
डॉ दिलीप अग्निहोत्री

लखनऊ।
राम नाईक देश के शीर्ष राजनेताओं में शुमार है। सियासत और शासन में अनेक अभिनव प्रयोग करने का उनका रिकार्ड बेहतर और दिलचस्प है। जहां भी रहे,कोई न कोई नया सकारात्मक कदम उठाया। ये सभी मिशाल के रूप में क्रियान्वित किये जा रहे है। सांसद निधि,सदन में वंदेमातरम, विश्व की प्रथम महिला लोकल ट्रेन का संचालन, शहीदों के परिजनों को पेट्रोल पम्प,गैस एजेंसी,संविधान की मूल प्रतिलिपि की उपलब्धता,डॉ आंबेडकर के सही नाम की ओर ध्यान आकृष्ट करने,जैसे अनेक कार्य उनके प्रयासों से चरितार्थ हुए। वैसे यह सूची लंबी है। उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस आयोजन के सूत्रधार भी राम नाईक है। लखनऊ में नागरिक नागरिक अभिनन्दन किया गया। इसमें राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र,मंत्री बृजेश पाठक,सांसद रीता बहुगुणा सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संयोजक वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार थे।

उत्तर प्रदेश का गठन करीब सत्तर वर्ष पहले हुआ था। लेकिन इसमें अड़सठ वर्ष तक यह प्रदेश अपनी वर्षगांठ से वंचित रहा। बिडम्बना यह कि प्रत्येक चौबीस जनवरी को मुम्बई में उत्तर प्रदेश दिवस मनाया जाता रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री राम नाईक ने वर्षों पहले इसे बढ़ावा दिया था। वह जब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बने तो उन्हें यह बात खटकती थी। उत्तर प्रदेश में ही चौबीस जनवरी को गठन के अवसर पर कोई आयोजन नहीं होता था।
राज्यपाल के रूप में राम नाईक ने प्रदेश सरकार को उत्तर प्रदेश दिवस आयोजित करने का सुझाव दिया था। मुख्यमंत्री योगी नाथ ने उनके सुझाव पर क्रियान्वयन सुनिशित किया। सरकार बनने के बाद जो चौबीस जनवरी पड़ी,उसमें प्रदेश सरकार ने पहला स्थापना दिवस आयोजित किया। योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश के विकास से भी जोड़ दिया। इसके लिए रंग भारती और उत्तर प्रदेश नागरिक परिषद ने संयुक्त रूप से राम नाईक का नागरिक अभिनन्दन किया। उन्होंने ही महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश राजभवन आकर इस दिवस का महत्व समझाया था। योगी आदित्यनाथ चौबीस जनवरी को न केवल उत्तर प्रदेश दिवस मनाने का निर्णय किया, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश के विकास से जोड़ दिया। विश्वकर्मा पुरष्कार की यही प्रतिध्वनि थी। धीरे धीरे इसका विस्तार पूरे प्रदेश में किया गया।अब सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश दिवस का भव्य आयोजन किया जाता है।
उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर कई योजनाओं एवं परियोजनाओं के शिलान्यास परम्परा भी स्थापित की गई है। उत्तर प्रदेश सर्वाेत्तम प्रदेश बनने का संकल्प लिया जाता है। वस्तुतः स्थापना दिवस संचालित योजनाओं के सिंहावलोकन और अब तक की सफलता को ध्यान में रखकर भावी नीति निर्धारण का अवसर करता है। मुंबई में उत्तर भारतीय नागरिकों द्वारा उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया जाता रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश में सत्तर वर्षों तक सरकारी स्तर पर आयोजन नहीं होता था।
पिछले तीन वर्षों में अनेक विशाल और सफल आयोजन हुए। अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पिछला कुम्भ इलाहाबाद में नहीं प्रयागराज में हुआ। फैजाबाद का भी नाम अयोध्या किया गया है। इन्वेस्टर्स समिट में साढ़े चार लाख के निवेश प्रस्ताव आये। इनमें से करीब आधे का शिलान्यास भी हो चुका। सत्तर वर्ष में तीसरी बार उत्तर प्रदेश दिवस का शासकीय स्तर पर आयोजन किया गया।प्रदेश का निर्यात बढ़ा है। हस्तशिल्प के क्षेत्र में गत वर्ष एक जिला एक उत्पाद योजना की शुरूआत हुई थी। जिसके अंतर्गत परम्परागत उद्योगों को जोड़ा गया है।

उत्तर प्रदेश में दुनिया की सबसे पवित्र नदी गंगा सबसे लंबी दूरी तय करती है। गंगा और यमुना का पवित्र संगम प्रयागराज है, दुनिया की सबसे पुरातन नगरी काशी है। राम राज्य की अवधारणा देने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम व श्री कृष्ण ने अवतार लिया। इस इतिहास पर सभी को गर्व होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के पहले स्थापना दिवस पर एक जिला एक उत्पाद ओडीओपी योजना लॉन्च की गई थी। यह योजना प्रदेश के निर्यात को तेजी से आगे बढ़ाने में कारगर साबित हुई है। जहां देश का निर्यात आठ प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वहीं उत्तर प्रदेश का निर्यात अट्ठाइस फीसद की दर से बढ़ा है। दूसरे स्थापना दिवस पर विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई।तीसरे स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री आवासीय विद्यालयों की स्थापना के लिए आधारशिला रखी गईं।

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