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“तीन नेत्र जाज्वलयमान सब देवो से वो भारी है”: अलका अस्थाना

मां दुर्गा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा आनलाइन गूगल मीट पर एक काव्य संध्या का आयोजन दिनांक 21.07.2021 को वर्षा ऋतु उत्सव के रूप में किया गया। जिसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान की महामंत्री गज़लकार वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ शोभा दीक्षित द्वारा गया।

मुख्य अतिथि बाल साहित्यकार अलका प्रमोद जी रही । विशिष्ट अतिथि डाॅ अर्चना प्रकाश व संयोजन संजय निराला जी का रहा । संस्था के संरक्षक दोहा सम्राट केवल प्रसाद सत्यम जी रहे । संस्था की संस्थापक अलका अस्थाना अमृतमयी द्वारा संचालन किया गया। उसी कड़ी में आमंत्रित कवयित्री प्रीति तिवारी नई दिल्ली व डाॅ मीरा त्रिपाठी पाण्डेय मुम्बई रही।

सर्वप्रथम मां वीणा पाणि की वन्दना व कार्यक्रम का शुभारम्भ कवयित्री प्रीति तिवारी द्वारा किया । तदुपरान्त दिल्ली से जुड़ी कवयित्री द्वारा वर्षा ऋतु पर कजरियों ने शमा बांध दिया,
मेरे मास में पावस है मुझ आज बरसने दो । मुझे यूं ही वरसने दो ।

कार्यक्रम की श्रृंखला में साहित्य पुट से रस भरती वर्षा ऋतु की फुहारों ने पटल पर नया रंग भर दिया । दोहा सम्राट केवल प्रसाद सत्यम् अपने दोहे से सभी को ींत्र मुग्ध कर दिया
धन्य धन्य मीरा हुई, धन्य हुए सुकरात ।
जहर प्रेम वश पीजिए सुनकर मन की बात।

अलका अस्थाना अमृतमयी ने सावन के आगमन पर भगवान शिव की बन्दना से ओत-प्रोत गीत गाकार कार्यक्रम को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया
हे अविनाशी हे घटवासी
त्रिभुवन विशाल भयकारी है
तीन नेत्र जाज्वलयमान
सब देवो से वो भारी है।

दिल्ली से पधारी प्रीति त्रिपाठी जी ने श्रृगार रस से भरा गीत बारिश की फुहारो से सुनाया
वारिश की रिमझिम बूंदो सा साथी तेरा प्यार
अंर्तमन को सींच रही है सावन की बौछार

विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारी डाॅ अर्चना प्रकाश जी ने गीत सुनाया,
झुक गए धरा पर रसिक मेघ, चंचल चपल विचत हरन मेघ।

अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डाॅ शोभा दीक्षित ने अपने मुक्तकों और कविता से सभी का मन मोह लिया । तुझे खुश देखकर जलता तबाही देश सकता ह ै
जमाना रोशनी में भी स्याही देख सकता है
तू किस भगवान के कदमों में जाकर सर झूुकाता है
तुझे खुद से बड़ा ही केवल पिता ही देख सकता है

कार्यक्रम का समापन संस्थान के संरक्षक केवल प्रसाद सत्यम द्वारा किया गया।

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