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यूपी में डीजे पर प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 19 में डीजे बजाने की अनुमति देने पर रोक लगा दिया था। कोर्ट ने कहा था कि बच्चों, बुजुर्गों और हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों सहित मानव स्वास्थ्य के लिए ध्वनि प्रदूषण खतरा है। यूपी में डीजे प्रतिबंधित करने के आदेश पर सुप्रीमकोर्ट ने लगायी रोक, नोटिस जारी। 

विधि विशेषज्ञ जे.पी. सिंह की कलम से

सार्वजनिक समारोहों और शादी-ब्याह आदि के मौके पर तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है।

उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देनी वाली सचिन कश्यप की विशेष अनुमति याचिका पर संबंधित पक्ष को नोटिस भी जारी किया है।
एसएलपी पर न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सुनवाई की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुशील चंद्र श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ध्वनि प्रदूषण को लेकर व्यापक आदेश पारित किए थे। प्रदूषण नियंत्रण कानून के मानकों के विपरीत तेज ध्वनि वाले संयंत्रों को बजाने पर रोक लगाने के साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया था कि इस मामले में यदि कोई शिकायत करता है तो तत्काल कार्रवाई की जाये तथा भारी जुर्माना लगाया जाये।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अगस्त 19 में डीजे बजाने की अनुमति देने पर रोक लगा दिया था। कोर्ट ने कहा था कि बच्चों, बुजुर्गों और हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों सहित मानव स्वास्थ्य के लिए ध्वनि प्रदूषण खतरा है। कोर्ट ने जिलाधिकारियों को टीम बनाकर ध्वनि प्रदूषण की निगरानी करने और दोषियों पर कार्यवाई करने का निर्देश दिया था। यह आदेश जस्टिस पी.के.एस. बघेल तथा जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ ने हाशिमपुर प्रयागराज के निवासी सुशील चन्द्र श्रीवास्तव तथा अन्य की याचिका पर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन होगा। इसलिए सभी धार्मिक त्योहारों से पहले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बैठक कर कानून का पालन सुनिश्चित कराए।

हाईकोर्ट ने कहा था कि कानून का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत अपराध की एफआईआर दर्ज किया जाए। कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी सभी संबंधित थानाध्यक्षों की होगी।


कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह प्रदेश के सभी शहरी इलाकों को औद्योगिक, व्यवसायिक और रिहायशी या साइलेन्स जोन के रूप में श्रेणीबद्ध करें। जिलाधिकारी ध्वनि प्रदूषण की शिकायत सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी के सम्पर्क फोन नंबर सहित पूरा ब्योरा सार्वजनिक स्थलों पर सूचना बोर्डों में दें। शिकायत करने के लिए टोल फ्री नंबर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि, कोई भी व्यक्ति ध्वनि प्रदूषण की शिकायत कर सकता है। हर शिकायत रजिस्टर पर दर्ज की जाए, इसके साथ ही कार्रवाई रिपोर्ट भी दर्ज हो। कोर्ट ने कहा है कि, शिकायत दर्ज होते ही पुलिस मौके पर जाकर ध्वनि बंद कराए और सक्षम अधिकारी को रिपोर्ट करे तथा दोषी पर कार्रवाई की जाए।इससे क्षुब्ध होकर डीजे संचालकों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका डाली है।

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