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Sudevi Gaur: “मेरी मां मातोश्री श्रीमती सुदेवी गौड़” आचार्य श्री अमिताभ जी महाराज 

“मेरी मां मातोश्री श्रीमती सुदेवी गौड़”

आचार्य श्री अमिताभ जी महाराज 

श्रीमती सुदेवी गौड़ M.A., साहित्य रत्न, साहित्यालंकार का जन्म 30 नवंबर 1930 को उत्तर प्रदेश के अत्यंत प्रसिद्ध तीर्थ वृंदावन के श्री राधा रमण मंदिर के अत्यंत प्रसिद्ध मध्व गौड़ीय संप्रदाय के संप्रदायाचार्य परिवार में हुआ l इस कारण से बौद्धिक परिवेश जीवन के प्रारंभिक चरण से ही आपको प्राप्त हो गया।

आपके पिता गोस्वामी विजय कृष्ण जी महाराज अपने समय के प्रख्यात श्रीमद भगवत गीता तथा श्रीमद्भागवत के प्रखर वक्ता थे।

उन्होंने श्री मदन मोहन मालवीय, गोस्वामी गणेश दत्त जी आदि उद्भट विद्वानों के साथ पूर्व स्वतंत्रता काल के दूरस्थ भारतीय क्षेत्रों अर्थात आज के पाकिस्तान डेरा गाजी खान, पेशावर पन्नू आदि क्षेत्रों में सनातन धर्म प्रचार सभा स्थापित की तथा अपने प्रवचनों से वैष्णव धर्म का प्रचार किया l ऐसे मूर्धन्य पिता की पुत्री सुश्री सुदेवी जी में विद्वता के संस्कार प्रारंभ से ही विद्यमान थे।

आपने उच्च शिक्षा के विविध सोपान को प्राप्त करते हुए M.A.,साहित्य रत्न , साहित्यालंकार आदि परीक्षाएं उत्तीर्ण की।

विद्या विनोदिनी एवं हिंदी साहित्य सम्मेलन की मॉरीशस तक से कॉपियां आपके पास परीक्षण हेतु आती रही। दीर्घकाल तक आप उनकी परीक्षक रहीं।

आपका साहित्य के क्षेत्र में अवदान भी महत्वपूर्ण रहा l आपने लघु कथाओं का लेखन किया।

सुप्रतिष्ठित बंगला कथाकारों जैसे बनफूल, योगेंद्र नाथ गुप्त, रंजित चट्टोपाध्याय जैसों की अरब वेदूइन, ठाकुरमार झूली , बनफूल की लघु कथाओं का हिंदी में अनुवाद करने के साथ पर्याप्त स्वतंत्र लेखन भी किया जिसका अधिकांश अब अनुपलब्ध है।

उनका लेखन उस पूर्व काल में भी सामाजिक सरोकारों के बहुत निकट रहा।

साहित्यिक वर्ग में उनकी निरंतर गति बनी रही।

गोष्ठियों में समारोहों में हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री प्रभात शास्त्री , श्री लक्ष्मी नारायण मिश्र, श्रीमती शकुंतला सिरोठिया आदि के साथ उनके निकट के साहित्यिक संबंध रहे।

उनकी इस साहित्य यात्रा को स्मरण करते हुए उनकी इस वृद्ध वय में उनके प्रति अपनी भावुक वृत्ति के साथ प्रणत होकर साष्टांग अभिवादन करता हूं।

उनके लेखन का पुनर अनुसंधान उनके जीवन के इस चरण में अद्भुत पाथेय का कार्य करेगा, ऐसी मेरी आशा है।

मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त किया है जो सद है, पवित्र है, शुभ है, तार्किक है, वह सब अपनी मातोश्री श्रीमती सुदेवी गौड़ के श्री चरणों की कृपा का ही प्रसाद है।

इस वय में भी उनके बौद्धिक बल के समक्ष में स्वयं को बहुत लघु अनुभव करता हूं। अपनी इस वृद्ध वय मे भी सामाजिक सरोकारों के साथ स्वयं को जोड़े रखना तथा पूरे बल के साथ तार्किक समसामयिक टिप्पणियां करना उनका प्रिय रुचि विषय है।

मेरे द्वारा किए जाने वाले समस्त सामाजिक कार्यों के की पृष्ठभूमि में उनके द्वारा प्रदत्त प्रेरणा ही है।

पृथ्वी पर मेरे लिए साक्षात ईश्वर मेरी मां के चरणों में मैं पुनः पुनः साष्टांग प्रणाम करता हूं।

आचार्य श्री अमिताभ जी महाराज

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