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लखनऊ में जमकर गरज रहे ‘बिहारी’ असलहे


अवैध असलहा तस्करों का बढ़ता नेटवर्क बना चुनौती। घटनाओं के बाद भी नहीं चेत रही लखनऊ पुलिस। 22 दिनों में 13 लोगों के सीने में दागी गयीं गोलियां

अहमद सौदागर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आये दिन होने वाले गोलीकांड से साफ है कि अब शायद अपराधियों को पुलिस का खौफ नहीं रह गया है। एक दिन छोड़ हर दूसरे दिन बेखौफ बदमाश पुलिस अफसरों को खुली चुनौती दे रहे हैं, लिहाजा कानून व्यवस्था के लिए ये किसी बड़ी से कम नहीं है।

वही इनसे निपटने के लिए पुलिस की कार्रवाई महज हत्यारोपी तो एवं आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है।
दरअसल पिछले कुछ दिनों से गैर राज्यों जैसे बिहार के मुंगेर से आने वाले अवैध असलहों की तस्करी का बड़ा केंद्र बन चुका है। आतंक का पर्याय बने बेखौफ हमलावरों पर गौर करें तो इस मामले में सफेदपोश व कई प्रॉपर्टी डीलरों से लेकर अपराधी इन असलहों के बूते राजधानी लखनऊ में सिलसिलेवार सनसनी फैला रहे हैं।

जिस तरह से 22 दिनों में असलहों से लैस बदमाशों ने तेरह लोगों को गोली मारकर खुली चुनौती दी। इनमें चार लोगों की मौत हो गई जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग बुरी तरह से जख्मी होकर अभी भी अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
राजधानी में अवैध असलहों से हो रही ताबड़तोड़ घटनाओं ने फिलहाल जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों का चैन छीन रखा है।

कई बार पकड़ा जा चुका हैं अवैध असलहा का जखीरा

सनद रहे कि बीते कुछ साल पूर्व लखनऊ के नेशनल गन हाउस से उड़ाए गए अत्याधुनिक असलहों व कारतूस के साथ एटीएस ने चार असलहा तस्करों को पकड़ा था, बरामद असलहे किसी अन्य राज्य के नहीं बल्कि बिहार के मुंगेर के थे।

वैसे तो लखनऊ पुलिस ने कई बार असलहा तस्करों के सदस्यों को पकड़ा, लेकिन सरगना तक पुलिस के हाथ बहुत कम पहुंचे।
पुलिस अधिकारियों एवं उनके मातहतो की कार्यशैली पर गौर करें तो कई बार दबंग हमलावर व बदमाशों ने सरेराह एवं सरे शाम वारदातों को अंजाम दिया और पुलिस अवैध असलहों की तस्करी करने वालों की गर्दन तक पहुंचने में फिलहाल नाकाम ही साबित नजर आई।

जब इस्तेमाल हुए अवैध असलहे

सितंबर 2019 ही नहीं इससे पहले भी गहन नजर डालें तो 1 नवंबर 2015 को नरही में सपा पार्षद अतुल यादव उर्फ बंटू को गोलियों से भून दिया गया।
7 अगस्त 2015 मड़ियांव में सेल्समैन राजेश श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या।
17 अगस्त 2015 को बिजनौर कस्बे में किशन नंद यादव व उनके बेटे की गोली मारकर हत्या।
23 जनवरी 2014 को पीजीआई थाना क्षेत्र में मामूली विवाद में रिटायर्ड फौजी आर्यन सिंह की गोली मारकर हत्या।
29 मई 2013 को इंदिरा नगर में शूटरों ने घर में घुसकर मासूम माज को मौत के घाट उतार दिया।
12 जून 2011 को चारबाग रेलवे स्टेशन के पास व्यवसाय गुलाब टेकचंदानी के सीने में गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया गया।
2 अप्रैल 2011 को गोमती नगर में सीएमओ परिवार कल्याण डॉक्टर बीपी सिंह की हत्या कर दी गई।
2 मार्च 2011 को वजीरगंज में सरकारी मुलाजिम सैफ अहमद उर्फ सैफी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
खास बात यह रही की इन घटनाओं का जब पुलिस ने राजफाश किया तो असलहे अवैध बरामद हुए।

22 दिनों में 13 लोगों के सीने में दागी गयीं गोलियां

ठीक उसी तर्ज पर एक बार फिर शहर में गूंज रही अवैध असलहों की गोलियां। बेअंदाज अपराधी, बेबस खाकी,
22 दिनों में जिस तरह से बदमाशों ने गोलियों की बौछार की, इससे यही लग रहा है कि अपराधी बे अंदाज हो चुके हैं और खाकी नतमस्तक।


गौर करें तो सिर्फ सितंबर माह में हमलावरों एवं अपराधियों ने सिलसिलेवार वारदातों को अंजाम दिया।
अमीनाबाद में पूड़ी विक्रेता की गोली मारकर हत्या।
मड़ियांव में एक वकील ने लाइसेंसी असलहे से फायरिंग की।
मोहनलालगंज में प्रॉपर्टी डीलर की गोली मारकर हत्या।

हसनगंज में एक युवक ने नर्स की गोली मारकर हत्या कर दी और खुद को गोली से उड़ा लिया।
यह तो हत्या का मामला का कईयों के ऊपर गोलियों की बौछार कर बदमाशों ने जख्मी कर दिया जो आज भी अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

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