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“लखनऊ की हवा में कई गुना बढ़ी ऑक्सीजन”

 

प्रो भरत राज सिंह

महानिदेशक, स्कूल आफ मैनेजमेन्ट साइंसेस,
व वरिष्ठ पर्यावरणविद, लखनऊ-226501
मोबाइलः 9415025825,ई-मेलः [email protected]

*शुभ संदेश – प्रकृति ने महामारी से घरों में कैद लोगों के लिये बढ़ाई दो – तीन गुनी गुणवत्ता की हवा!

“कोरोना महामारी मार्च 2021 से आयी द्वितीय लहर व भारत के तटीय क्षेत्रो में मई 2021 में आये प्रलयकारी चक्रवात (ताउते व यास) अपने पीछे एक संदेश भी छोड गये हैं। इसका भरपूर लखनऊ-वासी आनंद उठायें।”

यह विचार स्कूल आफ मैंनेजमेंट साईसेज, लखनऊ के महा-निदेशक व वरिष्ठ पर्यावरणविद, डा. भरत राज सिह ने अपने शोध के माध्यम से दिया है।

उनका कहना है कि कुछ दिन पूर्व (मई 2021 माह के 15 दिनो मे) पहले हिंद महासगर में एक उष्णकटिबंधीय अशांति होने से ताउते (Tauktae) चक्रवात उत्पन्न हुआ, जिसकी सूचना 13 मई 2021 को भारत के मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दी गई, जिसे पूर्व की ओर बढ़ता बताया गया और जो 14 मई तक एक बृहत चक्रवात में बदल गया ।
तूफान ने जल्द ही उत्तर की ओर मोड़ लिया, धीरे-धीरे तेज हो गया, और यह प्रक्रिया एक चक्रवाती तूफान में परिवर्तित हो गया । उसी दिन इसका नाम ताउते रखा गया।

यह ताउते 15 मई 2021 को तेज गति में अरब सागर की तरफ आगे बढने लगा और 16 मई को एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में बदल गया । फिर ताउते, केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के भारतीय राज्यों के तट के समानांतर बढता गया । 17 मई की शुरुआत में, ताउते एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में तेज हो गया, जो अपनी चरम तीव्रता तक पहुंच गया । उसी दिन, ताउते ने एक नेत्रगोलक प्रतिस्थापन चक्र से गुजरना शुरू कर दिया और 18 मई को गुजरात के तट के निकट टकराया । इसके बाद, ताउते धीरे-धीरे कमजोर हो गया और उत्तर-पूर्व अंतर्देशीय क्षेत्र की ओर बढ़ गया तथा 19 मई को, एक चिह्नित कम दबाव वाले क्षेत्र में कमजोर हो गया।

मुम्बई नगर निकाय ने 19 मई 2021 बुधवार को बताया था कि ताउते जो बेहद भीषण चक्रवाती तूफान था, उसके कारण पूरे मुंबई में 812 पेड़ उखड़ गए। मुंबई पुलिस इस बात की भी पुष्टि की कि सोमवार शाम को मुंबई तट पर पी-305 नौका चक्रवात ताउते की चेतावनी के बावजूद प्रभावी इलाके में रुके होने से डूब गया, जिस नौका पर सवार 22 लोगों की आकस्मिक मौत की रिपोर्ट भी दक्षिण मुंबई की येलोगेट पुलिस ने बुधवार को दर्ज की और उनके शव बरामद कर लिए जाने की सूचना भी दी ।

‘पापा-305’ (पी-305) बजरा में 261 लोग सवार थे। इनमें से 186 लोगों को बचा लिया गया जबकि 53 लोगो के भी लापता होने व 22 (बाईस) की मौत की पुष्टि की गई। गुजरात में भी काफी तवाही का नजारा रहा । केरल, कर्नाटक, गोवा, मुंबई, गुजरात व आस-पास के राज्यो में भी वारिस से जन-जीवन अस्त-ब्यस्त हो गया । आइये चक्रवात के पश्चात प्रकृति में हुये बदलाव की एक जानकारी जो लखनऊ के शोध आकणॉ से मिली है, लेवे ।

चुंकि ताउते चक्रवात 13 मई 2021 को शुरू होकर केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात में 16 से 19 मई 2021 तक तवाही मचाया था कि उसी के तुरंत बाद, दूसरा चक्रवात यास ने भी ओडीशा के तटीय क्षेत्रो से 26-27 मई 2021 को टकराकर ओडीशा व पश्चिम बंगाल में तवाही का तांडव पैदा किया | परन्तु कभी हमने इसके सकारात्मक पहलू पर सम्भवतः ध्यान ही नही दिया । मैने इस बीच लखनऊ के हवा की गुणवत्ता का प्रतिदिन निरीक्षण किया और जिसका आकडा नीचे तालिका में दिया गया है ।

लखनऊ के मौसम व हवा की गुणवत्ता के आंकड़े 

दिनाक ए.क्यू.आई. 2.5 ए.क्यू.आई. 10 टिप्पणी (मौसम)
21-05-2021 95.0 117.0 धूल भरी आंधी
22-05-2021 79.0 102.0 बादल / फुहार
23-05-2021 115.0 132.0 वर्षा
24-05-2021 78.0 102.0 वर्षा
25-05-2021 113.0 149.0 खुष्क मौसम
26-05-2021 77.0 101.0 बादल
27-05-2021 60.0 89.0 बादल / फुहार
28-05-2021 33.0 63.5 वर्षा
29-05-2021 23.0 34.7 वर्षा
30-05-2021 22.0 24.3 बादल
31-05-2021 44.8 68.0 खुष्क मौसम

भारत सरकार मौसम बिज्ञान विभाग द्वारा कोरोना महामारी के प्रथम लहर के शांत होने के समय लगभग 7 जनवरी 2021 को लेख से सूचना दी गई थी कि देश में 1 जनवरी 2021 को हवा की गुणवत्ता बहुत खतरनाक स्तर पर 406 थी, जो 6 जनवरी 2021 को 366 (बहुत खराब) और 7 जनवरी 2021 को 183 (सीमित स्तर) पर बहुत दिनो बाद आई है । चूकि हवा की गुणवत्ता = 50 को बहुत अच्छा माना जाता है तो कोरोना के दौरान वाहनो के उपयोग सीमित होने और दो-दो चक्रवाती तूफानो से मौसम में वारिस होने से ग्रीन हाउस गैसे में बहुत कमी अर्थात वातावरण में नगन्य हो गई । इसके कारण वायु मंडल की हवा में आक्सीजन की मात्रा बहुत अच्छे 50 से 28-31 मई 2021 में सुबह 6-8 बजे तक रही है । जो आवश्यक मात्रा से दो- से तीन गुना अधिक है ।

अतः लखनऊ के नगर वासियो से आग्रह है कि वह इस मौसम का आनंद उठाये । क्योकि जिस आक्सीजन कमी ने हमारे अपनो को बहुत दुख देकर हमसे हमेशा केलिये जुदा कर दिया, वही आक्सीजन जब वातावरण में 2-3 गुना मात्रा में है, का उपयोग सुबह (6-8 बजे) पार्को, घर के छतो व खुले स्थानो पर टहलकर स्वास्थ्य लाभ ले । यह स्थिति चुकि मांसून भी समय पर आने की पूर्ण आशा है अगले महीनो में भी मिलती रहेगी ।

शासन से भी अनुरोध है कि प्रकृति के इस भयावह चेतावनी को दृष्टिगत रखते हुये निजी-वाहनो के उपयोग पर नियंत्रण हेतु शासकीय विचार विमर्शकर नई-नीति लाये और भरपूर मात्रा मे फलदार पेडो को शहर व उनकी सडकॉ के किनारे लगवाने की प्रथमिकता पर जोर दे । हाई-वे, सुपर एक्सप्रेस्स-वे व जनपदीय सडको पर भी पेड लगवाने भी एक नीति बनाकर कार्यवाही की जाय । मेरे लिये यही 30 मई 2021 के ऊर्जा सरंक्षण दिवस का प्रदेश / देशवासियो के लिये एक संदेश है ।

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