क्या कुछ नया प्रयोग होने वाला है उत्तर प्रदेश में?
स्नेह मधुर
अपनी दूरदर्शिता और चौंकाने वाली रणनीति को लेकर विख्यात रहे प्रधानमंत्री मोदी शायद उत्तर प्रदेश में ऐसा कुछ करने वाले हैं जो लोगों की नींद उड़ा देगा। अगर जो खबरें भीतर से छन कर आ रही हैं, वह अगर वे कार्य रूप में परिणत हो गईं तो यह कदम राष्ट्रीय राजनीति में तूफान लाने वाला साबित होगा।
असल में उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खुद के हारने और चायल संसदीय सीट की सभी पांच सीटों की पराजय ने भाजपा के अंदरखाने में तूफान ला दिया है कि केशव प्रसाद मौर्य को किस आधार पर मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए? कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अगर उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं तो केशव मौर्य क्यों नहीं?

दूसरी तरफ अखिलेश यादव का अपेक्षा से अधिक सीट लाना भी भाजपा के रणनीतिकारों को रास नहीं आ रहा है। मुस्लिमों व यादवों के बल पर अखिलेश के बढ़ते कदम लोकसभा के चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं। ढेर सारी कल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रवाद व हिंदुत्व की भावना के पुनर्जागरण के बावजूद सपा की सीटों में बढ़ोत्तरी भाजपा के लिए गहरी सोच का विषय बन गया है और इसकी काट निकाली जा रही है। चिंता की बात यह नहीं है कि मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर सपा क्यों जीती, चिंता की बात यह है कि हिंदू बहुसंख्यक वाली सीटें भाजपा क्यों हार रही है? वह भी तब जब हिंदू बाहुल्य वाले इलाकों में गैर सपा और गैर कांग्रेसी और भाजपा समर्थित मतों की संख्या भाजपा को जिताने के लिए काफी है?

इन नई चुनौतियों के सामने आने पर हमेशा चुनाव मोड में रहने वाले मोदी ने नई रणनीति बनाई है जिसकी घोषणा होने पर यह मोदी का राजनैतिक छक्का साबित होगा और लोगों की नींद उड़ा देगा। राजनैतिक शख्सियतों की भूमिकाओं में बदलाव की यह घोषणा 24 मार्च को हो सकती है बशर्ते इसे छह महीने के लिए टाल न दिया गया हो।

Ghoomta Aina | Latest Hindi News | Breaking News घूमता आईना | News and Views Around the World

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