Wednesday , September 22 2021
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Tag Archives: अमृत प्रभात

हिन्दी दिवस पर विशेष: “प्लीज मम्मी, डोंट गो. . . . !”: स्नेह मधुर

हिन्दी दिवस: “प्लीज मम्मी, डोंट गो. . . . !” स्नेह मधुर अपने एक मित्र के साथ उनके एक ब्रिगेडियर दोस्त के घर जाने का सौभाग्य मिला। ब्रिगेडियर दोस्त की नियुक्ति कहीं बाहर है और उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ इसी शहर में रहती हैं। जब उनके घर हम ...

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“ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ?” कुदाल से कलम तक” : 65 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”65 जब संगम ने बुलाया : 20 ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ..?”   रामधनी द्विवेदी ….लेकिन लगता है कि प्रकृति को इसका पहले से आभास था और उसने कुछ वै‍कल्पिक व्‍यवस्‍था कर दी थी। इलाहाबाद के प्रवास के दौरान मैने पत्रकारिता के साथ ही अपना अलग विषयों का ...

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“तुम भूमिहार हो क्‍या…?” कुदाल से कलम तक”:18: रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक” जब संगम ने बुलाया -18 कबाड़ी को बिकी किताबें रामधनी द्विवेदी मैने अपनी पुस्‍तकों को गांव की लाइब्रेरी में देने की जो बात लिखी, उसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता राजेश कुमार पांडेय की टिप्‍पणी आई जिसमे उन्‍होंने प्रख्‍यात भाषाविद् डा उदय नारायण तिवारी की ...

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“अमृत प्रभात” में बेनी सिंह की सलाह  : 17: “पत्रकारिता की दुनिया :38”:  रामधनी द्विवेदी :64:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“अमृत प्रभात” में सुनील सेठ बग्गा  : 16: “पत्रकारिता की दुनिया :37”:  रामधनी द्विवेदी :63:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“अमृत प्रभात” में दूसरी बंदी  : 15: “पत्रकारिता की दुनिया :36”:  रामधनी द्विवेदी :62:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“अमृत प्रभात” में बंदी का पहला दिन : 14: “पत्रकारिता की दुनिया :35”:  रामधनी द्विवेदी :61:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 11: “पत्रकारिता की दुनिया :32”:  रामधनी द्विवेदी :58:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“पत्रकारिता की दुनिया :20”: “आज से विदाई”! : रामधनी द्विवेदी :46:

रामधनी द्विवेदी “पत्रकारिता की दुनिया :20”: “अखबार की गर्मी”! : रामधनी द्विवेदी :46: आज जीवन के 71 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो ...

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“पत्रकारिता की दुनिया :19”: “अखबार की गर्मी”! : रामधनी द्विवेदी :45:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 71 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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