Home / Tag Archives: Ramdhani Diwedi (page 3)

Tag Archives: Ramdhani Diwedi

दक्षिणापथ -5: “सुचींद्रम के गुमनाम कलाकार”: रामधनी द्विवेदी

दक्षिणापथ -5 सुचींद्रम के गुमनाम कलाकार वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी कन्‍या कुमारी से लगभग 14-15 किमी पर सुचींद्रम है। हमारे कैब ड्राइवर तनुपिल्‍लई ही हमारे गाइड थे। वह नागरकोइल के रहने वाले हैं और आसपास के तीर्थ स्‍थलों के बारे में अच्‍छी जानकारी है। उन्‍होंने ही कहा कि पहले सुचींद्रम ...

Read More »

“मैं अमृत प्रभात के प्रतिद्वंद्वी अखबार में काम नहीं करना चाहता…!”:  रामधनी द्विवेदी: कुदाल से कलम तक” : 74

“कुदाल से कलम तक”74 जब संगम ने बुलाया : 29  “मैं अमृत प्रभात के प्रतिद्वंद्वी अखबार में काम नहीं करना चाहता…!”  वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी अमृत प्रभात में एक बार गिरिजा शंकर मिश्र ने भी पैसा लगाया था। वह नोएडा विकास प्राधिकरण में अधिकारी थे। यह 1991-1992 के आसपास की ...

Read More »

मालिक का ब्रीफकेस लेकर चलना…! “: कुदाल से कलम तक” : 70 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”70 जब संगम ने बुलाया : 25 “मालिक का ब्रीफकेस लेकर चलना..!”   वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी मैं तमाल बाबू के बंगले पर कभी बिना बुलाए नहीं गया। पत्रिका समूह के एकाध लोग नियमित वहां हाजिरी देते थे, घंटों उनका समय वहीं बीतता। संपादकीय के लोग भी थे। ...

Read More »

” घोष परिवार की तीसरी पीढ़ी व्‍यावहारिक नहीं थी …”: कुदाल से कलम तक” : 68 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”68 जब संगम ने बुलाया : 23 “पत्रिका था..?”   रामधनी द्विवेदी घोष परिवार की तीसरी पीढ़ी व्‍यावहारिक नहीं थी । इतना बड़ा साम्राज्‍य चलाने के लिए जो गुण होने चाहिए थे, वे उनमें नहीं थे। जब तक तुषार और उनके सुपुत्र तरुण बाबू रहे, सब कुछ बुलंदी ...

Read More »

” पत्रिका का जहाज डूब रहा था…”: कुदाल से कलम तक” : 67 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”67 जब संगम ने बुलाया : 22 “पत्रिका का जहाज डूब रहा था..?”   रामधनी द्विवेदी पत्रिका का जहाज डूब रहा था लेकिन षड़यंत्रों की कमी नहीं थी। लोगों की अपनी अपनी महत्‍वाकांक्षाएं थीं। कोई संपादक बनना चाहता था तो कोई पैसे कमाना। घोष परिवार ने जो भी ...

Read More »

“ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ?” कुदाल से कलम तक” : 65 : रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक”65 जब संगम ने बुलाया : 20 ज्योतिष, होम्योपैथी और पत्रकारिता ..?”   रामधनी द्विवेदी ….लेकिन लगता है कि प्रकृति को इसका पहले से आभास था और उसने कुछ वै‍कल्पिक व्‍यवस्‍था कर दी थी। इलाहाबाद के प्रवास के दौरान मैने पत्रकारिता के साथ ही अपना अलग विषयों का ...

Read More »

“तुम भूमिहार हो क्‍या…?” कुदाल से कलम तक”:18: रामधनी द्विवेदी

“कुदाल से कलम तक” जब संगम ने बुलाया -18 कबाड़ी को बिकी किताबें रामधनी द्विवेदी मैने अपनी पुस्‍तकों को गांव की लाइब्रेरी में देने की जो बात लिखी, उसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता राजेश कुमार पांडेय की टिप्‍पणी आई जिसमे उन्‍होंने प्रख्‍यात भाषाविद् डा उदय नारायण तिवारी की ...

Read More »

“मध्‍यांतर”: दिल्ली आने पर किताबों की दुर्दशा और पुस्तक बिछोह की अतीव पीड़ा

बरेली से दिल्‍ली जाने पर पुस्तकों की हुई दुर्दशा!!! रामधनी द्विवेदी पुस्तक प्रेम कभी- कभी बहुत पीड़ा भी देता है। खासतौर से जब आपके पास उन्‍हें सहेज कर रखने की जगह न हो, अपना मकान न हो जिसमें किताबें संभाल कर रखी जा सकें। किताबों को खरीदने, पढ़ने से सुख ...

Read More »

“अमृत प्रभात” में बेनी सिंह की सलाह  : 17: “पत्रकारिता की दुनिया :38”:  रामधनी द्विवेदी :64:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

Read More »

“अमृत प्रभात” में सुनील सेठ बग्गा  : 16: “पत्रकारिता की दुनिया :37”:  रामधनी द्विवेदी :63:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

Read More »