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Tag Archives: Ramdhani Diwedi

“ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ?” कुदाल से कलम तक” : 65 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”65 जब संगम ने बुलाया : 20 ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ..?”   रामधनी द्विवेदी ….लेकिन लगता है कि प्रकृति को इसका पहले से आभास था और उसने कुछ वै‍कल्पिक व्‍यवस्‍था कर दी थी। इलाहाबाद के प्रवास के दौरान मैने पत्रकारिता के साथ ही अपना अलग विषयों का ...

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“तुम भूमिहार हो क्‍या…?” कुदाल से कलम तक”:18: रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक” जब संगम ने बुलाया -18 कबाड़ी को बिकी किताबें रामधनी द्विवेदी मैने अपनी पुस्‍तकों को गांव की लाइब्रेरी में देने की जो बात लिखी, उसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता राजेश कुमार पांडेय की टिप्‍पणी आई जिसमे उन्‍होंने प्रख्‍यात भाषाविद् डा उदय नारायण तिवारी की ...

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“मध्‍यांतर”: दिल्ली आने पर किताबों की दुर्दशा और पुस्तक बिछोह की अतीव पीड़ा

बरेली से दिल्‍ली जाने पर पुस्तकों की हुई दुर्दशा!!! रामधनी द्विवेदी पुस्तक प्रेम कभी- कभी बहुत पीड़ा भी देता है। खासतौर से जब आपके पास उन्‍हें सहेज कर रखने की जगह न हो, अपना मकान न हो जिसमें किताबें संभाल कर रखी जा सकें। किताबों को खरीदने, पढ़ने से सुख ...

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“अमृत प्रभात” में बेनी सिंह की सलाह  : 17: “पत्रकारिता की दुनिया :38”:  रामधनी द्विवेदी :64:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“अमृत प्रभात” में सुनील सेठ बग्गा  : 16: “पत्रकारिता की दुनिया :37”:  रामधनी द्विवेदी :63:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“अमृत प्रभात” में बंदी का पहला दिन : 14: “पत्रकारिता की दुनिया :35”:  रामधनी द्विवेदी :61:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात और NIP के लोग : 13: “पत्रकारिता की दुनिया :34”:  रामधनी द्विवेदी :60:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 12: “पत्रकारिता की दुनिया :33”:  रामधनी द्विवेदी :59:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“हुनर हाट”: रंगीन कुरुई, छोटी कुरुई, बड़ी कुरूई, सादी कुरुई, रंग बिरंगी कुरुई और मौना: रामधनी द्विवेदी

जो बहू जितनी अधिक और जितनी अच्‍छी कुरुई लाती, उसे उतना ही एडवांस माना जाता। उस समय तांबे,पीतल के कुछ बर्तन बेटियों को दिए जाते, साथ में कई कुरुई कभी- कभी तो दर्जन भर भी और मऊनी- मौना भी। यह उनके मायके की याद दिलाती। लड़कियां अपनी ससुराल वालों को ...

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अमृत प्रभात : 11: “पत्रकारिता की दुनिया :32”:  रामधनी द्विवेदी :58:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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