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उत्तर प्रदेश: लोकसभा चुनाव 2024 का प्रथम चरण: एक विश्लेषण

डॉ धीरज कुमार

उत्तर प्रदेश की राजनीति और आम चुनाव 2024 का प्रथम चरण: एक विश्लेषण

लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के लिए शुक्रवार 19 अप्रैल को वोट डाले गए। यह चुनाव कई मायने में अहमियत रखता है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी 2014 और 2019 के आम चुनाव को जीतकर पिछले 10 वर्षों से लगातार सत्ता में है। इस प्रकार से यह चुनाव 10 वर्ष सत्ता में रहते हुए भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह चुनाव मोदी की लोकप्रियता पर ही लड़ा जा रहा है तथा भारतीय जनता पार्टी व स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जनता को ऐसा ही संदेश देने का प्रयास कर रहे हैंI यह चुनाव इस मायने में भी अहमियत रखता है कि भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा 400 सीटों (भाजपा 370+ अन्य सहयोगी दल 30) पर विजय का लक्ष्य रखा है और इसकी प्राप्ति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के सभी स्टार प्रचारक एक बड़ा प्रचार अभियान जारी रखे हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर सपा-कांग्रेस (इंडिया) गठबंधन का दावा है कि विपक्षी मतों के ध्रुवीकरण के आधार पर वह भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने में सफल साबित होंगेI इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश जो कि लोकसभा सीटों की संख्या की दृष्टि से सर्वाधिक 80 लोकसभा क्षेत्र हैं, काफी महत्वपूर्ण है। यहां प्रथम चरण का चुनाव 19 अप्रैल को संपन्न हुआ। इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। ये सीटें सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना(सुरक्षित), मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत हैं। आम चुनाव का प्रथम चरण काफी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और एक प्रकार से कहा जाए तो काफी खामोशी से संपन्न हुआ, क्योंकि इस चरण के पूर्व में सत्तारूढ़ भाजपा, मुख्य विपक्षी सपा-कांग्रेस (इंडिया) गठबंधन तथा बहुजन समाज पार्टी की ओर से बहुत ज्यादा शोर या किसी प्रकार का कोई भड़काऊ भाषण आदि नहीं दिया गया, जैसा कि पहले के चुनाव में सामान्य रूप से होता रहा है।

उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में, इन चुनाव में मतदान में 6.29% की कमी दर्ज की गई है। विश्लेषक इसके कई मायने निकाल रहे हैं। हालांकि मतदान प्रतिशत में अभिवृद्धि या गिरावट के आधार पर कोई स्पष्ट व्याख्या नहीं है। अगर 1952 से आज तक के सभी आम चुनावों का विश्लेषण किया जाए तो कई बार ऐसा हुआ है कि पिछले चुनाव की तुलना में मतदान में गिरावट के बाद भी सत्तारूढ़ दल जीता है तथा कई बार मतदान में अभिवृद्धि के बाद भी सत्तारूढ़ दल हार गया हैI हां प्रथम चरण में जरूर कहीं न कहीं उत्साह की कमी और खामोशी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ी।

हालांकि मतदान में गिरावट या अभिवृद्धि कई कारकों पर निर्भर करती है। इन कारकों में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मतदाता सूची किस हद तक संशोधित या असंशोधित है, अर्थात पिछली मतदाता सूची की तुलना में वर्तमान मतदाता सूची में कितने नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए या कितने मतदाताओं के नाम काटे गएI यह बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की सक्रियता और कार्य क्षमता तथा प्रवासन दर पर भी निर्भर करता हैI क्योंकि भारत में रोजगार तथा अन्य करणों से प्रवासन बहुत ज्यादा हैI इस बात को इस प्रकार भी प्रमाणित किया जा सकता है कि क्योंकि सबसे ज्यादा प्रवासन दर बिहार राज्य में है, इसलिए सबसे कम मतदान प्रतिशत बिहार में रहाI 

मतदान में गिरावट का संभवतः एक कारण यह भी हो सकता है कि गर्मी लगातार बढती जा रही है और गर्मी के मौसम में हो रहा यह आम चुनाव पिछले दो आम चुनावों की तुलना में लगभग 15-20 दिन बाद शुरू हुआ है तथा लगभग 1 महीने बाद पूरा होगाI कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मतदान में गिरावट इसलिए है क्योंकि ऐसा तथाकथित रूप से मान लिया गया है कि मोदी ही चुनाव जीतेंगे तो मोदी एक न्यू नॉर्मल के रूप में स्वीकार्यता प्राप्त कर चुके हैंI कुछ विश्लेषक ऐसा कह रहे हैं कि मोदी के समर्थक मतदाता जीत को लेकर आश्वस्त हैं, जिसके कारण भी वह भारी संख्या में बूथ तक नहीं जा रहे हैंI 

कुछ अन्य विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के समर्थक मतदाताओं में एक अजब सी हताशा है और वे लगभग हार को स्वीकार कर चुके हैं, इस कारण भी उनमें उत्साह की कमी है। पिछले आम चुनाव में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल एक साथ मिलकर चुनाव लड़े थे और अगर प्रथम चरण की इन 8 सीटों की बात की जाए इस कारण इनमें से पांच पर विपक्षी महागठबंधन जीता थाI इसका कारण था विपक्षी मतदाताओं की एकजुटता और मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण तथा राष्ट्रीय लोकदल के साथ होने के कारण जाट समुदाय के मतदाताओं के एक बड़े धड़े का महागठबंधन के साथ होनाI किंतु इस बार इंडिया गठबंधन में केवल समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हैं।

अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन की बात की जाए तो 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत मात्रा 6.5 फ़ीसदी था और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत गिरकर 2.4 फ़ीसदी हो गया था, जो कि राष्ट्रीय लोक दल के 3.8 फ़ीसदी वोट से भी कम थाI इसके पूर्व में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मिलकर 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और मुँह की खा चुके हैंI 2017 में भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ आई थीI 2024 के इस लोकसभा चुनाव विपक्षी मतों के बिखराव का एक बड़ा कारण यह भी है की इस बार बहुजन समाज पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है वहीँ राष्ट्रीय लोकदल जो पिछली बार विरोधी खेमे में था इस बार भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है।

मतदान में गिरावट को लेकर कुछ विश्लेषकों का मत है की मुस्लिम मतदाताओं में भी बड़ी हताशा देखी जा रही है क्योंकि उन्हें लगता है कि बार-बार एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध वोट करने पर भी कोई लाभ नहीं होताI उनका कोई राजनीतिक अस्तित्व या मायने मतलब नहीं रहाI गौरतलब है की विगत दो लोकसभा तथा दो विधानसभा चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं ने कथित रूप से एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध महागठबंधन को वोट दिया, लेकिन फिर भी भाजपा का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा और हर बार भाजपा जीत कर सत्ता में आई, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इन सभी सीटों पर मुस्लिम समुदाय की आबादी 30% से 50% के बीच हैI इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार व राज्य सरकार की योजनाओं में मुस्लिम समुदाय को भी पर्याप्त लाभ हुआ हैI अब विभिन्न राजनीतिक दलों की स्थिति यह है की हिंदू मतों की एकजुटता के चलते कोई भी राजनीतिक दल हिन्दुओं की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहता और मुस्लिम समुदाय के पक्ष में खुलकर खड़ा होता नहीं दिखाना चाहता हैI मुजफ्फरनगर और बिजनौर में एक बड़ी मुस्लिम आबादी के बावजूद कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी न होना तथा मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी द्वारा वर्तमान सांसद एस टी हसन का अंतिम समय में टिकट काटे जाने से भी मुस्लिम मतदाता हतोत्साहित हैं।

कुछ विश्लेषकों का मतदान प्रतिशत में गिरावट को लेकर यह भी मानना है कि बहुजन समाज पार्टी के समर्थक मतदाताओं में भी एक प्रकार की हताश और निराशा व्याप्त है, इसका कारण उत्तर प्रदेश के पिछले कई लोकसभा व विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का निराशाजनक तथा लगातार गिरता हुआ प्रदर्शन हैI वैसे सामान्यतयः ऐसा माना जाता है कि कई बार वोट प्रतिशत का बढ़ना सत्ता विरोधी रुझानों के चलते होता है, किंतु चूँकि ऐसा कोई सत्ता विरोधी रुझान इस चुनाव में दिखाई नहीं पड़ रहा, इस कारण भी कहीं ना कहीं मतदान में गिरावट दर्ज की गई हैI बहुत से राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक रूप से अपना सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करने जा रही है, क्योंकि यह चुनाव राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और ट्रिपल तलाक तथा धारा 370 को खत्म करने के बाद हो रहा हैI ये मुद्दे हमेशा से सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं और एक प्रकार से बीजेपी की पूरी राजनीती इन्हीं मुद्दों के इर्द गिर्द रही हैI इसलिए मतदान में गिरावट को सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के नुकसान से जोड़कर नहीं देखा जा सकताI

कुछ विश्लेषकों का मतदान प्रतिशत में गिरावट को लेकर यह मानना है कि इसका एक संभावित कारण यह भी हो सकता है की विपक्षी दल लगातार ईवीएम को लेकर मतदाताओं के मन में शक एवं संशय का बीज बोते हैंI कुछ विपक्षी समर्थक मतदाताओं को बहुधा ऐसा कहते हुए भी सुन गया है की, ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव क्यूँ नहीं होताI जब तक ईवीएम से चुनाव होता रहेगा, बीजेपी ही जीतती रहेगीI विपक्षी दलों का ईवीएम पर शक करना कहीं न कहीं लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता हैI हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ईवीएम हैक होने की बात को सिरे से नकार चुका है।

आइये अब इस चरण की उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों का विश्लेषण करते हैं तथा इस चुनाव के निहितार्थ तलाशते हैं:-

सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र

यदि 2019 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो यहाँ से बहुजन समाज पार्टी के हाजी फजलुर रहमान जो महागठबंधन (सपा+बसपा+आरएलडी) के संयुक्त प्रत्याशी ने 514139 मत पाकर यहां से जीत दर्ज की थीI हालांकि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राघव लखनपाल मात्र 25000 वोटों से हारे थे तथा अपने मतों में 2014 की तुलना में लगभग 20000 मतों की अभिवृद्धि की थीI 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी राघव लखनपाल ने कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद को 70000 मतों के अंतर से हराया थाI

इस बार इंडिया गठबंधन (समाजवादी पार्टी+कांग्रेस) ने इमरान मसूद को प्रत्याशी बनाया है तथा भारतीय जनता पार्टी ने पुनः राघव लखनपाल पर दाँव लगाया हैI बहुजन समाज पार्टी ने भी मुस्लिम समुदाय से आने वाले माजिद अली को टिकट दिया हैi इस सीट पर यदि मुस्लिम मतों का इंडिया गठबंधन के पक्ष में ध्रुवीकरण होता है तो शायद भाजपा और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के बीच मुकाबला कांटे का हो सकता है अन्यथा भारतीय जनता पार्टी इस लोकसभा क्षेत्र में आसानी से जीत दर्ज कर सकती हैI यहाँ इस बात की आशंका जताई जा रही है की इंडिया गठबंधन और बहुजन समाज पार्टी दोनों द्वारा मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारे जाने के चलते मुस्लिम व अन्य विपक्षी मतों का विभाजन हो सकता है, जैसा की 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ थाI इस लोकसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा हैI 2014 के चुनाव में बसपा 235033 मत पाने में सफल रही थी तथा 2019 में भी बसपा का(महागठबंधन का संयुक्त प्रत्याशी) ही सांसद था, इसलिए बसपा को कम करके नहीं आँका जा सकता तथा इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद (समाजवादी पार्टी+कांग्रेस नीत इंडिया गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी) की राह काफी कठिन लग रही हैI

कैराना लोकसभा क्षेत्र 

यदि 2019 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो यहां पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार ने 566961 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थीI यहां समाजवादी पार्टी की तबस्सुम बेगम 474801 मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रही थीं, जबकि वह महागठबंधन(सपा+बसपा+आरएलडी) की संयुक्त प्रत्याशी थींI 2014 में भी यहां से हुकुम सिंह भारतीय जनता पार्टी से सांसद थेI हुकुम सिंह की मृत्यु के पश्चात उपचुनाव में उनकी पुत्री मृगांका सिंह को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था वह समाजवादी पार्टी के विरुद्ध चुनाव हार गई थीI किंतु 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने प्रदीप कुमार को प्रत्याशी बनाया, जो जीत दर्ज करने में सफल रहेI 

वर्तमान चुनाव में इंडिया गठबंधन (सपा+कांग्रेस) ने यहां इकरा हसन को प्रत्याशी बनाया है तथा बहुजन समाज पार्टी ने श्रीपाल राणा पर अपना दाँव लगाया हैI भारतीय जनता पार्टी ने प्रदीप कुमार पर पुनः भरोसा जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया हैI यहां भी इंडिया गठबंधन की राह इतनी आसान नहीं है, क्योंकि बहुजन समाज पार्टी इस बार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है तथा मुकाबला त्रिकोणीय हैI जिसका फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है क्योंकि विपक्षी मतों का विभाजन होना लगभग तय हैI

मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र

इस लोकसभा क्षेत्र में विगत 2019 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी संजीव बालियान ने महागठबंधन (सपा+बसपा+आरएलडी) के संयुक्त प्रत्याशी चौधरी अजीत सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र तथा राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष) को 4000 मतों से पराजित किया थाI इसके पूर्व 2014 के लोकसभा चुनाव में भी संजीव बालियान ने 4 लाख के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थीI 

संजीव बालियान वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं तथा उन्हें पुनः इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया हैI इंडिया गठबंधन ने समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक को अपना प्रत्याशी बनाया हैI जबकि बसपा ने दारा सिंह प्रजापति पर गांव लगाया हैI पिछले चुनाव में तथाकथित रूप से जाट समुदाय के मुखिया कहे जाने वाले दिवंगत चौधरी अजीत सिंह की चुनाव में हार इस चुनाव के लिए एक बड़ा संकेत हैI क्योंकि ऐसा तथाकथित रूप से कहा जाता था की पिछले चुनाव में जाट समुदाय भारतीय जनता पार्टी से नाराज है तथा राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी अजीत सिंह के स्वयं प्रत्याशी होने के कारण वह महागठबंधन (सपा+बसपा+आरएलडी) के पक्ष में मतदान करेगा लेकिन चुनाव परिणाम से ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं पड़ा तथा जाट मतों का विभाजन हुआ। इस चुनाव में भी कोई बहुत बड़े उलटफेर की संभावना दिखाई नहीं पड़ती है और भाजपा की स्थिति काफी मजबूत दिखाई पड़ रही है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का तथाकथित रूप से मानना है कि राजपूत समुदाय कि भाजपा से कथित नाराजगी इस चुनाव को कुछ हद तक प्रभावित कर सकती हैI पिछले चुनाव की अपेक्षा 9% मतों की भारी गिरावट के भी अपने कुछ निहितार्थ हैंI लेकिन इस सब के बावजूद भाजपा की स्थिति मुजफ्फरनगर लोकसभा में काफी मजबूत हैI क्योंकि इस बार राष्ट्रीय लोक दल भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में है तथा संजीव बालियान स्वयं जाट समुदाय से आते हैं। कुछ लोग संगीत सोम द्वारा भीतरघात की बात कर रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव की दृष्टि से कोई बहुत बड़ा उलटफेर संभव प्रतीत नहीं होता।

बिजनौर लोकसभा क्षेत्र 

इस लोकसभा क्षेत्र की बात की जाए तो 2019 में यहां से बहुजन समाज पार्टी के मलूक नागर 561045 मत पाकर महागठबंधन (सपा+बसपा+आरएलडी) को जीत दिलाने में सफल रहे थेI उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजा भारतेंद्र सिंह को लगभग 70000 मतों से पराजित किया थाI इससे स्पष्ट है की चुंकी सपा, बसपा तथा कांग्रेस साथ लड़ रहे थे इसलिए सभी विपक्षी मतों का ध्रुवीकरण हुआ, जिसके चलते भाजपा गयीI वहीँ अगर 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो राजा भारतेंद्र 2014 के लोकसभा चुनाव लगभग 200000 से अधिक मतों से जीतने में सफल रहे थेI

हालांकि इस बार भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति बदलते हुए चंदन चौहान को प्रत्याशी बनाया हैI 2009 में इनके पिता संजय सिंह चौहान, राजपूत जाट एकता के सफल प्रयोग के चलते यहां से सांसद रह चुके हैंI भारतीय जनता पार्टी ने इसी फार्मूले पर भरोसा जताया है, क्योंकि इस बार राष्ट्रीय लोकदल भाजपा के साथ हैI इसके अतिरिक्त वर्तमान सांसद मलूक नागर इस बार इस लोकसभा क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और समाजवादी पार्टी ने कई बार अपना प्रत्याशी बदलने के बाद दीपक सैनी पर भरोसा जताया हैI बहुजन समाज पार्टी के विजेंद्र कुमार ने भी अपनी दावेदारी ठोक रखी हैI विपक्षी मतों के बंटवारे के चलते यहां भी भाजपा की राह आसान दिखाई पड़ रही हैI

नगीना (सुरक्षित) लोकसभा क्षेत्र 

यहाँ विगत 2019 लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के गिरीश चंद्र ने 568378 मत पाकर महागठबंधन(सपा+बसपा+आरएलडी) को एक बड़ी जीत दिलाई थीI गिरीश चंद्र ने भारतीय जनता पार्टी के यशवंत सिंह को लगभग 170000 मतों के भारी अंतर से परास्त किया थाI यहां पर भी विपक्षी मतों की एकजुटता काम आई थी तथा महागठबंधन का प्रत्याशी इसी कारण जीताI हालांकि भाजपा के यशवंत सिंह इसके पूर्व 2014 में सांसद रहे थे।

इस बार भारतीय जनता पार्टी ने रणनीति बदलते हुए इसी लोकसभा क्षेत्र की के अंतर्गत आने वाली नहटौर विधानसभा के अपने विधायक ओम कुमार को प्रत्याशी बनाया हैI इंडिया गठबंधन ने इस बार समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने वर्तमान सांसद गिरीश चंद्र की जगह सुरेंद्र मैनवाल को अपना प्रत्याशी बनाया हैI यहाँ से आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद रावण भी पहली बार किस्मत आजमा रहे हैंI यह सीट काफी चर्चा में हैI मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत भी यहीं से की है। यहां पर अगर विपक्षी मतों का बिखराव हुआ तो भारतीय जनता पार्टी यह सीट भी आसानी से जीतने में सफल हो सकती हैI

मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र 

मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र में विगत 2019 आम चुनाव में समाजवादी पार्टी के डॉ एस टी हसन ने महागठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में भारतीय जनता पार्टी के कुंवर सर्वेश सिंह को लगभग एक लाख मतों से हराया थाI डॉ एस टी हसन की जीत का बड़ा कारण विपक्षी मतों की एकजुटता तथा उनका संयुक्त प्रत्याशी होना माना जाता हैI हालांकि इस चुनाव कुंवर सर्वेश सिंह के मतों में 2014 के मतों की तुलना में लगभग 65000 की वृद्धि दर्ज की गई थीI इसके पूर्व 2014 के आम चुनाव में कुंवर सर्वेश सिंह ने समाजवादी पार्टी के डॉ एस टी हसन को ही लगभग एक लाख मतों से हराया थाI तब बसपा अलग चुनाव लड़ रही थी और विपक्षी मतों का बिखराव हुआ था।

2024 के इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अंतिम समय में वर्तमान सांसद एस टी हसन का टिकट काटकर आजम खान की करीबी माने जाने वाली रुचि वीरा को टिकट दिया हैI इस प्रकरण से एस टी हसन के समर्थकों में भारी नाराजगी हैI बहुजन समाज पार्टी से इरफान सैफी चुनाव मैदान में हैंI यहां भी विपक्षी मतों का बिखराव हुआ तो इसका लाभ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह को मिल सकता हैI हालांकि वह अस्वस्थ होने के चलते चुनाव प्रचार से आखरी समय में दूर ही रहे और पार्टी कार्यकर्ताओं ने ही उनका चुनाव प्रचार कियाI मतदान के अगले दिन उनकी मृत्यु भी हो गईI वह कैंसर से पीड़ित थे।

रामपुर संसदीय क्षेत्र

यहां से भारतीय जनता पार्टी ने घनश्याम सिंह लोधी को अपना प्रत्याशी बनाया हैI घनश्याम सिंह लोधी वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से रामपुर के सांसद हैंI 2019 के चुनाव में विजयी मो. आजम खान को सजा मिलने के बाद यहां 2022 में उपचुनाव हुआ था, जिसमें घनश्याम लोधी ने समाजवादी पार्टी के आसिम रजा को 42000 मतों से हराया थाI 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मो. आजम खान जो की एक बड़े नेता माने जाते हैं, ने महागठबंधन (सपा+बसपा+आरएलडी) के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में भारतीय जनता पार्टी की जयाप्रदा को 110000 के बड़े अंतर से हराया थाI उनके पक्ष में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समर्थक मतदाताओं समेत मुस्लिम मतदाताओं का ध्रुवीकरण हुआ थाI यह चुनाव बहुत लाइमलाइट में रहा था, क्योंकि इस चुनाव में मोहम्मद आजम खान ने जयाप्रदा पर अभद्र टिप्पणी की थीI उनका कहना था कि वह स्वयं जयाप्रदा को यहां पर लाए थे तथा उन्हें समाजवादी पार्टी का सांसद बनाया थाI उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि आप लोग तो आज जयाप्रदा का असली चेहरा देख रहे हैं, लेकिन मैं तो 17 दिन में ही समझ गया था कि जयाप्रदा खाकी अंत वस्त्र पहनती हैंI यहां मो आजम खान का इशारा जयाप्रदा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव को लेकर थाI हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा यहां समाजवादी पार्टी से जीत दर्ज कर सांसद रह चुकी हैंI

वर्तमान चुनाव में इंडिया गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी(सपा) हैं तथा बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी जीशान खान हैंI इसके चलते एक बार पुनः विपक्षी मतों के बंटवारे की प्रबल संभावना हैI जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के घनश्याम सिंह लोधी की राह काफी आसान दिखाई पड़ रही हैI इस लोकसभा क्षेत्र में मतदान में भारी गिरावट के भी कई निहितार्थ हैI जिसको हम मुस्लिम व दलित मतदाताओं मैं हतोत्सव के रूप में तथाकथित रूप से देख सकते हैंI जिसकी चर्चा इस लेख की शुरुआत में की जा चुकी हैI

पीलीभीत संसदीय क्षेत्र 

अब आते हैं पीलीभीत संसदीय क्षेत्र पर जहां भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा परिवर्तन करते हुए वरुण गांधी की जगह उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद को अपना प्रत्याशी बनाया हैI इसके पूर्व 2019 के लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी 7 लाख वोट प्राप्त कर महागठबंधन (सपा+बसपा+आरएलडी) प्रत्याशी हेमराज वर्मा (सपा) से लगभग ढाई लाख मतों के बड़े अंतर से जीतने में सफल हुए थेI भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को वरुण गांधी के विद्रोही रुख के बारे में लगातार जानकारी मिल रही थीI कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इसको देखते हुए उनका टिकट काटकर उन्हें सुधार गृह में भेजा गया है।

2014 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की मेनका गांधी लगभग 300000 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज करने में सफल हुई थींI इसके पूर्व 2009 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के वरुण गांधी लगभग 3 लाख मतों के बड़े अंतर से जीतने में सफल हुए थेI इस सीट को भारतीय जनता पार्टी के गढ़ के रूप में देखा जा सकता हैI यहां पर भारतीय जनता पार्टी की इन परिस्थितियों में हार की संभावना नगण्य हैI इंडिया गठबंधन की ओर से भगवत शरण गंगवार(सपा) को प्रत्याशी बनाया गया है जो पूर्व समाजवादी पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैंI बहुजन समाज पार्टी ने अनीश अहमद को प्रत्याशी बनाया हैI 

लेखक डॉ धीरज कुमार, राजनीतिक विश्लेषक एवं सहायक अध्यापक, जनसंचार विभाग, मिजोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय, आइजोल में कार्यरत हैं।

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