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प्रधानमंत्री की अपील और फरमान की धज्जियां क्यों उड़ाते हैं लोग?

संघर्ष/ महामारी/ जंग में कुछ कर रहे अमल तो कुछ बरत रहे लापरवाही
प्रधानमंत्री का फरमान, फिर भी मदद का हवाला दे लगाते हैं सड़कों पर भीड़
पुलिस काबू करने में जुटी, लोग लड़ने को तैयार
दो जिलों में हुई घटना के बाद सच आया सामने


ए अहमद सौदागर

लखनऊ।

आदेश और निर्देश का पालन कड़वा होता है। कुछ लोग इसे अमल कर पीछे हट जाते हैं, तो कुछ के दिलों में फरमान नहीं मानेंगे इसकी आग उनके भीतर धधकती रहती है।
देश व प्रदेश में कोरोनावायरस जैसी फैली महामारी से निपटने और उससे बचने के लिए केन्द्र सरकार के आदेश पर राज्य सरकार अपने अपने राज्यों में महामारी को हराने के लिए लाकडाउन कर लोगों से घर में ही रहने की हिदायत के साथ अपील।


देश के किसी अन्य राज्य की यूपी के कन्नौज व अलीगढ़ जिले में अधिक लोग एक साथ जमा न हो, इसके लिए पुलिस ने रोका तो खाकी वालों से भिड़ गए और बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस सहित कई लोग जख्मी हो गए।
यह तो सूबे दो जिलों की बात रही‌।

अगर राजधानी लखनऊ की ओर मुड़ कर देखें तो राशन की दुकानों एवं परेशान लोगों को खाने-पीने का सामान देते समय एक मीटर की दूरी के बजाए एक फ़ीट की दुरी पर देते नजर आने के साथ फोटो खिंचवा कर डंका पीटने जुट जाते हैं कि हमने गरीब मजदूरों तथा दिहाड़ी मजदूरों को राशन व खाना वितरण किया है।
फिलहाल इस कोरोनावायरस जैसी महामारी से बचने के बजाए अधिकतर लोग भोजन कराने के नाम सड़कों एवं गलियों में भीड़ जमा कराने बाज नहीं आ रहे हैं ॽ
वही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार लोगों एक से दूरी बनाए रखने की अपील करने में जुटे हुए हैं, इसके बावजूद लोग बाग प्रधानमंत्री के अपील और फरमान की धज्जियां उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
पूरे देश व प्रदेश में फैली महामारी से बचने और उसे हराने के लिए एक बार फिर प्रधानमंत्री ने आगामी नौ अप्रैल को अपने अपने घरों में दीप जलाकर महामारी से बचने के लिए संदेश दिया।


बीते दिनों चाइना से फैली कोरोनावायरस बीमारी के चलते तब हड़कंप मचवा दिया, जब इटली सहित कई देशों में कोरोनावायरस अपनी चपेट ले लिया।
इसकी आहट मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीरता से लिया और इस महामारी से निपटने के लिए बीते 24 मार्च 2020 से पूरे देश में लाकडाउन कर दिया, शुक्रवार को नौ दिन हो चुके।
देश व प्रदेश में लाकडाउन होते ही कोई बिला वजह अपने घरों से बाहर न निकलें, इसे रोकने खाकी के सामने अचानक एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई।
इससे निपटने को तैनात पुलिस के लिए यह चुनौती इतनी बड़ी होगी, उसे अंदाजा भी नहीं रहा होगा।
हालांकि कानून व्यवस्था और एक साथ भारी संख्या में सड़कों पर आने से पुलिस को काफी कठिनाइयों से जूझना पड़ा, लेकिन जल्द ही भीड़ को नियंत्रित कर काबू करने में फिलहाल कामयाब रही और परेशान लोगों को सवारी मुहैया करा उनके घरों को भेजने में कामयाब रही।
यही नहीं हमेशा कठोर कहे जाने वाली पुलिस भूखे और परेशान लोगों के लिए हमदर्द बनकर सबसे पहले आगे आकर मददगार बनकर इतिहास रच दिया।
अभी भी पुलिस परेशान लोगों के पास जाकर तन,धन और मन मदद करने में जुटी हुई है।

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