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कई आईएएस अफसरों ने भी जान देकर दुनिया को कहा “अलविदा”

किसी ने तनाव में तो किसी को घरेलू कलह ने पहुंचाया मौत की दहलीज पर
आईपीएस अधिकारी सहित कई पुलिसकर्मियों ने गंवाई जान
कईआईएएस अफसरों ने भी जान देकर दुनिया को कहा अलविदा
ए अहमद सौदागर
लखनऊ।

दरोगा निर्मल चौबे द्वारा सर्विस पिस्टल से खुद को गोली से उड़ाकर खुदकुशी किए जाने का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई बहादुर पुलिस अफसर डिप्रेशन, घरेलू कलह या फिर ऑफिशियल तनाव के चलते अपनी जीवन लीला समाप्त कर हमेशा-हमेशा के लिए घर-परिवार को एक टीस देकर अलविदा कह गए हैं।
खास बात यह है कि जान देने वालों में कुछ ऐसे पुलिस अधिकारी थे, जिनकी एक आवाज सुनकर बड़े से बड़े अपराधियों के माथे पर पसीने आ जाया करते थे।
उदाहरण के तौर पर गहन नजर डालें तो जिला कारागार लखनऊ जेल अधीक्षक के पद पर तैनात रहे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरके केसरवानी ने बड़े-बड़े माफिया व दबंगों को जेल में कायदे-कानून पर चलने को मजबूर कर दिया था।
कायदे-कानून के मामले में उन्होंने ने कई बड़े पंगे भी झेले, लेकिन हार नहीं मानी बड़े-बड़े को अपनी कार्यशैली से नतमस्तक कर दिया था, लेकिन वह अपने ही घर में उपजे पारिवारिक कलह का सामना नहीं कर सके। वह जिन्दगी हार गए और पत्नी की जान लेने के बाद खुद भी मौत को गले लगा लिया था।
यह तो वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके केसरवानी का मामला रहा अब चलें एटीएस मुख्यालय लखनऊ में तैनात रहे एडिशनल एसपी राजेश साहनी की जांबाजी पर।
उन्होंने ने भी आतंकियों से लेकर बड़े से बड़े अपराधियों को अपनी एक हूंकार से घुटने टेका दिया था, लेकिन डिप्रेशन या फिर किसी और तनाव उनके ऊपर इस कदर हावी हुआ 30 मई 2018 को अपने दफ्तर में ही कनपटी पर असलहा सटाकर खुद को गोली मारकर जान दे दी थी।
यही नहीं कानपुर के एसपी सिटी रहे सुरेन्द्र कुमार दास द्वारा जान देने की घटना से पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी हतप्रभ रहें हैं।
इन घटनाओं के मामलों को लोग-बाग भुला भी नहीं पाए थे कि 4 मार्च 2021 को ऐसा ही एक मामला हजरतगंज क्षेत्र में हुआ, जहां दरोगा निर्मल कुमार चौबे ने विधानसभा के सामने सर्विस असलहे से खुद को गोली मारकर मौत को गले लगा लिया।
खबर में दर्शायी गई घटनाओं पर गौर करें तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा डिप्रेशन, घरेलू कलह या फिर ऑफिशियल टेंशन में जान दी तो किसी ने बीमारी से तंग आकर दुनिया को अलविदा कह दी।
यही नहीं जान देने वालों में सिर्फ पुलिस अफसरों के अलावा आईएएस और न्यायिक अधिकारी भी शामिल हैं।
आत्महत्या की कई घटनाओं में जांच-पड़ताल के आदेश भी और जांच भी हुई। आखिर में नतीजा निकला काम के दबाव या फिर आफिस के तनाव से तंग आकर लोगों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

केसरवानी और साहनी के अलावा आईपीएस अधिकारियों में 1982 बैच के आईपीएस पीएसी की 35 वीं वाहिनी के सेना नायक रहे ओपी अगिनहोत्री ने गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी।

सीबीसीआईडी के एडीजी रहे सीएल वासन ने 24 फरवरी 2014 को आत्महत्या कर ली थी।
इसी तरह 1966 बैच के आईपीएस एडीजी रहे सीडी कैथ ने 1998 में खुद को गोली मारकर जान दे दी थी।
1974 बैच के आईपीएस इन्द्र सिंह मेहरा ने डीआईजी पद पर रहते हुए 1994 में और 1980 बैच के आईपीएस दर्शन दास जो विजिलेंस के एसपी थे ने निजी कारणों के चलते आत्महत्या कर ली थी।
12 मई 2012 को लखनऊ ज़िला प्रशासन में एसडीएम रहे विनोद कुमार ने ओसीआर बिल्डिंग से कूद कर और वर्ष 2010 में 17 जुलाई को मथुरा में एसडीएम राजीव गुप्ता ने भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
27 जुलाई 2012 को लखनऊ ज़िला कारागार में जेल अधीक्षक रहे आरके केसरवानी ने अपनी पत्नी की जान लेने के बाद खुद को गोली मारकर जीवन लीला समाप्त कर ली थी।
23 दिसंबर 2010 को आईबी अधिकारी गिरिजा शंकर वर्मा ने फांसी लगाकर जान दी।
28 नवंबर 2009 को आईएएस अधिकारी हरमिंदर सिंह ने गोली मारकर जान दी।

यह तो बानगी भर है और भी राजधानी लखनऊ के अलावा यूपी के कई जिलों में कई पुलिस अधिकारी और उनके मातहत बीमारी, घरेलू कलह या फिर किसी वजह को लेकर मौत को गले लगा चुके हैं।

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