इलाहाबाद एक ऐसा शहर, एक ऐसा नाम, जो मुझे आकर्षित करता है। कारण, शायद यही है कि मैंने लगभग 12 वर्षों तक (1977 से 1989) वहां रहकर पत्रकारिता की, जो मेरे पत्रकारिता के जीवन का स्वर्णिम काल था। मुझे वहां हर क्षेत्र में काफी मान- सम्मान मिला और कुछ ...
Read More »“गांधी के जिस अहिंसा, सत्य और असहयोग आंदोलन को पूरे विश्व ने अपनाया, वह गांधी कभी मरेंगे नहीं”
गांधी को याद कर ….. के एम अग्रवाल आज 30 जनवरी है, महात्मा गांधी का शहादत दिवस। तिहत्तर वर्ष पूर्व आज के ही दिन गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी। एक खास संगठन के लोगों ने उस समय उन पर भारत विभाजन के लिए जिम्मेदार होने तथा हिन्दुओं के ...
Read More »कविता “भावनगर” : के.एम.अग्रवाल
“भावनगर” के.एम.अग्रवाल यह है भावनगर एक पूरा देश नहीं नहीं देश नहीं राष्ट्र यहां देशभक्त नहीं राष्ट्रभक्त रहते हैं समय समय पर यहां प्रतिनिधियों का भाव लगता है जन का भाव ? बेकार की बातें जब तक यह देश रहा कुछ तो नहीं हुआ लोग परेशान रहे अब राष्ट्र ...
Read More »“भावनगर”: कविताएं: के एम अग्रवाल
कविता: के एम अग्रवाल मिट्टी यह मिट्टी है जो हमारी सभ्यता को जन्म देती है फिर मिट्टी के सेवक से खेलवाड़ क्यों बैर क्यों मिट्टी और सेवक की उपेक्षा उस भविष्य की उपेक्षा है जिस पर मानवता टिकी है अब भी समय है और मिट्टी से पूछ लो उसे चाहिए ...
Read More »महराजगंज का “हनुमानगढ़ी”! : के एम अग्रवाल
के एम अग्रवाल वैसे तो अयोध्या के हनुमानगढी को लोग अधिक जानते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद मुख्यालय पर भी एक हनुमानगढ़ी है, जो गोरखपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर दक्षिण की ओर स्थित है। इस पर लोगों की काफी श्रद्धा है। मेरा बचपन यहीं महराजगंज में बीता है ...
Read More »“महराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष के पावर सीज” : के.एम.अग्रवाल
के.एम.अग्रवाल उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जनवरी से मार्च के बीच होने के संकेत हैं, और इसी बीच कार्यकाल के अंतिम दौर में महराजगंज जिला पंचायत में ‘खेला’ हो गया। भाजपा के कहे जाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभुदयाल चौहान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार शासन ने गत ...
Read More »“1950 के आसपास का बचपन और महराजगंज कस्बा”: के एम अग्रवाल
, के. एम. अग्रवाल ‘मेरा जीवन’: के.एम. अग्रवाल: 95: सालों से मन में यह बात आती थी कि कभी आत्मकथा लिखूँ। फिर सोचा कि आत्मकथा तो बड़े-बड़े लेखक, साहित्यकार, राजनेता, फिल्मकार, अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, वैज्ञानिक, बड़े-बड़े युद्ध जीतने वाले सेनापति आदि लिखते हैं और वह अपने आप में अच्छी-खासी मोटी किताब होती है। मैं तो ...
Read More »“1950 के आसपास का बचपन और महराजगंज कस्बा”: के एम अग्रवाल
, के. एम. अग्रवाल ‘मेरा जीवन’: के.एम. अग्रवाल: 93: सालों से मन में यह बात आती थी कि कभी आत्मकथा लिखूँ। फिर सोचा कि आत्मकथा तो बड़े-बड़े लेखक, साहित्यकार, राजनेता, फिल्मकार, अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, वैज्ञानिक, बड़े-बड़े युद्ध जीतने वाले सेनापति आदि लिखते हैं और वह अपने आप में अच्छी-खासी मोटी किताब होती है। मैं तो ...
Read More »“1950 के आसपास का महराजगंज कस्बा”: 6: के एम अग्रवाल
, के. एम. अग्रवाल ‘मेरा जीवन’: के.एम. अग्रवाल: 92: सालों से मन में यह बात आती थी कि कभी आत्मकथा लिखूँ। फिर सोचा कि आत्मकथा तो बड़े-बड़े लेखक, साहित्यकार, राजनेता, फिल्मकार, अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, वैज्ञानिक, बड़े-बड़े युद्ध जीतने वाले सेनापति आदि लिखते हैं और वह अपने आप में अच्छी-खासी मोटी किताब होती है। मैं तो ...
Read More »“मुंशी पौहारी शरण “: महराजगंज की “कुछ शक्सियतें”:5: के एम अग्रवाल
, के. एम. अग्रवाल ‘मेरा जीवन’: के.एम. अग्रवाल: 91: सालों से मन में यह बात आती थी कि कभी आत्मकथा लिखूँ। फिर सोचा कि आत्मकथा तो बड़े-बड़े लेखक, साहित्यकार, राजनेता, फिल्मकार, अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, वैज्ञानिक, बड़े-बड़े युद्ध जीतने वाले सेनापति आदि लिखते हैं और वह अपने आप में अच्छी-खासी मोटी किताब होती है। मैं तो ...
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