Home / Slider / साहित्य अकादेमी: भारतीय लेखकों के साथ हुआ संवाद

साहित्य अकादेमी: भारतीय लेखकों के साथ हुआ संवाद

साहित्य अकादेमी के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में शामिल हुए रूस के लेखक 

भारतीय लेखकों के साथ हुआ संवाद

नई दिल्ली।

साहित्य अकादेमी के सभाकक्ष में आज सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत रूस से पधारे 6 लेखकों ने भारतीय लेखकों से संवाद किया। रूस से पधारे लेखक थे – सुश्री एलेना करीमोवा, सुश्री यारोस्लावा पुलिनोविच, श्री रोमन सेन्चिन, श्री इल्या कोचेरगिन, श्री बगोमेदोव मूसा रसूलविच और सुश्री इरीना क्राएवा। इनके साथ संवाद में शामिल थे – रवेल सिंह, सुकृता पाॅल कुमार, बलराम, देवेंद्र चैबे, क्षमा शर्मा एवं राजकुमार गौतम। कार्यक्रम की अध्यक्षता रवेल सिंह ने की। साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष कार्यक्रम में ऑनलाइन उपस्थित थे।

कार्यक्रम के आरंभ में साहित्य अकादेमी के उपसचिव प्रशासन ने सभी अतिथि लेखकों का स्वागत अंगवस्त्रम एवं साहित्य अकादेमी से प्रकाशित पुस्तकें भेंट करके किया। अपने वक्तव्य में साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने रूस से पधारे सभी अतिथि लेखकों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि रूस और भारत की दोस्ती प्रतिदिन मजबूत होती जा रही है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका दोनों देशों के लेखकों की है। भारत और रूस का दशकों पुराना यह सिलसिला आज भी लगातार इसीलिए कायम है कि यह रिश्ता राजनैतिक न होकर साहित्यिक है।

आगे उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साहित्य ने एक दूसरे को प्रभावित तो किया ही है बल्कि प्रेरित भी किया है। यह रिश्ता अनुवाद के जरिये और मजबूत किया जाना जरूरी है। रूस से पधारे यह लेखक पब्लिशिंग हाउस ओजीआई के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य थे जिसमें कुछ बाल साहित्यकार भी थे। सभी ने भारत के प्रति अपने प्यार और सम्मान को जताते हुए बताया कि भारत का अध्यात्म और यहाँ का प्यार तथा टैगोर से लेकर प्रेमचंद तक का साहित्य उन्हें बेहद प्रभावित करता है।

 रूसी लेखकों ने भारत आकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनमें से ज्यादातर पहली बार भारत आए हैं। रूस में भारत और भारतीय संस्कृति को बहुत पसंद किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि रूसी में भारतीय साहित्य की आज भी सराहना की जाती है और उसे उत्साह से पढ़ा जाता है।

उन्होंने अनुवाद के माध्यम से दोनों देशों के बीच साहित्य के और आदान-प्रदान की इच्छा व्यक्त की। भारतीय लेखकों ने भी बताया कि कैसे रूसी साहित्य उन सभी की साहित्यिक यात्रा का हिस्सा रहा है। उन्होंने रूस की नई पीढ़ी पर सोशल मीडिया के प्रभाव पर प्रश्न पूछे।

कार्यक्रम के दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस के पूर्व कुलपति प्रो. अभय मौर्य सहित कई अन्य महत्त्वपूर्ण लेखक, अनुवादक मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन उप सचिव डॉ. षण्मुखानंद ने किया और उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के सोनू सैनी सहित सभी को धन्यवाद दिया।

               – पल्लवी प्रशांत होळकर

वीरेंद्र मिश्र: दिल्ली ब्यूरो

Check Also

श्रद्धा-स्मरण / स्व. पूरन चंद्र जोशी जी : रतिभान त्रिपाठी

श्रद्धा-स्मरण / स्व. पूरन चंद्र जोशी जी  “””””””””” राजनीतिक रुतबेबाजी से अलहदा एक सरल और ...