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*सच है रामायण – पाताल लोक की खोज*: प्रोफ. भरत राज सिंह

 

सच है रामायण – पाताल लोक की खोज

प्रोफेसर (डा०) भरत राज सिंह

रामायण की कथा के मुताबिक पवनपुत्र हनुमान पाताल लोक तक पहुंचे थे, जो भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे। रामायण की कथा के मुताबिक रामभक्त हनुमान अपने ईष्ट देव को अहिरावण के चंगुल से बचाने के लिए एक सुरंग से पाताल लोक पहुंचे थे। इस कथा के मुताबिक पाताल लोक ठीक धरती के नीचे है। वहां तक पहुंचने के लिए हनुमान जी को 70 हजार योजन की दूरी सात तलों (अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल) की खोज में चलना पडा था । अगर आज के वक्त में हम अपने देश में कहीं सुरंग खोदना चाहें तो ये सुरंग अमेरिका महाद्वीप के मैक्सिको, ब्राजील और होंडुरास जैसे देशों तक पहुंचेगी।

पाताल लोक- क्या है?

पाताल लोक- वो दुनिया जो जमीन के नीचे है, वो दुनिया जहां इंसानों का पहुंचना संभव नहीं। पौराणिक कथाओं में पाताल लोक का जिक्र बार-बार मिलता है, लेकिन सवाल ये है कि क्या पाताल लोक काल्पनिक है या इसका वजूद भी है? आईये इसके बारे में कुछ सचाई को जानने की कोशिश करे-

2015 में हूस्टन विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों ने आधुनिक लाइडर तकनीक से मध्य अमेरिका महाद्वीप के होंडुरास में सियुदाद ब्लांका नाम के एक गुम प्राचीन शहर की खोज की है । इस शहर को बहुत से जानकार पाताल लोक मान रहे हैं, जहां राम भक्त हनुमान पहुंचे थे। दरअसल, इस विश्वास की कई पुख्ता वजह है । संभव है कि यदि भारत या श्रीलंका से कोई सुरंग खोदी जाएगी तो वो सीधे सियुदाद ब्लांका ही निकलेगी। दूसरी वजह ये है कि वक्त की हजारों साल पुरानी परतों में दफन सियुदाद ब्लांका में ठीक राम भक्त हनुमान के जैसे वानर देवता की मूर्तियां मिली हैं।

पाताल लोक की दुनिया जो जमीन के नीचे है। वो दुनिया जहां इंसानों का पहुंचना संभव नहीं। पौराणिक कथाओं में पाताल लोक का जिक्र बार-बार मिलता है, लेकिन इतिहासकारों का कहना है कि प्राचीन शहर सियुदाद ब्लांका के लोग एक विशालकाय वानर देवता की मूर्ति की पूजा करते थे। लिहाजा, ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं हजारों साल प्राचीन सियूदाद ब्लांका ही तो रामायण में जिक्र पाताल पुरी तो नहीं है। किवदंतियां हैं कि पूर्वोत्तर होंडुरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में हजारों साल पहले एक गुप्त शहर सियुदाद ब्लांका था। कहा जाता है कि हजारों साल पहले इस प्राचीन शहर में एक फलती-फूलती सभ्यता सांस लेती थी, जो अचानक ही वक्त की गहराइयों में गुम हो गई। अब तक कि खुदाई में इस शहर के ऐसे कई अवशेष मिले हैं जो इशारा करते हैं कि सियुदाद के निवासी वानर देवता की पूजा करते थे। यहां सियुदाद के वानर देवता की घुटनों के बल बैठे मूर्ति को देखते ही राम भक्त हनुमान की याद आ जाती है। घुटनों पर बैठे वजरंग बली की मूर्ति वाले मंदिर आपको हिंदुस्तान में जगह-जगह मिल जाएंगे। हनुमान जी के एक हाथ में उनका जाना-पहचाना हथियार गदा भी रहता है। दिलचस्प बात ये है कि प्राचीन शहर से मिली वानर-देवता की मूर्ति के हाथ में भी गदा जैसा हथियार नजर आता है।

दरअसल, मध्य अमेरिका के एक मुल्क में प्राचीन शहर की खोज के साथ सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि रामायण की कथा में ऐसे सूत्र बिखरे पड़े हैं जो कहते हैं कि भारत या श्रीलंका की जमीन के ठीक नीचे वो लोग हैं जिसे पाताल पुरी कहा जाता था। पाताल पुरी का जिक्र रामायण के उस अध्याय में आता है, जब मायावी अहिरावण राम और लक्ष्मण का हरण कर उन्हें अपने माया लोक पाताल पुरी ले जाता है। रामायण की कथा के अनुसार हनुमान जी को अहिरावण तक पहुंचने के लिए पातालपुरी के रक्षक मकरध्वजा को परास्त करना पड़ा था जो ब्रह्मचारी हनुमान का ही पुत्र था। दरअसल, मकरध्वजा एक मत्स्यकन्या से उत्पन्न हुए थे, जो लंकादहन के बाद समुद्र में आग बुझाते हनुमान जी के पसीना गिर जाने से गर्भवती हुई थी। रामकथा के मुताबिक अहिरावण वध के बाद भगवान राम ने वानर रूप वाले मकरध्वजा को ही पातालपुरी का राजा बना दिया था, जिसे पाताल पुरी के लोग पूजने लगे थे।

होंडूरास के गुप्त प्राचीन शहर के बारे में सबसे पहले ध्यान दिलाने वाले अमेरिकी खोजी थियोडोर मोर्डे ने दावा किया था कि स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया था कि वहां के प्राचीन लोग वानर देवता की ही पूजा करते थे। उस वानर देवता की कहानी काफी हद तक मकरध्वजा की कथा से मिलती-जुलती है। हालांकि अभी तक प्राचीन शहर सियुदाद ब्लांका और रामकथा में कोई सीधा रिश्ता नहीं मिला है।

नई तकनीक से पाताल लोक की खोज

मध्य अमेरिकी देश होंडुरास में वानर देवता वाले प्राचीन शहर की खोज बरसों पुरानी है। होंडूरास में उस प्राचीन शहर की किवदंती सदियों से सुनाई जाती हैं जहां बजरंग बली जैसे वानर देवता की पूजा की जाती थी। ये कहानियां होंडूरास पर राज करने वाले पश्चिमी लोगों तक भी पहुंची।

स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के महा-निदेशक व वैदिक विज्ञान केन्द्र के प्रभारी प्रो. भरत राज सिंह ने इस खोज को आगे बढ़ाते हुए बताया कि प्रथम विश्वयुद्ध के बाद एक अमेरिकी पायलट ने होंडुरास के जंगलों में कुछ अवशेष देखे थे। उसकी पहली जानकारी अमेरिकी खोजकर्ता थिंयोडोर मोर्ड ने 1940 में दी थी। एक अमेरिकी मैगजीन में उसने लिखा कि उस प्राचीन शहर में वानर देवता की पूजा होती थी, लेकिन उसने शहर की जगह का खुलासा नहीं किया। बाद में रहस्यमय हालात में थियोडोर की मौत हो जाने से प्राचीन शहर की खोज अधूरी रह गई। इसके करीब 70 साल बाद, होंडूरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में, जमीन में दफन एक प्राचीन शहर अपने इतिहास के साथ सांस ले रहा था, ये शायद दुनिया कभी नहीं जा पाती अगर हुस्टन विश्वविद्यालय के अमेरिकी वैज्ञानिकों की टीम ने उसे तलाशने के लिए क्रांतिकारी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया होता। यह संभव हुआ लाइडार (LIDAR) के नाम से जानी जाने वाली तकनीक से, जो जमीन के नीचे की 3-D मैपिंग द्वारा प्राचीन शहर को खोज निकाला।

अमेरिका के ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी और नेशनल सेंटर फॉर एयरबोर्न लेजर मैपिंग ने होंडूरास के जंगलों के ऊपर आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से प्राचीन शहर के निशान को खोज निकाला है। लाइडार तकनीक की मदद से ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने होंडूरास के जंगलों के ऊपर से उड़ते हुए अरबों लेजर तरंगें जमीन पर फेंकी। इससे जंगल के नीचे की जमीन का 3-डी डिजिटल नक्शा तैयार हो गया। थ्री-डी नक्शे से जो आंकड़े मिले उससे जमीन के नीचे प्राचीन शहर की मौजूदगी का पता चल गया। वैज्ञानिकों ने पाया की जंगलों की जमीन की गहराइयों में मानव निर्मित कई चीजें मौजूद हैं। हालांकि लाइडर तकनीक से जंगल के नीचे प्राचीन शहर होने के निशान मिल गए हैं, लेकिन ये निशान किवदंतियों में जिक्र होने वाला सियूदाद ब्लांका के ही हैं,ये शायद कभी पता ना चले। दरअसल, पर्यावरण के प्रति सजग होंडूरास जंगलों के बीच खुदाई की इजाजत नहीं देता है, ऐसे में सिर्फ ये अनुमान ही लगाया जा सकता है कि जंगलों में एक प्राचीन शहर दफन है, इस इलाके में बजरंगबली जैसी वानर देवता की कुछ मूर्तियां जरूर मिली हैं, जिससे ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि कहीं किवदंतियों का ये शहर रामायण में जिक्र पाताल लोक ही तो नहीं है।

प्रो. भरत राज सिंह ने बताते हैं कि बंगाली रामायण में पाताल लोक की दूरी 1000 योजन बताई गई है, जो लगभग 12,800 किलोमीटर है। उनका कहना है की यदि कोई सुरंग भारत अथवा श्रीलंका से खोदी जाय तो पाताल लोक की दूरी पृथ्वी के व्यास अर्थात 12,756 किलोमीटर के बराबर होगी, जो लगभग 1000 योजन के बराबर ही है। रामायण में वर्णन है कि अहिरावण के चंगुल से भगवान राम व लक्ष्मण को छुड़ाने के लिए बजरंगबली को पातालपुरी के रक्षक मकरध्वज को परास्त करना पड़ा था तथा अहिरावण के वध के बाद भगवान राम ने मकरध्वज को ही पातालपुरी का राजा बना दिया था। अतः जमीन के नीचे वानर मूर्ति मिलने के बाद अनुमान लगाया जा सकता है कि बाद में वहां के लोग मकरध्वज की ही मूर्ति की पूजा करने लगे।

हम सभी भारतीयों को गर्व करना चाहिए कि हमारे पौराणिक ग्रन्थ, जैसे रामायण, महाभारत, वेद व पुराण आदि प्राचीन इतिहास की एक धरोहर है, न कि एक काल्पनिक पुस्तकीय लेख; जो भारत वर्ष की प्राचीन सभ्यता और वैज्ञानिक प्रगति को विश्वपटल पर एक पथ प्रदर्शक होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है | आईये हम सभी इस मिट्टी को नमन करे और अपने पुराने ज्ञान को दुनिया में फैलाने में अग्रणी वने ।

प्रोफेसर (डा०) भरत राज सिंह,

महा-निदेशक, स्कूल आफ मैनेजमेन्ट साइंसेस,

 व वैदिक विज्ञान केंद्र, लखनऊ-226501

मोबाइल- 9415025825

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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