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दस माह में दो दर्जन से अधिक दागी पुलिसकर्मी हुए निलंबित

 

खाकी वर्दी को मिला अपराध का लाइसेंस? अपराध की दुनिया में अपराधी ही नहीं दूसरों की सुरक्षा का जिम्मा लेने वाले अपराधी पुलिसकर्मी भी अपराध के दलदल में कदम रखने में पीछे नहीं हैं। लिहाजा यह रवायत आज से नहीं काफी पुरानी हो चुकी है। वसूली, अपहरण, लूट, हत्या एवं बलात्कार जैसे जघन्य अपराधी इनसे अछूते नहीं है। कायदे कानून इनके लिए मायने नहीं रखते, क्योंकि ये खाकी वर्दी पहनते हैं।

ए अहमद सौदागर

लखनऊ

10 मार्च 2019 से लेकर अब तक करीब 2 दर्जन से अधिक दागी पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में। ऐसा क्यों?

आखिर अपराध की दुनिया में अपराधी ही नहीं दूसरों की सुरक्षा का जिम्मा लेने वाले पुलिसकर्मी भी अपराध के दलदल में कदम रखने में पीछे नहीं हैं दिखते हैं, ऐसा क्यों है? यह रवायत आज से नहीं काफी पुरानी हो चुकी है। वसूली, अपहरण, लूट, हत्या एवं बलात्कार जैसे जघन्य अपराधी इनसे अछूते नहीं है। कायदे कानून इनके लिए मायने नहीं रखते, क्योंकि ये खाकी वर्दी पहनते हैं।

करीब चार पांच दशक पूर्व पीछे नजर डालें तो इसका सहज अंदाजा लग सकता है। कभी अपने इकबाल के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश पुलिस का यह बदरंग चेहरा ही अब इसकी असल पहचान है।
लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल पवन कुमार की स्मैक तस्करी में गिरफ्तारी के बाद साबित हो गया कि मुख्यमंत्री व डीजीपी या फिर कप्तानों का दागी पुलिसकर्मियों को किसी का खौफ नहीं है।


दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस अपराध का नाता पुराना है। दागी पुलिसकर्मियों को विभाग से बाहर करने के दावे कमजोर इच्छा शक्ति के आगे बौना साबित हो गये और अपराध की जंजीर पुलिस महकमे की जकड़ती गई।
राजधानी लखनऊ के कैंट पुलिस ने सोमवार की रात पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल पवन कुमार को 244 पुड़िया स्मैक व नकदी के साथ गिरफ्तार किया तो एक बार फिर साबित हो गया कि चाहे कुछ भी सजा मिल जाए मानेंगे नहीं।
हालांकि राजधानी में दागी पुलिसकर्मियों का रवैया नया नहीं बल्कि बहुत पुराना हो चुका है। किसी ने मासूम बच्चे की जान मरवा दिया तो किसी ने मोटी रकम की चाहत में व्यवसायी के घर मुखबीर के सहयोग से डकैती डाला।
लिहाजा लखनऊ के कई पुलिसकर्मियों ने वर्दी के दामन पर डॉग लगा चुके हैं। सनसनीखेज लूट हो या फिर गौरव धंधा, हत्या या आंख मिचोली। खाकी वालों से कुछ नहीं बचा है।

और तो और 10 मार्च 2019 को गोसाईगंज थाने में तैनात दरोगा पवन मिश्र ने दो सिपाहियों एवं मुखबीर के साथ कोयला कारोबारी प्रदीप के घर छापेमारी कर कार्रवाई करने के बजाए एक करोड़ पचासी लाख की डकैती डालकर भाग निकले थे। यही नहीं 28 सितंबर 2019 को गोमती नगर में वाहन चेकिंग के नाम पर सिपाही प्रशांत चौधरी ने अपने साथी सिपाही संदीप के साथ मिलकर एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसमें के दागी पुलिसकर्मी निलंबित ही नहीं बल्कि नौकरी से निकाल दिए गए। यह तो बानगी भर है इससे पहले भी कई पुलिसकर्मी वर्दी के दामन पर दाग लगा चुके हैं। वही एसएससी कलानिधि नैथानी ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ कई तरह के अभियान लगातार चला रहे हैं, इसके बावजूद भी अपराधी तो दूर दागी पुलिसकर्मियों का मनोबल गिरने के बजाय दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है।
पहले भी कई पुलिसकर्मी विभाग को कर चुके हैं शर्मसार

पूर्व में घटी घटनाओं पर एक नजर

आशियाना में क्राइम ब्रांच ने व्यवसाई से सोना लूटा 5 पुलिसकर्मी बर्खास्त।
28 सितंबर 2019 को गोमती नगर में एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में सिपाही बर्खास्त।
10 मार्च 2019 को गोसाईगंज में कार्रवाई के नाम पर कोयला व्यापारी के घर दरोगा ने सिपाहियों के साथ मिलकर डकैती डाली।
यही नहीं 12 जून 2012 में सर्विलांस सेल में तैनात पुलिसकर्मियों के कारनामे देख तत्कालीन एसएसपी ने सर्विलेंस खेल को ही भंग कर दिया था।
29 अक्टूबर 2019 को  हेड कांस्टेबल के हत्थे चढ़ा था स्मैक तस्कर पुलिसकर्मी।

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