
दक्षिणापथ -6
समुद्र के तट पर तिरुपति मंदिर
वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी
कन्या कुमारी में वहां का तिरुपति मंदिर भी दर्शनीय है। इसकी भव्यता देखते ही बनती है। यह एकदम समुद्र के तट पर है। लगभग कुछ मीटर दूर ही उत्ताल समुद्र हिलोरें लेता रहता है। यह लगभग साढ़े पांच एकड़ में बना है और इस पर लगभग 22 करोड़ लागत आई है। यहां पहुंचने के लिए बहुत ही अच्छी सड़क है और भीड़ कतई नहीं होती। प्रवेश द्वार से घुसते ही हाथ पैर धोने के लिए नल लगे हैं और आप कुछ सीढियां चढ़कर सीधे गर्भगृह तक पहुंच सकते हैं।

चूंकि जनवरी के शुरू में ही वहां गर्मी पड़ने लगी थी और दोपहर 11 बज रहे थे जिससे सीढि़यां गर्म हो गईं थीं। गर्मी से बचने के लिए के लिए सीढियों पर बीच में कार्पेट भी लगी थी। ऊपर पहुंचते ही ठीक सामने ही मुख्य मंदिर है। बालाजी की मूर्ति दिव्य है। हम लोगों ने पहले दर्शन किया। पुजारी ने भी बहुत ही मन से आरती की और हम लोगों को आरती और प्रसाद दिया। यहां दिव्य दर्शन लाभ हुआ। हम लोग अपलक भगवान को निहार रहे थे तो अन्य दर्शनार्थी आ गए जिससे पुजारी ने जाने का इशारा किया। जितने भी लोग आते, उनके लिए अलग से आरती की जाती। यहां पर अधिक देवों की प्रतिमाएं नहीं है।
यहां भीड़ न होने से अभी टिकट आदि की व्यवस्था नहीं है। सभी लोग नि:शुल्क दर्शन करते हैं। गोपुरम से निकलते ही बाई ओर समुद्र की नीलिमा दिखती है। दूर दूर तक फैला समुद्र, आसपास हरे भरे पेड़, तेज चलती हुई हवा एक अलग शांति का अनुभव करा रहे थे। हवा तो इतनी तेज थी कि फोटो खींचते समय हाथ को स्थिर रखना कठिन हो रहा था। हम लोगों ने कई स्नैप वहां लिए। थोड़ा रुक कर मंदिर की परिक्रमा कर प्रसाद लेते हुए नीचे आए। इस स्थान पर एक अलौकिक शांति का अनुभव होता है। पूरा परिसर बहुत ही साफ सुथरा और सतह से लगभग 25-30 फुट ऊंचा है। यहां से कन्याकुमारी का विवेकानंद स्मारक और तिरु वल्लुवर की मूर्ति बहुत साफ दिखती है। आसपास कोई दूकान और रेस्तरां आदि न होने से सफाई रहती है और भीड़ नहीं होती। यहां फोन आदि ले जाने पर कोई मनाही नहीं है। लेकिन मुख्य मूर्ति की फोटो लेना वर्जित है। हम लोगों ने खूब फोटो खींचे।

एक ही हुंडी है जिसमें दान दिया जा सकता है। पूरा मंदिर दूर से ही दिखता है और इसका स्वर्ण शिखर ध्यान आकृष्ट करता है। चौकोर आधार पर बना इस मंदिर को सबको देखना चाहिए। मंदिर के लिए विवेकानंद केंद्र ने जमीन दी है। इसका निर्माण जुलाई 2013 में शुरू हुआ और जनवरी 2019 में इसे कन्याकुमारी को समर्पित किया गया।यहां तिरुपति देवस्थानम में होने वाले हर आयोजन को किया जाता है। मंदिर का निर्माण इस तरह किया गया है कि हर साल 14 अप्रैल को भगवान सूर्य की किरणें वेंकटेश्वर के चरणों पर पड़ती हैं। वह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है।

मंदिर परिसर में ही पुजारियों और अन्य स्टाफ के लिए कमरे बने हैं। यहां भी केशदान के लिए स्थान बना है जिसमें तिरुपति की तरह लोग केशदन कर सकते हैं। तिरुपति देवस्थानम ने देश के कई भागों में इस तरह के तिरुपति मंदिर बनाए हैं जिसमें बालाजी का दर्शन किया जा सकता है।बेंगलुरु में तीन मंदिर है। चेन्नई में भी ऐसा ही मंदिर है जबकि कोलकाता और भुवनेश्वर में ऐसा मंदिर बन रहा है। दिल्ली और ऋषिकेश में भी तिरुपति मंदिर है। लेकिन ये अपेक्षाकृत छोटे हैं।

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