Wednesday , September 22 2021
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“क्लिनिक पर अखबार का हमला”: कुदाल से कलम तक” : 66 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”66 जब संगम ने बुलाया : 21 “क्लिनिक पर अखबार का हमला ..?”   रामधनी द्विवेदी ….यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि मैने अपनी मां से कभी खाना नहीं मांगा। यह अलग बात है कि वह मेरे हर भाव को जानती थी, कब मुझे खाना चाहिए, मुझे क्‍या पसंद ...

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“ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ?” कुदाल से कलम तक” : 65 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”65 जब संगम ने बुलाया : 20 ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ..?”   रामधनी द्विवेदी ….लेकिन लगता है कि प्रकृति को इसका पहले से आभास था और उसने कुछ वै‍कल्पिक व्‍यवस्‍था कर दी थी। इलाहाबाद के प्रवास के दौरान मैने पत्रकारिता के साथ ही अपना अलग विषयों का ...

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“तुम भूमिहार हो क्‍या…?” कुदाल से कलम तक”:18: रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक” जब संगम ने बुलाया -18 कबाड़ी को बिकी किताबें रामधनी द्विवेदी मैने अपनी पुस्‍तकों को गांव की लाइब्रेरी में देने की जो बात लिखी, उसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता राजेश कुमार पांडेय की टिप्‍पणी आई जिसमे उन्‍होंने प्रख्‍यात भाषाविद् डा उदय नारायण तिवारी की ...

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पत्रकारिता दिवस पर विशेष: “पत्रकारों को आत्मचिंतन की जरूरत” : रतिभान त्रिपाठी

पत्रकारिता दिवस पर विशेष “पत्रकारों को आत्मचिंतन की जरूरत” वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी पत्रकारिता जब देशहित के बजाए दलीय और सरकारों के हितसाधन में लग जाएगी तो उसका उपहास ऐसे ही होगा, जैसे अभी हो रहा है। यह बात भारत ही नहीं, वैश्विक परिदृश्य के संबंध में भी लागू मानी जा ...

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“अमृत प्रभात” में बेनी सिंह की सलाह  : 17: “पत्रकारिता की दुनिया :38”:  रामधनी द्विवेदी :64:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“अमृत प्रभात” में बंदी का पहला दिन : 14: “पत्रकारिता की दुनिया :35”:  रामधनी द्विवेदी :61:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 9: “पत्रकारिता की दुनिया :30”: ! : रामधनी द्विवेदी :56:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात :2: “पत्रकारिता की दुनिया :23”: “जब संगम ने बुलाया 2”!! : रामधनी द्विवेदी :49:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 71 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“छठी पुण्‍यतिथि पर पिताजी को छोटी सी श्रद्धांजलि”: रामधनी द्विवेदी

रामधनी द्विवेदी “पत्रकारिता की दुनिया :22”: “पिता जी की विरासत! : रामधनी द्विवेदी :48: Father’s inheritance-22-the-struggle-journey-of-senior-journalist-ramdhani-diwedi-from-small-village-to-capital-48 आज जीवन के 71 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां ...

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“पत्रकारिता की दुनिया :19”: “अखबार की गर्मी”! : रामधनी द्विवेदी :45:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 71 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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