
वरिष्ठ रंगकर्मी विनय श्रीवास्तव “साहित्य श्री” उपाधि से विभूषित
श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद और हिंदी साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर अलोपीबाग के सभागार में जगतगुरु स्वामी घनश्यामाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य तथा श्रीमद् आर्यावर्त परिषद के अध्यक्ष महामहोपाध्याय रामजी मिश्र की अध्यक्षता में मनुस्मृति पर आज मकर संक्रांति के पावन पर्व पर एक विद्वत संगोष्ठी आयोजित की गई । संगोष्ठी में नगर के गणमान्य विद्वान, संत- महात्मा तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का समारंभ वैदिक मंगलाचरण से किया गया । मनुस्मृति ग्रंथ का पूजन किया गया ।
इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी तथा माध्यम संस्था के सचिव विनय श्रीवास्तव को हिंदी साहित्य परिषद की “साहित्य श्री” उपाधि से विभूषित किया गया ।
संगोष्ठी में बोलते हुए डॉ रामजी मिश्र ने कहा मनुस्मृति में मानव मात्र के कल्याण की बात की गई है, मानव धर्म सूत्र है, मनुस्मृति किसी के विरोध में नहीं है । मनुस्मृति में राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांत से लेकर उसकी व्यवस्था और संचालन तथा मानव मात्र के और अपराध पर नियंत्रण की उत्तम व्यवस्था की गई है । यदि मनुस्मृति से शासन किया जाए तो अपराध बिल्कुल नहीं होंगे । कुछ लोग बिना पढ़े, बिना जाने मनुस्मृति की निंदा करते हैं, उन्हें मनुस्मृति का अध्ययन करना चाहिए । मनुस्मृति में किसी के विरोध में कुछ नहीं कहा गया है ।
जगतगुरु घनश्याम आचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मनुस्मृति में महाराज मनु ने उत्तम व्यवस्था की बात की है । सभी बड़ों को सभी वर्णों सभी वर्णों को अपने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए कर्तव्य पथ पर बढ़ने की बात मनुस्मृति करती है । मनुस्मृति शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ है । आज मनुस्मृति के अध्ययन की आवश्यकता है ।
विद्वत गोष्ठी का संचालन डॉक्टर शंभू नाथ त्रिपाठी “अंशुल” ने किया
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