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A blood donation camp was organized on Teachers’ Day

Blood donation camp on teachers day
Governor Anandi Ben Patel has been a teacher. In this form, he has a direct association with Teacher’s Day as well. At present he is the Chancellor of several universities. In this role also she guides like an educationist. With his inspiration, a blood donation camp was organized on Teachers’ Day.

The Governor called for accepting blood donation as a social work and service. She said that donating blood is a noble act. So don’t hesitate to donate blood. It is necessary to make people aware of blood donation and organize camps so that no one dies due to lack of blood in the state. In this work, voluntary organizations need to come forward in large numbers to create awareness and increase the participation of people in blood donation camps. Governor said that Uttar Pradesh being a state with large population, in view of the need of blood bank, students above eighteen years of higher educational institutions can be motivated to donate blood.

Anandiben Patel inaugurated the mega blood donation camp at Indira Gandhi Pratishthan here on the occasion of Teachers’ Day. He inspected the blood donation camp site. Communicated with voluntary blood donors who donated blood. Anandi Ben encouraged voluntary blood donors for successful organization of blood donation camp and honored the volunteers who donated more and more blood by giving certificates. He congratulated all the blood donors who donated blood in the camp for their cooperation in the auspicious work. In-charge of KGMU Blood Bank, Dr Tulika Chandra told that donating blood does not bring any weakness. This causes some kind of damage. Most of the people avoid donating blood because of fear, hesitation and hesitation. But these are all misleading. He told that a healthy person can donate blood once after three months of donating blood again. District Magistrate Lucknow, Abhishek Prakash expressed his gratitude to the Governor for starting the blood donation camp. Said that today is Teacher’s Day and Governor Madam has also been a teacher in the past, so this camp has been organized due to her inspiration.

राज्यपाल की प्रेरणा से रक्तदान शिविर

राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल शिक्षिका रही है। इस रूप में उनका शिक्षक दिवस से भी सीधा जुड़ाव रहा है। इस समय वह अनेक विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति है। इस भूमिका में भी वह शिक्षाविद की भांति ही मार्गदर्शन करती है। उनकी प्रेरणा से शिक्षक दिवस पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। राज्यपाल ने रक्तदान को सामाजिक कार्य व सेवा के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक महान कार्य है। इसलिए रक्तदान में संकोच न करें। प्रदेश में किसी की रक्त की कमी से मृत्यु न हो इसलिए लोगो के रक्तदान के प्रति जागरूक करना और शिविरों का आयोजन किया जाना जरूरी है। इस कार्य में स्वैच्छिक संगठनों को बड़ी संख्या में आगे आकर जागरूकता लाने और रक्तदान शिविरों में लोगों की प्रतिभाागिता बढ़ाने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश बड़ी आबादी वाला प्रदेश है,ऐसे में ब्लड बैंक की आवश्यकता के दृष्टिगत उच्च शिक्षण संस्थानों के अठारह वर्ष से ऊपर के विद्यार्थियों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा सकता है। आनंदीबेन पटेल ने शिक्षक दिवस के अवसर पर यहां इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में मेगा रक्तदान शिविर का शुभारम्भ किया। उन्होंने रक्तदान शिविर स्थल का निरिक्षण किया। रक्तदान करने वाले स्वैच्छिक रक्त दाताओं से संवाद किया। आनन्दी बेन ने रक्तदान शिविर के सफल आयोजन के लिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं को प्रेरित कर रक्तदान कराने एवं अधिक से अधिक रक्तदान करने वाले वालटियर्स को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने शिविर में रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं को शुभ कार्य में सहयोग देने के लिए बधाई दी। समारोह में केजीएमयू ब्लड बैंक की प्रभारी डा तूलिका चंद्रा ने बताया कि रक्तदान करने से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। इससे किसी प्रकार का नुकसान होता है। भय, संकोच और झिझक के कारण ही अधिकांश लोग रक्तदान करने से बचते हैं। लेकिन यह सब भ्रामक हैं। उन्होंने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति एक बार रक्तदान करने के तीन माह उपरान्त पुनः रक्तदान कर सकता है। जिलाधिकारी लखनऊ, अभिषेक प्रकाश ने रक्तदान शिविर के शुभारम्भ के लिए राज्यपाल का आभार व्यक्त किया। कहा कि आज शिक्षक दिवस है और राज्यपाल महोदया भी पूर्व में शिक्षक रही हैं, इसलिए उनकी प्रेरणा से ही इस शिविर का आयोजन किया गया है।

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