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Tag Archives: अलका अस्थाना

विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर पर काव्य सन्ध्या का आयोजन

लखनऊ। माँ दुर्गा साहित्यिक एवं सास्कृतिक संस्था द्वारा विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर पर काव्य सन्ध्या का आयोजन किया गया जिसके अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार स्नेह मधुर व मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार धर्मपाल गांधी रहे। संचालन वरिष्ठ कवयित्री मंजू सक्सेना ने किया। कार्यक्रम मे कवयित्री सुरभि जी, पुष्पा जी ...

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“गोकुल में बजत बधइया, जन्म लियो है कन्हैया” ने गोष्ठी में उल्लास भरा

गोकुल में बजत बधइया, जन्म लियो है कन्हैया ने गोष्ठी में उल्लास भरा गत 30 अगस्त को कुछ बात कुछ जज्बात के मंच पर एक आॅन लाइन गोष्ठी का आयोजन जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर स्ट्रीम यार्ड पर किया गया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता प्रसिद्ध छंदकार उमेश प्रकाश उमेश द्वारा ...

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“तीन नेत्र जाज्वलयमान सब देवो से वो भारी है”: अलका अस्थाना

मां दुर्गा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा आनलाइन गूगल मीट पर एक काव्य संध्या का आयोजन दिनांक 21.07.2021 को वर्षा ऋतु उत्सव के रूप में किया गया। जिसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान की महामंत्री गज़लकार वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ शोभा दीक्षित द्वारा गया। मुख्य अतिथि बाल साहित्यकार अलका प्रमोद ...

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आनलाइन काव्यगोष्ठी (कलमकार दिवस) का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न

आनलाइन काव्यगोष्ठी (कलमकार दिवस) का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न लखनऊ। सुप्रसिद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था “पहरू” के तत्वावधान में आज दिनांक 12 जुलाई’ 2021 को आनलाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन कलमकार दिवस (ओज के सिद्धहस्त हस्ताक्षर वरिष्ठ कवि सिद्धेश्वर शुक्ल ‘क्रान्ति’ का जन्मदिवस) के रूप में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुविख्यात ...

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हिंदी साहित्य भारती की स्थापना और विकास

हिंदी साहित्य भारती की स्थापना और विकास प्रख्यात साहित्यकार एवं पूर्व शिक्षा मंत्री, उ. प्र.सरकार, झांसी निवासी डा. रवीन्द्र शुक्ल तथा उनके साथ देश के अन्य विद्वानों ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के उत्थान का संकल्प लेकर 15 जुलाई 2020 को ‘हिंदी साहित्य भारती’ नामक संस्था का गठन किया जो ...

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“कुछ सपने जाग गये, कुछ सवाल से उतर आये !”: अलका अस्थाना “अमृतमयी”

अलका अस्थाना ‘अमृतमयी‘ कृपितृ पक्ष को समर्पित भाव… कुछ सपने जाग गये।। कुछ सवाल से उतर आये। कुछ जवाब सवाल बन छाये।। धूप की घनेरी वातायन में, मधुर श्रृंगार से लिप्त। पुरखों के यादों के झरोखे में, बिछते पीले पात में। कुछ छिटके बौछार से लाये। चरणों की चाक की ...

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