
विश्व आयुर्वेद मिशन द्वारा खाद्य दिवस पर स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन
संपन्नता के साथ भोजन को फेकने की प्रवृत्ति बढ़ रही है-डॉ तोमर
विश्व खाद्य दिवस हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन न केवल हमें इस बात का एहसास कराता है कि, हमें दुनिया के व्यंजनों को खाने के लिए कितने विशेषाधिकार प्राप्त हैं, बल्कि यह दिवस गैर-विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के बारे में जागरूकता भी बढ़ाता है। यह दिन खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना की भी याद दिलाता है और दुनिया भर में भूख से त्रस्त वर्ग को भी उजागर करता है।
यह बातें ऑनलाइन स्वास्थ्य संगोष्ठी में विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष डॉ जी एस तोमर ने कही।उन्होंने बताया कि
इस वर्ष विश्व खाद्य दिवस का थीम “स्वस्थ कल के लिए सुरक्षित भोजन अभी” है। भुखमरी एक वैश्विक चुनौती है। यदि हाल ही में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर नज़र डालें तो पता चलता है कि भारत में भुखमरी की स्थिति क्या है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत में भुखमरी की स्थिति को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। यद्यपि वैश्विक खाद्य उत्पादन इतना है कि सभी को आसानी से भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है फिर भी भोजन सभी के लिये सुलभ नहीं है।

गोदामों और कोल्ड स्टोरेज की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण भारत में कुल वार्षिक खाद्य उत्पादन का लगभग 7% तथा फल एवं सब्ज़ियों का लगभग 30% बर्बाद हो जाता है।
भोजन की बर्बादी को लेकर न केवल सरकारें बल्कि सामाजिक संगठन भी चिंतित हैं। दुनिया भर में हर साल जितना भोजन तैयार होता है उसका लगभग एक-तिहाई बर्बाद हो जाता है।
बर्बाद किया जाने वाला खाना इतना होता है कि उससे दो अरब लोगों के भोजन की ज़रूरत पूरी हो सकती है।
भारत में बढ़ती संपन्नता के साथ ही लोग खाने के प्रति असंवेदनशील हो रहे हैं।
खर्च करने की क्षमता के साथ ही खाना फेंकने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। आज भी देश में विवाह स्थलों के पास रखे कूड़ाघरों में 40 प्रतिशत से अधिक खाना फेंका हुआ मिलता है।
अगर इस बर्बादी को रोका जा सके तो कई लोगों का पेट भरा जा सकता है।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पूर्व शोध अधिकारी डॉ शांति चौधरी ने कहा कि भोजन की बर्बादी दुनिया के करोड़ों बच्चों के कुपोषण के लिये भी ज़िम्मेदार है। पोषण के अधिकार का बाधित होना, बच्चों की शिक्षा और आगे चलकर आजीविका के अधिकार को भी बाधित करता है। कई देशों में, विशेष रूप से दुनिया के अविकसित हिस्सों में भुखमरी एक बड़ी समस्या और चुनौती है और इस मुद्दे का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए सभी लोगों के बीच जागरूकता की आवश्यकता है।
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि दुनियाभर में 14 फीसदी खाद्य पदार्थ इसलिए खराब हो जाता है क्योंकि उसे काटने, रखने और आपूर्ति करने की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह 17 फीसदी खाद्य पदार्थ उपभोक्ता स्तर पर खराब होता है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 69 करोड़ से अधिक लोग हर दिन भूखे पेट सोते हैं।
भोपाल की प्रसिद्ध न्यूट्रीशन एवं डाइट कन्सलटेंट डॉ अमिता सिंह ने बताया कि अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए स्वस्थ भोजन करना जरूरी है।बैलेंस्ड डाइट में सभी खाद्य समूहों को शामिल करना चाहिए।उन्होंने लाइफस्टाइल जनित बीमारियों से बचने के लिए आवश्यक आहार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीयों लोगों को अपने खाने में प्रोटीन के साथ साथ आवश्यक पोषक तत्व लेने पर ध्यान देने की जरूरत है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ कामिनी धीमान ने किशोरावस्था, गर्भावस्था एवं मीनोपॉज अवस्था मे शरीर के लिए आवश्यक भोज्य पदार्थों के विषय मे जानकारी दी।
हेमवती नंदन बहुगुणा डिग्री कॉलेज प्रयागराज की प्रोफेसर नीतू सिंह ने कहा किशोरावस्था में लड़कियों को आयरन कैल्शियम की अधिक आवश्यकत होती है पर कई घरों में लापरवाही के कारण इन्हें पोषण नही मिल पाता जिससे आगे चलकर अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे विश्व आयुर्वेद मिशन के उत्तर प्रदेश सचिव एवं आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ अवनीश पाण्डेय ने बढ़ती जनसंख्या को भुखमरी का कारण बताते हुए कहा कि आज जनसंख्या नियंत्रण बिल समय की जरूरत है।आज लोग गांव में खेती छोड़कर शहर की जीवनशैली को अपना रहे हैं।शहरीकरण एवं वन संसाधनों की कटाई भी खाद्य उत्पादन के गिरते स्तर के लिए जिम्मेदार हैं।
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