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प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी महाराज ने की आत्महत्या: suicide note मिला: आनंद गिरि पर शक की सुई

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी महाराज नहीं रहे

*दोपहर में विद्यार्थियों के साथ प्रसन्नता पूर्वक किया था भोजन, दोपहर बाद अपने कमरे में लगाई फांसी*

*शाम को जब नहीं निकले कमरे से बाहर तब सेवकों और विद्यार्थियों ने कमरे में जाकर देखा तो फंदे से लटकते दिखाई दिए*

*सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुसाइड नोट भी मिला हुआ है जिसमें बहुत ही प्रिय शिष्य का नाम भी उन्होंने लिखा है*

*सुसाइड नोट में क्या कुछ लिखा है यह तो किसी पुलिस अधिकारी के बयान के बाद ही बताया जा सकता है या फॉरेंसिक टीम के जांच के बाद ही*


*फांसी लगाने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है*

*प्रधानमंत्री मोदी ने महंत के निधन पर दुःख व्यक्त किया है*

*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी निधन पर दुख व्यक्त किया है*

*शव को पोस्टमार्टम के बाद लेपन करके लोगों के दर्शनार्थ रखा जाएगा*

*हरिद्वार में आनंद गिरि को पुलिस ने पूछताछ करने के लिए रोका*

प्रयागराज।
बड़े हनुमान जी के महन्त श्री नरेन्द्र गिरी महाराज ब्रह्मलीन हो गए। महंत नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की आशंका व्यक्त की जा रही है।

प्रयागराज के अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पुलिस के मुताबिक महंत का शव जिस कमरे में मिला, वह भीतर से बंद था। पुलिस को शव फर्श पर मिला था लेकिन गले में फंदा मिला है। कमरे में सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें वसीयत का जिक्र है। मौके पर पुलिस जांच पड़ताल करने में लगी है। पोस्टमार्टम के बाद ही हत्या या आत्महत्या की पुष्टि हो पाएगी।

*आईजी के अनुसार*-

*शव को महंत जी के अनुयायिओं द्वारा दरवाजा तोड़ कर फंदे से उतारा गया है, सुसाइड नोट मिला है जिसमें महंत के अपने शिष्य आनंद गिरि सहित कुछ अन्य द्वारा की गई प्रताड़ना से परेशान होने का जिक्र है!!

मौके पर एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, अपर पुलिस महानिदेशक प्रेम प्रकाश समेत कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद जांच पड़ताल में जुटी है।

उनके शिष्य आनंद गिरि ने उनकी संदिग्ध की रहस्यमई मौत पर दुख व्यक्त करते हुए इसे हत्या बताया है। उनका कहना है कि कोई साधु आत्महत्या नहीं करता है।

प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आत्महत्या की पुष्टि की है।

महंत की मौत से संतों में हैरानी और आक्रोश का माहौल है

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी और उनके शिष्य आनंद गिरी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। लेकिन बाद में इनके बीच समझौता हो गया था। तब हरिद्वार से प्रयागराज पहुंचे आनंद गिरी अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरी के पैरों पर गिरकर माफी मांग ली।

आनंद बोले थे- मैं पंच परमेश्वर से भी अपने कृत्यों के लिए माफी मांग रहा हूं। मेरे द्वारा सोशल मीडिया, समाचार पत्रों, टीवी चैनलों पर जो भी बयान जारी किए गए उसे मैं वापस लेता हूं। इसके बाद महंत नरेंद्र गिरी ने भी आनंद गिरी पर लगाए गए आरोपों को वापस लेते उन्हें माफ कर दिया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के हस्तक्षेप के बाद इस विवाद पर फिलहाल विराम लग गया था। इसके बाद गुरु पूर्णिमा के दिन आनंद गिरी अखाड़े में अपने गुरु की पूजा कर सके थे। अखाड़े और मठ में आनंद गिरी के प्रवेश पर लगाई गई रोक हटा दी थी। हालांकि, आनंद गिरी का अखाड़े से निष्कासन वापस हुआ या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं है।

14 मई 2021 को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने आनंद गिरी को अखाड़े और बाघंबरी गद्दी से बाहर कर दिया था। उन पर अपने परिवार से संबंध रखने का आरोप लगा था।
नरेंद्र गिरी ने कहा था कि बड़े हनुमान मंदिर पर आने वाले दान-चढ़ावे में से आनंद गिरी धन अपने परिवार पर खर्च कर रहे हैं। असके बाद अखाड़े के पंच परमेश्वरों की सहमति के बाद आनंद गिरी पर यह कार्रवाई की गई थी।
आनंद गिरी ने नरेंद्र पर करोड़ों रुपए के जमीन बेचने के आरोप लगाए थे।

अखाड़े से बाहर होने के बाद आनंद गिरी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था और अपने गुरु नरेंद्र गिरी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें सबसे गंभीर आरोप मठ की करोड़ों रुपए की जमीनों को बेचने और उन रुपयों का दुरुपयोग करने का था।

आनंद ने कहा था कि उनके गुरु नरेंद्र के कई बड़े और महंगे शौक हैं। इन शौक को पूरा करने के लिए नरेंद्र गिरी मठ के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। मठ के कई सेवादारों के परिवारों पर भी करोड़ों रुपया खर्च करने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद गुरु और चेले के बीच विवाद गहरा गया था।

नरेंद्र गिरी ने भी आनंद गिरी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद आनंद गिरी ने अपने गुरु के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के पास पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी और अपनी जान का खतरा बताया था।

लेटे हनुमान मंदिर व श्री निरंजनी अखाड़े से निकाले जाने के बाद स्वामी आनंद गिरि ने अपने गुरु स्वामी नरेंद्र गिरि पर मठ की अरबों रुपए की जमीनों को बेचने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में अखाड़े में हो रहे घोटाले की जांच कराए जाने की मांग की थी। लेकिन बाद में परस्पर समझौता हो गया था। आज आनंद गिरि ने कहा कि उन्हें हत्या की आशंका है क्योंकि कोई संत आत्महत्या नहीं करता है। आनंद गिरि ने कहा कि उनके दुश्मन थे जो गुरु शिष्य को लड़ाने में सफल हो गए थे।

आनंद गिरि को पुलिस ने पूछताछ के लिए हरिद्वार में रोका। आनंद गिरि का कहना है कि उनके खिलाफ षडयंत्र रचा गया है।

पांच पन्ने का सुसाइड नोट मिला

प्रयागराज मे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों मे मौत हो गई। उनका शव फांसी के फंदे लटकता हुआ पाया गया। सुचना पर मौके पर एसएसपी समेत कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद है। पुलिस को पास से पांच पन्ने का सुसाइड नोट मिला है। जिसमे नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य को दोषी ठहराया है। फिलहाल पुलिस जांच मे जुटी हुई है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि ईश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान दे और उनके अनुयायियों को इस अपार दुख को सहन करने की क्षमता प्रदान करें।

कल ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से उनकी मुलाकात हुई थी केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि नरेंद्र गिरी जी साहस की प्रतिमूर्ति थे और वह आत्महत्या कर ही नहीं सकते इसके अलावा प्रयागराज और देशभर के साधु संत नरेंद्र गिरी की मौत की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

प्रतापगढ़ के पूर्व सांसद राम विलास वेदांती, चक्रपाणि महाराज आदि तमाम संतो ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है इसी बीच फॉरेंसिक टीम भी मठ पर पहुंच गई है।

अब देखना यह है कि 5 पन्ने के सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरी ने क्या लिखा है और कहीं उनका इशारा उन्हीं के शिष्य आनंद गिरि के ऊपर तो नहीं है हालांकि नरेंद्र गिरी प्रयागराज के ही नहीं पूरे देश भर के चर्चित चेहरे थे और वह राजनीतिक सांस्कृतिक और हर एक स्तर से मजबूत व्यक्तित्व थे। प्रमोद कृष्णन व देवकीनंदन ठाकुर ने भी सवाल उठाए हैं और आत्महत्या की बात को नकारा है और कहा है कि वह आत्महत्या कर ही नहीं सकते इसलिए मामला संवेदनशील होता चला जा रहा है।
इसी बीच पता चल रहा है कि नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड नोट में अपने वसीयत के बारे में भी काफी कुछ लिखा है।

आईजी प्रयागराज के द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि वह अपने शिष्य से काफी परेशान थे अब वह शिष्य कहीं आनंद गिरि तो नहीं थे, यह जांच का विषय है क्योंकि पिछले दिनों आनंद गिरी और नरेंद्र गिरी शिष्य और गुरु के बीच काफी मामला गरम हो गया था। बाद में उनके शिष्य आनंद गिरि ने नरेंद्र गिरी के साथ एक फोटो खिंचाई थी और माफी भी मांगा था।

प्रयागराज आईजी के.पी सिंह का बयान:
प्रथम दृष्टया ये सुसाइड का मामला लग रहा है। उनका(महंत नरेंद्र गिरि) सुसाइड नोट भी मिला है। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि मैं बहुत से कारणों से दुखी था इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं। मामले में जांच जारी है।

महंत नरेंद्र गिरी द्वारा छोड़ा गया सुसाइड नोट (मुख्य अंश)

मैं महंत नरेंद्र गिरि, आज मेरा मन आनंद गिरि के चलते बहुत विचलित हो गया है। आनंद गिरि मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। आज जब मुझे सूचना मिली है कि हरिद्वार से कम्प्यूटर के जरिए आनंद गिरि लड़की की तस्वीर लगाकर मेरा कोई वीडियो वायरल करने जा रहा है, तौ मैं सोच रहा हूं कि मैं कहां जाऊंगा, यदि ऐसा हो गया तो। किस किस को सच बताऊंगा। इसलिए ये कदम उठाने जा रहा हूं। मैं जिस पद पर हूं, यदि मेरा वीडियो वायरल हो गया तो मैं जिस समाज से जी रहा हूं, कैसे लोगों के सामने आऊंगा।
इससे अच्छा, मेरा मर जाना है। इससे दुखी होकर मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरी मौत का जिम्मेदार आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी, संदीप तिवारी की होगी। इन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
वैसे तो मैं १३ सितंबर २०२१ को ही आत्महत्या करने जा रहा था लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया ।
मेरी आखिरी ख़्वाहिश है कि जिस तरह से इस गद्दी पर रहते मैंने गरिमा का ख्याल रखा है। मैं चाहता हूं कि उसी तरह जो आगे जो नया व्यक्ति इस गद्दी को संभाले, उसका ख्याल रखे।

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