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“थानों में बाहर से भीतर तक सीसीटीवी जरूरी”: सुप्रीम कोर्ट *

*सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की*
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आनन्द कुमार श्रीवास्तव
अधिवक्ता
इलाहाबाद हाई कोर्ट
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय supreme court ने आज एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए पुलिस थानों में कार्यात्मक सीसीटीवी की कमी पर एक जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था।
आज न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, “हम ‘पुलिस थानों में कार्यात्मक सीसीटीवी की कमी’ शीर्षक से स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दे रहे हैं, क्योंकि ऐसी खबरें आई हैं कि इस वर्ष के पिछले सात-आठ महीनों में पुलिस हिरासत में लगभग 11 मौतें हुई हैं।” दिसंबर 2020 में, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को सीबीआई, ईडी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने कहा था कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पुलिस थाने में, सभी प्रवेश और निकास द्वारों, मुख्य द्वार, हवालात, गलियारों, लॉबी और स्वागत कक्षों के साथ-साथ हवालात के बाहर के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि कोई भी हिस्सा खुला न रह जाए।
सर्वोच्च न्यायालय ने आगे कहा था कि सीसीटीवी सिस्टम नाइट विजन से लैस होना चाहिए और इसमें ऑडियो के साथ-साथ वीडियो फुटेज भी होनी चाहिए और केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसी प्रणालियां खरीदना अनिवार्य होगा जो कम से कम एक वर्ष के लिए डेटा भंडारण की अनुमति दें।
#Cctvinpolicestations #Courtpolice #Lawpolice #Supremecourt 2025-09-06
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