाकल्प पर अपने चिकित्साीय अनुभव साझा करते हुए इन्हें अस्थमा की चिकित्सा में बहुत लाभकारी बताया । फास्ट फूड से भी अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. शांति चौधरी, वरिष्ठ शोधकर्ता, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के कार्यक्रम का उद्देश्य इस बीमारी के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करना है ताकि लोग निवारक उपाय अपना सकें। खासकर बच्चों को लेकर इस बात पर जोर दिया कि अस्थमा से प्रभावित बच्चों के बारे में अभिभावक स्कूल के शिक्षक को बताएं ताकि जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाया जा सके । उन्होंने स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए पौधे लगाने एवं आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखने के निर्देश दिए।

  मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के पल्मोनोलॉजिस्ट प्रोफेसर तारिक महमूद ने अस्थमा पर एक बहुमूल्य व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि अस्थमा एक पुरानी बीमारी है और इसके कारकों की रोकथाम के माध्यम से इससे बचा जा सकता है। दुनिया भर में इसके तीन करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। शहर की बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण, वायु प्रदूषण, पारिवारिक एवं आनुवंशिक कारक, अस्वास्थ्यकर आहार और धूम्रपान जैसे कारक इस बीमारी को दिन-ब-दिन बढ़ा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बड़े पैमाने पर शोध करके यूनानी अनुभव को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि लोगों को इसका फायदा मिल सके। इसके लिए फार्मास्युटिकल कंपनियां और अनुसंधान इकाइयां मिलकर काम कर सकती हैं।

होम्योपैथी पद्धति के प्रोफेसर एसएम सिंह, पूर्व निदेशक साईनाथ पीजी इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी, प्रयाग राज ने अपने संबोधन में इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए व्यक्ति व्यक्ति एवं लक्षणों अनुसार चिकित्सा होम्योपैथी की विशेषता है । 

  प्रसिद्ध यूनानी चिकित्सक एवं राजकीय यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, प्रयागराज के त्वचा विज्ञान एवं सौंदर्यशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बरकतुल्लाह नदवी ने अपने सम्बोधन में कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति में इस बीमारी का इलाज बिल्कुल स्पष्ट है, लेकिन इसके उपचार चिकित्सा में वर्णित सिद्धांतों के अनुसार ही उपचार करना चाहिए, आमतौर पर डॉक्टर उपचार के सिद्धांतों की अनदेखी करते हैं, जिससे रोग और अधिक गंभीर हो जाता है। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. फ़िरदौस अनीस द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. नजीब हंजला अम्मार द्वारा प्रस्तुत किया गया। सेमिनार में महाविद्यालय के सभी शिक्षक, छात्र एवं छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ।

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