
आंतरिक लोकतंत्र पर अमल
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
भाजपा के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद को लेकर काफी दिनों से चल रहे कयासों पर अंततः विराम लग गया है । भाजपा ने स्वतंत्र देव सिंह को नये प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है । स्वतंत्र देव सिंह यूपी सरकार में परिवहन और प्रोटोकॉल मंत्री (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार) हैं। वह महेंद्र नाथ पांडेय की जगह लेंगे ।

भाजपा कैडर और विचारधारा पर आधारित पार्टी है। ऐसे में इसकी आंतरिक संरचना परिवार आधारित पार्टियों से अलग है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों में अध्य्क्ष पद का निर्धारण परिवार की मर्जी से होता है। भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र है। इसमें साधारण परिवार में जन्मे व्यक्ति भी संगठन शीर्ष पर पहुंच सकते है। इसी प्रक्रिया से अमित शाह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे।

उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र देव सिंह निर्विरोध अध्य्क्ष निर्वाचित हुए। इसके लिए भी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया पर अमल किया गया। प्रारंभिक इकाइयों के निर्वाचन हुआ। इसके बाद अध्य्क्ष के लिए निर्वाचन होना था। विकल्प खुले थे। स्वतंत्र देव सिंह के अलावा अन्य कोई भी नामांकन कर सकता था। यदि ऐसा होता तो चुनाव कराया जाता। स्वतंत्र देव के नाम पर आंतरिक सहमति बनी। वह प्रदेश अध्यक्ष घोषित किये गए।

स्वतंत्र देव सिंह का जन्म मिर्जापुर जिले में 13 फरवरी 1964 को हुआ था। इनकी मां का नाम रामा देवी और पिता का नाम अल्लर सिंह है। मिर्जापुर के ओडी के रहने वाले स्वतंत्र देव सिंह ने जालौन को अपनी कर्मभूमि बनाई, इनकी छवि काफी ईमानदार नेता के रूप में हैं । बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे स्वतंत्रदेव अपने परिवार में पहले व्यक्ति हैं जो आरएसएस से जुड़कर इतने बड़े पद तक पहुंचे हैं । वह एक बार एमएलसी भी रह चुके हैं।

स्वतंत्र देव सिंह 1984 में मिर्जापुर से जालौन आने के बाद 1986 में आरएसएस प्रचारक बने । 1988-89 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठन मंत्री बनाये गये । 1991 में भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी बने और 1994- में बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी बनाये गये । 1996 में उन्हें युवा मोर्चा का महामन्त्री बनाया गया, 2001 में भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई । 2004 में वह प्रदेश महामंत्री बनाये गये। 2010 में वह प्रदेश उपाध्यक्ष बने ।

2012 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्वतंत्र देव सिंह को उरई की कालपी सीट से चुनाव लड़ाया। यहां उन्हें बुरी तरह हार मिली और उनकी जमानत तक जब्त हो गई । 2017 में योगी सरकार में उन्हें परिवहन और प्रोटोकॉल मंत्री (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई । अब भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी दी है ।

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