न्यायालय ने कहा है कि दोषियों की पूर्व में दायर पुनर्विचार याचिका और क्यूरेटिव याचिका में खास अंतर नहीं है और इस याचिका में कोई ऐसी नई बात नहीं है जिसका संज्ञान लिया जाए। दोषियों के पास अब राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प बचा है, जिसमें फांसी की सजा को उम्रकैद की सजा में बदलने की अपील की जा सकती है

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दो दोषियों की क्यूरेटिव पिटिशन खारिज की
दया याचिका का विकल्प शेष

विधि विशेषज्ञ जे.पी.सिंह की कलम से
उच्चतम न्यायालय ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी विनय शर्मा और मुकेश द्वारा दायर क्यूरेटिव पिटीशन (समीक्षा याचिका) को खारिज कर दिया है न्यायालय ने कहा है कि दोषियों की पूर्व में दायर पुनर्विचार याचिका और क्यूरेटिव याचिका में खास अंतर नहीं है और इस याचिका में कोई ऐसी नई बात नहीं है जिसका संज्ञान लिया जाए। दोषियों के पास अब राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प बचा है, जिसमें फांसी की सजा को उम्रकैद की सजा में बदलने की अपील की जा सकती है।दोनों दोषियों ने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली की एक कोर्ट के डेथ वॉरंट के खिलाफ याचिका दाखिल किया था।
पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 22 जनवरी को फांसी देने का डेथ वॉरंट जारी होने के बाद दोनों दोषियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच दोनों दोषियों की क्यूरेटिव पिटिशन खारिज कर दिया।
निर्भया के गुनहगार विनय ने अपनी क्यूरेटिव पिटिशन में अपनी युवावस्था का हवाला देते हुए कहा था कि कोर्ट ने इस पहलू को त्रुटिवश अस्वीकार कर दिया है। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितयों, उसके बीमार माता-पिता सहित परिवार के आश्रितों और जेल में उसके अच्छे आचरण और उसमें सुधार की गुंजाइश के बिंदुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया है और जिसकी वजह से उसके साथ न्याय नहीं हुआ।
क्यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर किए जाने का प्रावधान है। राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद-72 एवं राज्यपाल अनुच्छेद-161 के तहत दया याचिका पर सुनवाई करते हैं। इस दौरान राष्ट्रपति गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगते हैं। मंत्रालय अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजता है और फिर राष्ट्रपति दया याचिका का निपटारा करते हैं। अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर दें उसके बाद मुजरिम को फांसी पर लटकाने का रास्ता साफ होता है। दया याचिका के निपटारे में गैर वाजिब देरी के आधार पर मुजरिम चाहे तो दोबारा उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर सकता है।इस मामले में अभी तक अक्षय और पवन की ओर से क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल नहीं की गई है।
पिछले महीने, जस्टिस भानुमथी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ ने दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया था। अन्य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिकाएं जुलाई 2018 में खारिज कर दी गई थीं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई, 2017 को अपने फैसले में मृत्युदंड की सज़ा को बरकरार रखा था। दिसंबर 16-17 की रात, 2012 में एक पैरामेडिको छात्र के साथ चलती बस में अपराधियों ने सामूहिक बलात्कार किया था। कुछ दिनों बाद, पीड़िता ने दोषियों द्वारा दी गई क्रूर चोट के कारण दम तोड़ दिया। मुख्य आरोपी राम सिंह ने मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।
गौतलब है कि दिल्ली के मुनिरका में 16 दिसंबर 2012 की रात सड़क दौड़ रही बस में 6 दरिंदों ने निर्भया के साथ न सिर्फ दुष्कर्म किया बल्कि उसके जिस्म के साथ वो खिलवाड़ किया, जिसे सुनकर देश भर के लोग सिहर उठे।दरिंदों ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे निर्वस्त्र हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया। इसके बाद पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में कुछ सुधार नहीं होने की वजह से 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर भेजा गया। वहां इलाज के दौरान पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई।
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