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Tag Archives: Ramdhani Diwedi

“अमृत प्रभात” में बंदी का पहला दिन : 14: “पत्रकारिता की दुनिया :35”:  रामधनी द्विवेदी :61:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात और NIP के लोग : 13: “पत्रकारिता की दुनिया :34”:  रामधनी द्विवेदी :60:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 12: “पत्रकारिता की दुनिया :33”:  रामधनी द्विवेदी :59:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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“हुनर हाट”: रंगीन कुरुई, छोटी कुरुई, बड़ी कुरूई, सादी कुरुई, रंग बिरंगी कुरुई और मौना: रामधनी द्विवेदी

जो बहू जितनी अधिक और जितनी अच्‍छी कुरुई लाती, उसे उतना ही एडवांस माना जाता। उस समय तांबे,पीतल के कुछ बर्तन बेटियों को दिए जाते, साथ में कई कुरुई कभी- कभी तो दर्जन भर भी और मऊनी- मौना भी। यह उनके मायके की याद दिलाती। लड़कियां अपनी ससुराल वालों को ...

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अमृत प्रभात : 11: “पत्रकारिता की दुनिया :32”:  रामधनी द्विवेदी :58:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 10: “पत्रकारिता की दुनिया :31”:  रामधनी द्विवेदी :57:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 9: “पत्रकारिता की दुनिया :30”: ! : रामधनी द्विवेदी :56:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 8: “पत्रकारिता की दुनिया :29”: ! : रामधनी द्विवेदी :55:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 7: “पत्रकारिता की दुनिया :28”: ! : रामधनी द्विवेदी :54:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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अमृत प्रभात : 6: “पत्रकारिता की दुनिया :27”: ! : रामधनी द्विवेदी :53:

रामधनी द्विवेदी आज जीवन के 72 वें वर्ष में जब कभी रुक कर थोड़ा पीछे की तरफ झांकता हूं तो सब कुछ सपना सा लगता है। सपना जो सोच कर नहीं देखा जाता। जिसमें आदमी कहां से शुरू हो कर कहां पहुंच जाता है? पता नहीं क्‍या-क्‍या घटित होता है? ...

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