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काल की कथा सुनाते सुनाते काल कवलित हो गए डॉ शंभुनाथ, पूर्व मुख्य सचिव

काल की कथा सुनाते सुनाते काल की आगोश में समा गए शंभुनाथ, पूर्व मुख्य सचिव

मृत्यु का एक दृष्टांत सुना रहे पूर्व मुख्य सचिव व साहित्यकार डा. शंभुनाथ को हार्ट अटैक आ गया। वह माइक थामे मेज पर लुढ़क गए। यह घटना ढेरों लोगों की आंखों के सामने घटित हुई।

Ex UP chief secretary dies while delivering speech on stage in Lucknow yesterday.

Dr Shambhu Nath was the chief guest at the release ceremony of writer Manorama Srivastava’s novel, based on “Karna and death” at Uttar Pradesh Hindi Sansthan on Saturday evening. 

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव डा. शंभुनाथ साहित्य प्रेमी थे। उनमें कहानी सुनाने की अच्छी प्रवृत्ति थी। शनिवार को भी वह हिंदी संस्थान में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में एक ऐसी कहानी सुना रहे थे, जो उनके जीवन में घटित हो गई। ‘एक राजा को सपना आया कि काल उन्हें कल लेने आने वाला है। मंत्रियों ने उन्हें या अलग-अलग तरह का परामर्श दिया तो राजा घोड़े से अपनी सीमा से दूर निर्जन स्थान पर निकल पड़ा और वह वहां जा पहुंचा, जहां काल उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। काल ने उन्हें देखा तो हंस कर कहा- तुम आ गए? मैं यही सोच रहा था कि तुम्हारी मौत यहां लिखी है और तुम यहां आओगे कैसे?’

यह सुनाते सुनाते डा. शंभुनाथ बेहोश हो गए। यह देख लोग चकित रह गए। किसी को समझ नहीं आया कि क्या हो गया? लक्षण हार्ट अटैक के थे। मुंह और आंखें खुली हुईं थीं। उनकी उम्र 80 वर्ष के लगभग थी।

उन्हें लिटाकर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने का प्रयत्न किया गया, पर हालत गंभीर होते देख तत्काल डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल ले जाया, लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से साहित्य जगत के लोग स्तब्ध हैं।

अपनी आंखों के सामने ही बोलते बोलते आखिरी सांस लेते किसी व्यक्ति को देखने की घटना ने प्रत्यक्षदर्शियों के रोंगटे खड़े कर दिए।

वह 1970 बैच के IAS थे और 2007 में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव थे।

“मैं भी कार्यक्रम में उपस्थित था। डा. शंभुनाथ कर्ण की कथा सुनाने के बाद काल का एक दृष्टांत सुना रहे थे। तभी बोलते-बोलते मेज पर निढाल हो झुक गए। एक साल पहले मैंने उन्हें एक साहित्यिक कार्यक्रम में बुलाया था।”

आत्म प्रकाश मिश्र, उप निदेशक कार्यक्रम, दूरदर्शन

 

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