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क्या अब सिर्फ “मुनादी” का “दौर” ! : चन्द्र किशोर शर्मा

वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र किशोर शर्मा

क्या अब सिर्फ “मुनादी” का *दौर !


*पश्चिम बंगाल को लेकर प्रशांत किशोर की मुनादी*

● *मुनादी पर भारी राज्य सरकारें* दिल्ली भी और पंजाब भी…

मुनादी का मतलब… “ढिंढोरा

आज हमारा देश मुनादी के दौर से बुरी तरह गुजर रहा है चाहे वह पाँच राज्यों के चुनाव को लेकर हो या वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर क्यो न हो , मुनादी कम्पनियां चैनल/एजेंसी ,पब्लिक फेश कोई न कोई राजनैतिक पार्टी जनता जनार्दन मे कोई जाति संवर्ग विशेष गुट के लोग इत्यादि ये सभी आज हमारे समाज मे मुनादी का काम बड़े बखुबी तरीके से निभा रहे है, जिससे हम कहीं न कहीं चोटिल घायल पीड़ित हो रहे हैं तो वही…यदा कदा .. हमारे लोग अपनी जानें भी गँवा रहे हैं..। मुनादी को लेकर बड़े दिलचस्प तरीके से हम पश्चिम बंगाल से शुरू करते है चाहे वो प्रशांत किशोर की मुनादी क्यो न हो, तो वही लगभग एक दर्जन कम्पनी/चैनल इस मुहिम में है।

पाँच राज्यों का चुनाव जनता जनार्दन और विभिन्न राजनैतिक दलों के साथ और उनके बीच तो हो ही रहा है , तो वहीं हमारे बीच यहाँ जो वैश्विक महामारी से मरते.. लोग तड़पती जिन्दगी ..का जो नजारा है वह बिल्कुल सन्नाटा सा है,मुनादी तो सिर्फ चैनल/एजेंसी जनता जनार्दन का हमे देखना है सुनना है,दुर्भाग्य है हमारा देश विश्व के सबसे ज्यादा कोरोना नामक बिमारी से मरने वालों की सूची मे चौथे देश के रूप में जाना गया है.. यही नहीं हालते बद से बदतर है मुकाम हमारा चौथे से तीसरे पायदान पर भी आ सकता है।
पर मुनादी की तरजीह हमे चुनाव पर जरूर देना और लेना है, उसको सुनना और सुनाना है, सबसे दिलचस्प तो पश्चिम बंगाल को लेकर मुनादी का है।

तकरीबन 10 मुनादी कंपनियां जो पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी अपनी बातें रखी 4 तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बना रही है, तो वही 6 मुनादी कंपनी ने तृणमूल की सरकार को स्थिर रखा है। ऐसे ही आसाम केरल पुडुचेरी तमिलनाडु की मुनादी में नजारा कहीं किसी को लेकर तो कहीं किसी को लेकर बनता बिगड़ता नजर आ रहा है।

मुनादी देश में द्वितीय करोना त्रासदी को लेकर नहीं पीटा.., ढिंढोरा नहीं हुआ कि सरकारे सचेत हो जाये चाहे वह केंद्र की हो या प्रदेश की, रैलिया बनती गई नजारे मिलते गए हालात बिगाड़ते गये..दान धर्म त्यौहार हमने मनाए,तो हरिद्वार के साथ होकर गंगा नहाए……!

बचे खुचे सब्र की तासीर को हमने सबका साथ सबका विकास को लेकर पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश मे हमने गर्म कर दिया, हालात संभले नहीं संभल रहा है, मौत अपनी पैगाम हर तीसरे चौथे घरों में देती नजर आ रही है। अभी परिणाम रिजल्ट देखना बाकी है, एक तरफ जीतने वालों की सुकून भरा समय होगा तो दूसरे व तीसरे तरफ कराहे व दंश से भरी जिंदगी की सांसे हो सकती हैं ।

बात उत्तर प्रदेश की शुरू करें तो दशकों से बड़े हॉस्पिटल एवं मेडिकल सेंटर अच्छे तबके के नहीं बने कुछ बने भी तो सुविधाहीन अपने हालात पर वह रो रहे हैं। पूरब से शुरू करू तो वहां बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर बद से बदतर..!

एम्स खुला भी तो पूर्ण रूपेण नहीं अभी अधूरा प्रयास सार्थक तो रहा लेकिन कार्य ढीला, उधर वाराणसी की हालत भी वही पुराना बीएचयू थोड़ा सुधार प्रधानमंत्री निर्वाचन क्षेत्र के नाते पर संतोषजनक नहीं। बात बरेली मेरठ इलाहाबाद लखनऊ आगरा तो ढाक के तीन पात.. हमारे साथ…स्वास्थ्य बिजली पानी सड़क सुरक्षा सर्वोपरि हमारा अधिकार..।

पर कोई नहीं है, इससे सरोकार …। लोकप्रियता की बढ़त बनानी है ..चाहे राजनैतिक दलों की हो या इन मुनादी कंपनियों की मुनादी का दौर जारी है … परंतु आने वाले संकट जो कोरोना फेज 2 का अंदाज किसी को नहीं था I शायद इसका भी हमें अंदाजा ना होगा कि इस वैश्विक महामारी का फेज 3 भी हो सकता है…या आ सकता है I
लॉक डाउन की तैयारी है इसकी भी मुनादी जारी है, देखना यह होगा कि हमें हमारे अधिकारों को ये मुनादी वाले कहां तक ले जाकर रखने की कोशिश करते हैं..
साथ साथ हम वैश्विक बीमारी करोना फेज 2 से कैसे निजात पाएं, जिंदगी बचाये अपनों को बचाये किस इलाज से कहां के इलाज से किस दवा से किस फार्मूला से जीवन बचे इसकी मुनादी भी सिर्फ न हो!जरूरतें भी पूरी हो,
आज हमें दुनिया के 40 से ज्यादा देश मदद को हाथ बढ़ाएं हुए हैं जिनमें से अधिकतर हमसे छोटे देश है उनके संसाधन भी कम है और वित्तीय स्थिति भी ठीक नहीं है। लेकिन अपनी तरफ से हमारे लिए उनकी मुनादी है।

जद्दोजहद के बीच गिनती 2 मई को शुरू होनी है, जनता भी अपनी मुनादी अपने चहेतों के लिए कर रही है, राजनैतिक पार्टियां तो है ही तो वहीं उत्तर प्रदेश के ग्रामवासी जनता जनार्दन अपनों की खातिर मुनादी … देखना यह होगा की मुनादी का ढिंढोरा किसके लिए कहा के लिए कितना मुफीद होगा…मुनादी के मुराद हमें कब और कैसे पूरा लाभ .. आशा और विश्वास का फल कब और कैसे और कब तक मिलेगा देखना बाकी है..और सुनना कब तक होगा….!

चन्द्र किशोर शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

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