
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को लाल किले की प्राचीर से भाषण देने के साथ ही लगातार छठी बार स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करने वाले भाजपा के दूसरे प्रधानमंत्री बन गये हैं। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी जी भाजपा के पहले नेता थे जिन्होंने साल 1998 से 2003 के बीच लगातार छह बार लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया था।
भरी जनादेश के बाद दूसरी बार सत्ता में वापसी के बाद मोदी का लाल किले से आज पहला भाषण था। मोदी 15 अगस्त के अपने संबोधन का उपयोग पूर्व में सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं जैसे स्वच्छ भारत, आयुष्मान भारत और भारत के अंतरिक्ष में पहले मानव मिशन की घोषणा के लिए कर चुके हैं। वह इस अवसर का उपयोग उनके नेतृत्व में हो रहे विकास को रेखांकित करने और अपनी सरकार के कामकाज का लेखाजोखा भी पेश करने के लिए करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घरेलू पर्यटन क्षेत्र में सुधार की विशाल संभावनाओं का उल्लेख करते हुए लोगों से 2022 तक देश में कम से कम 15 पर्यटन-स्थलों का भ्रमण करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने 73वें स्वाधीनता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्रचीर से अपने संबोधन में कहा कि भारत में देखने को बहुत कुछ है। यदि घरेलू पर्यटन बढ़ेगा तो विदेशी सैलानियों की संख्या भी बढ़ेगी।
मोदी ने कहा,‘मैं जानता हूं, लोग छुट्टी मनाने विदेश यात्रा पर जाते हैं, लेकिन क्या हम 2022 तक, जो हमारी स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ का वर्ष है, अपने ही देश में कम से कम 15 पर्यटक स्थलों की यात्रा करने के बारे में सोच सकते हैं।’उन्होंने कहा कि लोगों को देश के पर्यटक स्थलों को देखने जाना चाहिए, भले ही वहां होटल नहीं हो या बुनियादी ढांचा नहीं हो। क्योंकि उनकी यात्रा से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्वत: बेहतर सुविधाएं तैयार होंगी। मोदी ने कहा,‘हमारे पर्यटन क्षेत्र में सुधार के लिये काफी गुंजाइश है।’’

लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि देश में आधे परिवार को पाइप के जरिये पानी नहीं मिल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार हर घर में पाइप के जरिये पानी पहुंचाने के लिये जल जीवन मिशन शुरू करेगी और आने वाले साल में 3.5 लाख करोड़ रुपये के खर्च का संकल्प जताया।
मोदी ने कहा, मैं लाल किले की प्राचीर से यह घोषणा करना चाहता हूं कि हर घर में पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हम जल जीवन मिशन के साथ आगे बढ़ेंगे। केंद्र और राज्य साथ मिलकर इस दिशा में काम करेंगे। 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये जाएंगे। मोदी ने कहा कि हमें जल संरक्षण प्रयासों में अधिक तेजी लानी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को उद्योग जगत के साथ मुस्तैदी से खड़े दिखे। उन्होंने कहा कि संपत्ति सृजित करने वालों को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए, वे देश की पूंजी हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लाल किले की प्राचीर से 73वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संपत्ति सृजन सबसे बड़ी देश सेवा है। उन्होंने कहा, ‘‘संपत्ति सृजित करने वालों को कभी भी संदेह की नजर से नहीं देखें। जब सम्पत्ति सृजित होगी तभी संपत्ति का वितरण हो सकता है।’ मोदी ने कहा,‘संपत्ति सृजन बहुत जरूरी है। जो देश में संपत्ति सृजित कर रहे हैं, वे भारत की पूंजी और हम उसका सम्मान करते हैं।’
इससे पहले पिछले साल जुलाई में मोदी ने कहा था कि वह उद्योगपतियों के साथ खड़े होने में नहीं डरते क्योंकि उनका मन बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा था कि उद्योगपतियों ने भी देश के विकास में योगदान दिया है। अक्टूबर 2018 में भी उन्होंने कहा था कि वह उद्योग और कंपनियों की आलोचना की संस्कृति में भरोसा नहीं करते। उनका मानना है कि उद्योग जगत के लोग अपने कारोबार के साथ उल्लेखनीय सामाजिक कार्य भी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले की प्राचीर से करीब 95 मिनट का भाषण दिया जो 15 अगस्त को दिया गया उनका अब तक का सबसे बड़ा संबोधन रहा। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को लाल किले पर ध्वजारोहण के बाद राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने सुबह सात बज कर 33 मिनट पर अपना संबोधन आरंभ किया और करीब नौ बज कर आठ मिनट पर उनका भाषण पूरा हुआ। मोदी ने पिछले साल यानी वर्ष 2018 में लालकिले की प्राचीर से 82 मिनट का भाषण दिया था जो 15 अगस्त को दिया गया उनका तीसरा सबसे बड़ा संबोधन रहा।
वर्ष 2017 में स्वतंत्रता दिवस पर उनका भाषण 54 मिनट का था। मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से पहली बार देश की जनता को संबोधित किया था। उस समय उन्होंने 65 मिनट का भाषण दिया था। इसके बाद साल 2015 में उनका संबोधन 86 मिनट तक चला था और 2016 में उनका भाषण डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चला था। 2016 में उन्होंने 94 मिनट का भाषण दिया था।
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