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राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित “21वीं शताब्दी की चुनौतियां और युवा” विषयक वेबीनार

प्रयागराज।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित “21वीं शताब्दी की चुनौतियां और युवा” विषयक वेबीनार में बोलते हुए केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के कुलपति प्रो. तिराकप्पा वेंकप्पा कट्टीमनी जी ने प्रतिभागियों से आदेशों की प्रतीक्षा किए बगैर ही काम में लग जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को एकांत में भी काम करना चाहिए। महात्मा गांधी नॉलेज और वर्क दोनों को एक साथ जोड़ने के पक्षधर थे।

उन्होंने आंध्रप्रदेश में लोक प्रचलित कहावत का उदाहरण देते हुए कहा कि मंत्रों से आम से पेड़ नहीं गिरते बल्कि उसके लिए उद्यम करना पड़ता है। विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को भी संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी उनका अनुकरण करते हैं, उनके सेवाभाव का अनुकरण करते हैं इसलिए उन्हें भी नई शिक्षा व्यवस्था और नए समाज के लिए अपने मनों को उत्तरोत्तर आगे ले जाना होगा।


राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा जी ने संवादहीनता को चुनौतियों की वजह बताया। उन्होंने कहा कि शैक्षिक प्रशासकों को पानी की तरह होना चाहिए। जैसी जहां आवश्यकता हो वैसा रूपाकार ग्रहण करने की क्षमता समाज परिवर्तन के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सोते हुए सिंह के पास भोजन चल कर खुद नहीं आता, जीवन उद्यम का नाम है। परिश्रम से ही जीवन की सार्थकता है। सदी की चुनौतियों का समाधान निरन्तर परिश्रम और आत्म निर्माण करते हुए राष्ट्र निर्माण करना है। आधा अधूरा और अधकचरा ज्ञान चुनौतियों का कारण है, इसलिए पूर्णता के लिए महापुरुषों की जीवनियों का अनुसरण किया जाना चाहिए।


उत्तर प्रदेश शासन के राष्ट्रीय सेवा योजना के राज्य संपर्क अधिकारी डॉक्टर अंशुमाली शर्मा जी ने युवाओं को संवेदनशील बनने पर जोर दिया। उन्होंने कहा की उसी के जमीर में दम होगा जिसकी जरूरतें कम होगी। मितव्ययिता के साथ जीना भी चुनौतियों का एक समाधान हो सकता है। दूसरों का दर्द बांटना भी समस्याओं के हल का कारण बन जाता है।


कार्यक्रम के आयोजक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समन्वयक डॉ राजेश कुमार गर्ग ने युवाओं को आत्मत्याग के साथ जीने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब हम स्वार्थ के के संकुचित मंडल से बाहर निकलकर विचार करना, जीना सीख जाते हैं, तब हम केवल अपनी नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी अनेक चुनौतियों का हल भी प्राप्त कर लेते हैं।
कार्यक्रम का संचालन चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय के डॉ रितेश त्रिपाठी जी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शशिकांत शुक्ल ने किया।

कार्यक्रम में देशभर के 28 राज्यों से 1745 प्रतिभागियों ने नामांकन किया था।

डॉ राजेश कुमार गर्ग
समन्वयक
राष्ट्रीय सेवा योजना
इलाहाबाद विश्वविद्यालय

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