
लखनऊ।
आज रविवार को अपरान्ह 3 बजे से ” कुछ बात कुछ जज्बात “ मंच पर बाल विकास एवं बाल संरक्षण विषय पर लखनऊ के गणमान्य साहित्यकारों द्वारा परिचर्चा की गई, जिसमें आदरणीय नरेन्द्र भूषण अध्यक्ष रहे । साहित्य भूषण श्री दयानन्द पांडे जी मुख्य अतिथि थे ।
श्री गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी विशिष्ठ अतिथि थे । सुश्री अलका प्रमोद जी एवं सुश्री नीलम राकेश मुख्य परिचर्चाकार रहीं । कार्यक्रम का सन्चालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ o अर्चना प्रकाश ने किया ।
कार्यक्रम का प्रारंभ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी की सरस्वती वंदना से हुआ । परिचर्चा में सुश्री अल्का जी ने कहा, बच्चे ही देश और समाज का भविष्य हैं, इसलिए उनके विकास एवँ संरक्षण के लिये बच्चों को उनके मानसिक स्तर के अनुरूप ही साहित्य पढ़ने के लिए देना चाहिए ।
नीलम राकेश जी ने कहा एकल परिवार प्रथा के कारण बच्चों की स्थिति दयनीय है । जो बच्चे गरीबी रेखा के नीचे हैं उनके संरक्षण के लिये हम सबको सामने आना चाहिए । गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी ने कहा बच्चे की परवरिश की परिस्थिति एवं परिवार के संसाधन ही बच्चों के संस्कार तै करते हैं । एक ही परिस्थिति में दो बच्चों की प्रतिक्रिया अलग अलग होती है ।
नरेन्द्र भूषण जी ने कहा बच्चा जब गर्भ में होता है तभी उसके संस्कार शुरू हो जाते हैं । इसलिए भावी माताओं को सशक्त होना चाहिए । निर्धन परिवारों में जो बच्चों को कमाई का जरिया मानते हैं वो गलत है और इसे रोकना होगा । दयानंद पाण्डे जी ने कहा बच्चों की मुख्य धुरी मां ही होती है । माँ ही वो कुम्हार है जो बच्चों को जैसा चाहे आकार दे सकती है ।
कार्यक्रम के समापन में डॉ अर्चना प्रकाश जी ने कहा सरकार बच्चों के विकास और उनके संरक्षण के लिए बहुत सी योजनाएं चला रही है । फिर भी रेलवे स्टेशनों पर ,मंदिरो के बाहर, भीड़ वाली सड़कों पर भीख मांगते बच्चे मिल ही जाते हैं । बच्चों के संरक्षण के लिए समाज के सभी वर्गों को एकसाथ एकजुट होना पड़ेगा । डॉ अर्चना प्रकाश जी ने सभी साहित्यकारों को आभार ज्ञापन किया एवं अच्छे स्वास्थ्य की मंगल कामनाओं के साथ परिचर्चा का समापन किया ।
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