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“दो-दो जगह पर एक साथ काम करने वाले लोग भी…!” रामधनी द्विवेदी: कुदाल से कलम तक” : 73

“कुदाल से कलम तक”73 जब संगम ने बुलाया : 28 “दो-दो जगह पर एक साथ काम करने वाले लोग भी…!”   वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी दो बार अमृत प्रभात की बंदी के समय ऐसे अवसर भी आए जब अन्‍यत्र नौकरी के मौके मिले, लेकिन कई कारणों से मैने उसे ज्‍वाइन नहीं ...

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” कलकत्‍ता से भी अमृत प्रभात निकलने की योजना बनी थी …! “: कुदाल से कलम तक” : 72 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”72 जब संगम ने बुलाया : 27 “कलकत्‍ता से भी अमृत प्रभात निकलने की योजना बनी थी …!”   वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी बीच- बीच की बंदी के बाद अमृत प्रभात जब भी निकलता, उसकी पकड़ पाठकों पर ऐसी थी कि वह अपना सामान्‍य प्रसार पा जाता। अखबार ...

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“अमृत प्रभात –एनआइपी” को जिंदा रखने की कोशिशें …! “: कुदाल से कलम तक” : 71 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”71 जब संगम ने बुलाया : 26 “अमृत प्रभात –एनआइपी” को जिंदा रखने की कोशिशें..!”   वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी अमृत प्रभात –एनआइपी को जिंदा रखने के लिए तरह- तरह की कोशिश की गई। इलाहाबाद विवि के कुछ शिक्षकों को जोड़ा गया। कुछ लोगों की सलाह थी कि ...

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मालिक का ब्रीफकेस लेकर चलना…! “: कुदाल से कलम तक” : 70 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”70 जब संगम ने बुलाया : 25 “मालिक का ब्रीफकेस लेकर चलना..!”   वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी मैं तमाल बाबू के बंगले पर कभी बिना बुलाए नहीं गया। पत्रिका समूह के एकाध लोग नियमित वहां हाजिरी देते थे, घंटों उनका समय वहीं बीतता। संपादकीय के लोग भी थे। ...

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” जब लोक सेवा आयोग तिलमिला गया और उसने विज्ञापन बंद कर दिया …”: कुदाल से कलम तक” : 69 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”69 जब संगम ने बुलाया : 24 “जब तिलमिलाकर लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन रोक दिया..?”   रामधनी द्विवेदी इन सबके वावजूद अमृत प्रभात में पत्रकारिता में ईमानदारी होती थी और संपादक पर किसी का दबाव नहीं चलता था। किसी खबर के लिए मालिकों का भी कभी कोई ...

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” घोष परिवार की तीसरी पीढ़ी व्‍यावहारिक नहीं थी …”: कुदाल से कलम तक” : 68 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”68 जब संगम ने बुलाया : 23 “पत्रिका था..?”   रामधनी द्विवेदी घोष परिवार की तीसरी पीढ़ी व्‍यावहारिक नहीं थी । इतना बड़ा साम्राज्‍य चलाने के लिए जो गुण होने चाहिए थे, वे उनमें नहीं थे। जब तक तुषार और उनके सुपुत्र तरुण बाबू रहे, सब कुछ बुलंदी ...

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” पत्रिका का जहाज डूब रहा था…”: कुदाल से कलम तक” : 67 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”67 जब संगम ने बुलाया : 22 “पत्रिका का जहाज डूब रहा था..?”   रामधनी द्विवेदी पत्रिका का जहाज डूब रहा था लेकिन षड़यंत्रों की कमी नहीं थी। लोगों की अपनी अपनी महत्‍वाकांक्षाएं थीं। कोई संपादक बनना चाहता था तो कोई पैसे कमाना। घोष परिवार ने जो भी ...

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“क्लिनिक पर अखबार का हमला”: कुदाल से कलम तक” : 66 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”66 जब संगम ने बुलाया : 21 “क्लिनिक पर अखबार का हमला ..?”   रामधनी द्विवेदी ….यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि मैने अपनी मां से कभी खाना नहीं मांगा। यह अलग बात है कि वह मेरे हर भाव को जानती थी, कब मुझे खाना चाहिए, मुझे क्‍या पसंद ...

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“तुम भूमिहार हो क्‍या…?” कुदाल से कलम तक”:18: रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक” जब संगम ने बुलाया -18 कबाड़ी को बिकी किताबें रामधनी द्विवेदी मैने अपनी पुस्‍तकों को गांव की लाइब्रेरी में देने की जो बात लिखी, उसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता राजेश कुमार पांडेय की टिप्‍पणी आई जिसमे उन्‍होंने प्रख्‍यात भाषाविद् डा उदय नारायण तिवारी की ...

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“अमृत प्रभात” में बेनी सिंह की सलाह  : 17: “पत्रकारिता की दुनिया :38”:  रामधनी द्विवेदी :64:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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