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“पूर्वाग्रह से मुक्त होकर कबीर को पढ़े जाने की आवश्यकता है”: प्रोफेसर चन्दन कुमार

हिन्दी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में बोलते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर चन्दन कुमार ने कहा कि हिन्दी के मध्यकाल के प्रामाणिक पाठ राग, रागिनी प्रधान पाठ हैं। कबीर के पद भी इन्हीं राग रागनियों में आबद्ध हैं। कबीर भक्ति और योग ...

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“रीतिकालीन कविता केवल रीतिबद्धता, श्रंगार और नीति की ही कविता नहीं है, यह भक्ति की भी कविता है”

हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में बोलते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर नन्द किशोर पाण्डेय जी ने कहा की रीतिकालीन कविता केवल रीतिबद्धता, श्रंगार और नीति की ही कविता नहीं है। यह भक्ति की भी कविता है। इल्तुतमिश के काल में ...

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मैथिली शरण गुप्त जी के राम की घोषणा है “भव में नव वैभव व्याप्त कराने आया, इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया”

  हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में बोलते हुए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर नरेन्द्र मिश्र ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त जी मानवतावादी, नैतिकता वादी, समन्वयवादी, व्यष्टि और समष्टि का समन्वय करने वाले, नर और नारायण का समन्वय करने ...

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“समकालीन कविता आदमी को ढूंढने, पहचानने और मनुष्य की संवेदनशीलता की कविता है”

प्रयागराज। हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में बोलते हुए कालीकट विश्वविद्यालय, केरल के प्रो. प्रमोद कोवप्रत ने कहा कि समकालीन कविता आदमी को ढूंढने, पहचानने और मनुष्य की संवेदनशीलता की कविता है। यह कालयात्री कविता है जो भूमंडलीकरण से प्रभाव ग्रहण करती चलती है। साहित्य ...

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“मन को बलशाली बनाने के लिए तनाव मुक्ति आवश्यक है और यह इस मुक्ति का साधन है भक्ति साहित्य”: प्रोफेसर सुनील बाबूराव कुलकर्णी

प्रयागराज हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में बोलते हुए उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, जलगांव, महाराष्ट्र के प्रोफेसर सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने समरसतावादी साहित्य समीक्षा दृष्टि विकसित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भक्ति काव्य की समीक्षा के लिए तमिलनाडु के तिरुवल्लुवर, केरल के नारायण गुरु, ...

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“हम परिवर्तनकारी समाज हैं, मध्यकालीन जड़ता से मुक्ति का जैसा प्रयास भाषा की दृष्टि से और समाज की दृष्टि से भारतेंदु हरिश्चंद्र ने किया वह अक्षुण्ण महत्व का है”: प्रोफेसर हितेंद्र कुमार मिश्र

प्रयागराज। हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला में बोलते हुए पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, मेघालय के प्रोफेसर हितेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि भारतेंदु ने जिस हिन्दी के नई चाल में ढलने की बात कही थी यह नई चाल केवल साहित्य की नई चाल नहीं है। बल्कि देश की नई ...

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“हमें यह चिंता करनी चाहिए कि भारत की ये बोलियां रोमन की जगह देवनागरी लिपि में लिखी जाएं”: प्रोफेसर दिनेश कुमार चौबे

हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला में बोलते हुए पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय, मेघालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर दिनेश कुमार चौबे ने कहा कि पूर्वोत्तर भाषा वैविध्य के लिए प्रसिद्ध है। वहां असमिया, बंगाली और नेपाली के साथ साथ बोडो, कछारी, जयंतिया, कोच, गारो, नागा, खासी जैसी बोलियां ...

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“अकेलापन अभिशाप है, पर एकांत अभिशाप नहीं है… इसी एकांत को प्राप्त करने का साधन है, मेडिटेशन”

“रामचरितमानस और व्यक्तित्व निर्माण” प्रयागराज। हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में बोलते हुए तमिलनाडु केन्द्रीय विश्वविद्यालय, तमिलनाडु के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर एस.वी.एस.एस. नारायण राजू ने “रामचरितमानस और व्यक्तित्व निर्माण” विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमें पहले अपने को पहचानना चाहिए। इस दिशा ...

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“आज असली दलित और नकली दलित का भी विमर्श चल पड़ा है”: प्रोफेसर सुरेश चंद्र

प्रयागराज। हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में “दलित विमर्श और साहित्य” विषय पर बोलते हुए दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिहार के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश चंद्र ने कहा कि आज दलित सर्वाधिक चर्चित शब्द है और यह पिछले 50 वर्षों से चर्चा में ...

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