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“मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा?” : व्यंग्य kjs

“मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा”?
व्यंग्य: डॉ कमलजीत सिंह kjs
आज अख़बार में सुबह-सुबह पढ़ा कि भांजो ने अपने मामा की लाठी डंडे से पीट कर हत्या कर दी। इसी प्रकार की खबरें अमेरिका में पढ़ने को आती है लेकिन वहां पर गन कल्चर है । हमारे देश में ‘लाठी कला’ ज़माने से प्रचलित है। कहते भी हैं कि ‘जिसकी लाठी उसी की भैंस’।
लाठी को बनाना आसान नहीं होता, लेकिन घर-घर में लाठी मौजूद रहती है और और बैठक में प्रमुख स्थान पर सुसज्जित रखा जाता है ।
पहले लाठी का चुनाव किया जाता है। लाठी नर बांस से बनाई जाती है, फिर गर्म करके तेल मालिश करके तैयार होती है। इस प्रक्रिया से वह मज़बूत रहती है और पिटाई करने पर शरीर पर ‘स्वस्थ’ निशान छोड़ती है।
लाठी पुलिस के हाथों में, बुजुर्गों के हाथों में और शान्ति के दूत गांधी जी के हाथों में भी आराम से दिखाई पड़ती है। हालांकि यह अक्सर बच्चों पर सुधार कार्यक्रम में काम आती है, किंतु कभी-कभी इसका ‘सदुपयोग’ दुश्मन से हिसाब-किताब करने में भी किया जा सकता है।
पहले लोगों के हाथों में बंदूक होती थी, जिससे वह दुश्मनी निभाते थे, किंतु अब लाठी डंडा ही शक्तिशाली लोगों का मजबूत हथियार है। अमेरिका में भी इसका प्रचलन किया जाना चाहिए। वहां जो रिवाल्वर एवं गन्स रखने की आज़ादी है, उसको समाप्त करना चाहिए। अभी आपने देखा ट्रम्प साहब पर तीन अटैक हो चुके हैं, लेकिन गोली एक भी नहीं लगी। यदि हाथों में लाठी होती तो समझिए अपने ‘टारगेट’ पर वह सही प्रहार कर सकता था। वहां स्कूलों में अक्सर ‘गन शॉट’ की घटनाएं होती रहती है, जहां निर्दोषों का बेमतलब कत्ल हो जाता है। हांथ में लाठी होने से सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।
तो अंत में कहना यही है कि गांव में अक्सर झगड़ा होता है- ‘मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा’।
यह तो सारी दुनिया ही जानती है कि ‘भगवान की लाठी में आवाज़ नहीं होती’।
अतः ‘लाठी-कला’ पर सरकारों को विशेष ध्यान देना चाहिए।
"लाठी"" व्यंग्य #DrKamaljitsingh #Satireonlaathi #कमलजीत सिंह व्यंग्य रचना 2026-04-30
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